मुख्यपृष्ठसमाचारनालों से निकलनेवाले गंदे पानी पर ड्रोन की नजर!

नालों से निकलनेवाले गंदे पानी पर ड्रोन की नजर!

• समुद्र में छोड़े जा रहे पानी का होगा अध्ययन
• मनपा ने कंसल्टेंसी के लिए मंगवाए टेंडर

सामना संवाददाता / मुंबई । महानगर में मुंबईकरों द्वारा रोजाना लगभग हजारों एमएलडी गंदा पानी नाले में छोड़ा जाता है, बाद में सीवरेज (गंदे पानी) को प्रक्रिया कर समुद्र में छोड़ा जाता है। इसके बावजूद भी कई जगहों पर सीवरेज लाइन का गंदा पानी सीधे समुद्र एवं मुंबई से सटी तमाम खाड़ियों में पहुंच रहा है। इतना ही नहीं, कुछ सीवरेज लाइन में खामियां सामने आई हैं। यहां शुष्क कीचड़ अथवा कचरे मुहाने पर जमा होने से भी समुद्र में गंदगी का प्रमाण मिल रहा है, जिसके चलते समुद्र का जल प्रदूषित होता है। मनपा अभी से सचेत रहते हुए सभी नालों एवं समुद्र में गंदा पानी छोड़नेवाली सीवरेज लाइन के मुहाने पर ड्रोन से अध्ययन करेगी। इसके लिए एक कंसल्टेंसी को भी नियुक्त किया जाएगा। हाल ही में मनपा ने इस अध्ययन करनेवाली संस्था के लिए एक टेंडर आमंत्रित किया है।
मनपा के लिए यह पहला मामला है, जब नालों से होकर समुद्र में छोड़े जानेवाले पानी में गंदगी के प्रमाण को जांचने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा। यहां सीवरेज लाइनों के भीतर भी सूखे और शुष्क कीचड़ एवं कचरा जमा होने की जांच की जाएगी। इस अध्ययन के बाद एक रिपोर्ट सौंपी जाएगी, जिस पर मनपा एक्शन प्लान कर सकती है। मनपा सीवरेज सुधार योजना के तहत समुद्र में छोड़े जानेवाले पानी में गंदगी के प्रमाण को जांचने का काम शुरू होगा। इस काम में पहली बार ड्रोन का उपयोग किया जाएगा। ड्रोन के जरिए सीवरेज लाइन और नालों के पानी को लेकर निगरानी होगी। सभी संदेहजनक नालों एवं सीवरेज लाइनों की ड्रोन द्वारा फोटो निकालकर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाएगा।
उपनगरों के २७ नाले समुद्री खाड़ियों में पानी सीधे छोड़ रहे हैं। मुंबई शहर और उपनगर में ९ ब़ड़ी सीवरेज लाइनें हैं, जो सीवरेज की प्रक्रिया के बाद उस पानी को सीधे समुद्र में छोड़ रही हैं। मीठी नदी, पोइसर नदी, दहिसर नदी आदि के पानी को भी समुद्र में छोड़ा जा रहा है।

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