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मौसम की बेरुखी से पूरी तरह नहीं जमी चद्दर ट्रैक … ट्रैकिंग के लिए 105 की बजाय 15 किमी पर ही मिली अनुमति

सुरेश एस डुग्गर
जम्मू।  मौसम के बेरूखी से सिर्फ जम्मू कश्मीर ही नहीं बर्फीले रेगिस्तान के रूप में प्रसिद्ध लद्दाख भी परेशान है। उसकी परेशानी का आलम यह है कि बर्फ पर ट्रैकिंग प्रेमियों के लिए प्रसिद्ध चद्दर ट्रैक ने भी इस बार उन्हें धोखा दे दिया। हुआ यह की जो 105 किमी लंबी नदी सर्दियों में पूरी तरह जम जाती थी वह मौसम की बेरुखी के कारण सिर्फ 15 किमी तक ही ठोस रूप में जम पाई और उसी पर ट्रैकिंग की अनुमति दी गई और वह भी 6 दिनों के बाद।

अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है कि असामान्य मौसम का असर 105 किमी के चद्दर ट्रैक के साथ-साथ आइस हाकी पर भी दिखाई दिया, जिसके लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करने के लिए शून्य से चार डिग्री सेल्सियस नीचे की आवश्यकता होती है।

इस सर्दी में असामान्य रूप से गर्म मौसम ने आइस हाॅकी और लद्दाख के ठंडे रेगिस्तानी पहाड़ों में 105 किलोमीटर के चद्दर ट्रैक जैसे चरम शीतकालीन खेलों को भी प्रभावित किया है, जहां न्यूनतम तापमान शून्य से 40 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है और इसे देश की सबसे ठंडी जगह माना जाता है।

जंस्कार नदी पर देर से बर्फ की परतें बनने के कारण इस वर्ष चद्दर ट्रैक को छोटा कर दिया गया। यह पिछले साल की तुलना में छह दिन देरी से शुरू हुआ, जब 14 जनवरी की तुलना में 8 जनवरी को चद्दर ट्रैक को हरी झंडी दिखाई गई थी। अधिकांश ट्रेकर्स ने इस साल आठ-नौ दिनों की तुलना में चार रात और पांच दिनों के ट्रैक के लिए पंजीकरण कराया है, जब जंस्कार नदी पूरी तरह से जमी हुई थी और तापमान शून्य से 30 डिग्री सेल्सियस नीचे चला जाता है।

अधिकारियों ने कहा कि एक रेकी टीम ने जनवरी के पहले सप्ताह में चद्दर ट्रैक का दौरा किया और इसे साहसी लोगों के लिए जोखिम भरा बताया। पिछले सप्ताह की गई नवीनतम रेकी में, केंद्र शासित प्रदेश आपदा राहत टीम और लद्दाख माउंटेन गाइड्स एसोसिएशन की एक टीम ने पाया कि 15 किमी तक का चद्दर ट्रैक बहुत अच्छी तरह से बन चुका है जिस पर ट्रैकिंग की अनुमति दी गई है।

जानकारी के लिए जंस्कार घाटी के गांवों के अधिकांश युवा और उत्साही लड़के चद्दर ट्रैक में कुली, शिविर प्रबंधक, समूह नेता के रूप में काम करते हैं। चद्दर ट्रैक क्षेत्र में अर्थव्यवस्था को चलाने में भी मदद करता है। औश्र यही नहीं इास बार मौसम की बेरूखी कितनी थी इसी से भी पता चलता है कि लद्दाख के करगिल शहर में आइस हाकी रिंक में भी 13-14 जनवरी को दुर्लभ दृश्य देखे गए जब आयोजकों ने ठंड को बढ़ाने के लिए रात में पंखे चालू कर दिए।

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