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‘घाती’ सरकार की घाती हरकत से महाराष्ट्र में ढाई करोड़ लोगों के निवाले पर संकट! राशन दुकानदारों की हड़ताल से गरीबों को नहीं मिल पाएगा अनाज

सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य की ‘घाती’ सरकार की घाती हरकतें थमने का नाम ही नहीं ले रही हैं। अब उसकी ताजी हरकत से राज्य के ढाई करोड़ गरीबों के मुंह के निवाले पर संकट मंडराने लगा है। इसका कारण है महाराष्ट्र में ५० हजार राशन दुकानदारों की जारी हड़ताल। इसके कारण गरीबों को अनाज मिलने में कठिनाई आने लगी है।
बता दें कि ‘घाती’ सरकार द्वारा शीतकालीन सत्र में राशन दुकानदारों से किए गए वादों को पूरा नहीं किया गया। इस कारण ५६ हजार राशन दुकानदार हड़ताल पर चले गए। इस कारण सरकारी अनाज पर निर्भर राज्य की करीब ढाई करोड़ जनता भुखमरी के कगार पर पहुंच गई है। असल में राशन दुकानदारों की कई मांगें सरकार के समक्ष लंबित हैं। अब राशन दुकानदारों के महासंघ ने इन लंबित मांगों के प्रति उदासीनता बरतने के लिए केंद्र व राज्य सरकार की आलोचना की है। अपनी मांगों को लेकर दुकानदारों ने शीतकालीन सत्र के दौरान मोर्चा निकला था, जबकि सरकार ने इसे नजरअंदाज कर दिया। महासंघ की ओर से दिए गए बयान पर संज्ञान लेते हुए सरकार ने शीतकालीन सत्र के दौरान नागपुर में पदाधिकारियों के साथ बैठक की थी। इस बैठक में सिर्फ आश्वासन दिया गया। सरकार की ओर से भी कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, इसलिए अब महासंघ की ओर से अनिश्चितकालीन हड़ताल का आह्वान किया गया है। फेडरेशन का कहना है कि आगामी १५ जनवरी तक सरकार के संज्ञान नहीं लेने पर अब दूसरे चरण में दिल्ली में मार्च निकालकर आक्रामक रुख अपनाया जाएगा। इनकी प्रमुख मांग है कि महंगाई के अनुरूप प्रति क्विंटल कमीशन ३०० रुपए किया जाए। नई ४जी ई-पॉस मशीन शीघ्र उपलब्ध कराई जाए। बेहतर ऑनलाइन प्रक्रिया विकसित की जाए। मंजूरी और उसके प्रबंधन के लिए एक स्वतंत्र नीति निर्धारित करने के साथ-साथ हर महीने की ५ तारीख तक अनाज वितरण मार्जिन का भुगतान कराया जाए। बता दें कि पाम तेल की बजाय सूरजमुखी या सोयाबीन तेल उपलब्ध कराने की मांगों को लेकर ११ दिसंबर को नागपुर में एक मार्च निकाला गया था। राशन और भारत ब्रांड के तहत उत्पादों की बिक्री की अनुमति मांगी गई है। फेडरेशन का कहना है कि इस समय सरकार ने जो वादे किए हैं, उन्हें पूरा किया जाए।
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इन योजनाओं पर असर
राज्य में लगभग ढाई करोड़ लोगों को राष्ट्रीय सुरक्षा योजना, अंत्योदय योजना, प्रधान एवं किसान लाभार्थी योजना के माध्यम से खाद्यान्न दिया जा रहा है। इस हड़ताल का इन योजनाओं पर असर पड़ेगा और गरीबों को इनका लाभ नहीं मिल पाएगा।

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