मुख्यपृष्ठसमाचारजिलाधिकारी व एसएसपी की सर्तकता से बड़ा हादसा होने से टला

जिलाधिकारी व एसएसपी की सर्तकता से बड़ा हादसा होने से टला

  • पल-पल पैनी निगाह रखे हुए थे अधिकारी

कमल कांत उपमन्यु / मथुरा

विश्व प्रसिद्ध ठा. बांके बिहारी मंदिर में हुए हादसे के बाद कुछ लोग जिला प्रशासन को पूरी तरह दोषी ठहरा रहे हैं। लेकिन अगर जिला प्रशासन सतर्क  न होता तो और बड़ा हादसा घटित हो सकता था क्योंकि अधिकारी ठा. बांके बिहारी स्थित कंट्रोल रूम के बाहर से श्रद्धालुओं और परिसर पर नजर रखे हुए थे, तो वहीं बीच-बीच में वे कंट्रोल रूम को भी जाकर चेक कर रहे थे। घटना होने के कुछ ही क्षणों में जिलाधिकारी, एसएसपी अपने अधीनस्थ अधिकारियों के साथ नीचे आ गए और उन्होंने बड़ी घटना होने से बचा लिया। इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री ने दो सदस्यीय टीम गठित की है, जो १५ दिन में अपनी जांच सौंप देगी।
गौरतलब है कि विश्व प्रसिद्ध ठा. बांके बिहारी में लोगों की आस्था बहुत ज्यादा है। इसी का नतीजा है कि यहां दिन-प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है। बांके बिहारी मंदिर की ओर जानेवाली गलियां बहुत संकरी हैं और अंदर का परिसर भी ३६ सौ स्क्वेअर फिट है और इस पर वीआईपी कल्चर भी हावी है। जन्माष्टमी के अवसर पर होनेवाली मंगला आरती जो कि साल में एक बार ही होती है पर जनसैलाब उमड़ पड़ा, जबकि प्रशासन द्वारा यहां पर श्रद्धालुओं की सुविधा व सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। खुद जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिषेक यादव ने सुरक्षा की पूरी कमान अपने हाथों में ले रखी थी। कंट्रोल रूम स्थित गैलरी से अधिकारी पूरी व्यवस्था देख रहे थे व कंट्रोल रूम से पल-पल की जानकारी ले रहे थे। भीड़ ज्यादा होने के कारण मंदिर में सफोकेशन होने लगा इसी के कारण एक श्रद्धालु बेहोश होकर गिर प़ड़ा,जिसे अस्पताल पहुंचाने के लिए पुलिस उसे बाहर निकाल रही थी इसी दौरान और पब्लिक अंदर घुस गई और वहां भगदड़-सी मचने लगी। यह देख वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक व जिलाधिकारी नीचे आए और अनांउस कर लोगों से भगदड़ न करने की अपील की और उन्होंने खुद ही अधीनस्थ अधिकारियों के साथ अव्यवस्था को काफी हद तक संभाला, लेकिन इसी दौरान दो श्रद्धालुओं की दम घुटने से दुखद मौत हो गई। भगदड़ में एक दर्जन से अधिक लोग घायल भी हो गए, जिन्हें तुरंत ही अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। मृतकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी दम घुटने से हुई मौत बताया गया है। इतना जरूर है कि अगर समय रहते जिला प्रशासन स्थिति पर कंट्रोल नहीं करता तो यह हादसा और बड़ा हो सकता था। बाकी दो सदस्यीय टीम की जांच में सब कुछ साफ हो जाएगा।

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