मुख्यपृष्ठसमाचारस्तन कैंसर का पता लगाएगा ईजी चेक! ...रक्त परीक्षण से चलेगा पहले...

स्तन कैंसर का पता लगाएगा ईजी चेक! …रक्त परीक्षण से चलेगा पहले स्टेज का पता

• २०३० तक २० लाख के पार होंगे मरीज 
• भयंकर बीमारी से सालाना होती हैं ९० हजार मौतें
सुजीत गुप्ता / मुंबई
कैंसर का समय पर पता नहीं लगने से सालाना लाखों लोगों की मौत हो जाती है। डॉक्टरों की मानें तो कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का यदि शुरुआती चरण में ही पता लग जाए तो मरीज की जान बचाना संभव है परंतु कैंसर के ५० फीसदी मामले तब सामने आते हैं जब मरीज इलाज के लिए डॉक्टरों के पास पहुंचते हैं। तीसरे चरण में कैंसर पहुंचने के कारण ये बीमारी मौत का कारण बनती है। परंतु अब स्तन कैंसर जैसी घातक बीमारी के शुरुआती चरण का पता आसानी से लगाया जा सकता है। अपोलो कैंसर सेंटर ने एक क्रांतिकारी आविष्कार किया है, जिसे ईजी चेक नाम दिया गया है। इस रक्त परीक्षण से आसानी से कैंसर के पहले स्टेज का पता लगा कर मरीज को मौत के मुंह में जाने से बचाया जा सकता है।
बता दें कि अपोलो कैंसर सेंटर सबसे उम्दा तकनीकों को लगातार आविष्कार कर रहा है। दातार कैंसर जेनेटिक्स के सहयोग से तैयार किया गया एक क्रांतिकारी रक्त परीक्षण है जो अत्यंत सटीकता से बिना लक्षण वाले व्यक्तियों में भी प्रारंभिक अवस्था में ही स्तन कैंसर का पता लगा सकता है। जिससे समय पर निदान व उपचार से मरीजों की जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। केवल एक छोटे से रक्त नमूने से अब ईजी चेक स्तन कैंसर को पहले ही स्टेज पर पहचानने में मदद करता है।
मृत्यु दर में आएगी कमी
अपोलो हॉस्पिटल्स के संस्थापक, अध्यक्ष, डॉ. प्रताप रेड्डी ने बताया कि समय पूर्व कैंसर का पता लगाने और विश्व स्तरीय कैंसर के इलाज के बारे में लोगों को जागरूक करने के हमारे मकसद के अनुसार ईजी चेक ब्रेस्ट का लॉन्च इस दिशा में बड़ी सफलता है, जो गुणवत्तापूर्ण तकनीकी विकास के साथ मृत्यु दर को कम करने के लिए समय पर निदान और उपचार सुनिश्चित करती है।
दातार कैंसर जेनेटिक्स के संस्थापक और अध्यक्ष, राजन दातार ने कहा, ‘दुर्भाग्य से ज्यादातर कैंसर के मामलों में इसका पता उच्च स्तरों पर लगाया जाता है, जिसके लिए अधिक गहन और महंगे इलाज की जरूरत होती है, जिसमें कमजोर करनेवाले दुष्प्रभावों और इलाज की विफलताओं का खतरा अधिक होता है। ईजी चेक-ब्रेस्ट सहयोगी अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान और नवप्रवर्तनों के वर्षों की परिणति है और इसको जनसंख्या-आकार के समूहों पर विकसित, परीक्षण कर वैध पाया गया है।’

 

अन्य समाचार