मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनाशंखवटी खाएं पेटदर्द भगाएं!

शंखवटी खाएं पेटदर्द भगाएं!

वैद्य हरीश सिंह।  ■ मैं २१ वर्षीय नवयुवक हूं। मेरे हृदय के माइट्रल वाल्व में खराबी हो गई है। डॉक्टर ने एमएस निदान करते हुए ऑपरेशन की सलाह दी है। मैं ऑपरेशन नहीं करवाना चाहता। दवा बताएं?
-अजीत, दहिसर, मुंबई
आपके हृदय के माइट्रल वाल्व में माइट्रल स्टेनोसिस (एमएस) हुआ है। इसमें वाल्व संकुचित हो जाता है, जिससे हृदय की प्राकृतिक क्रिया में बाधा उत्पन्न हो जाती है। इसका निदान प्राय युवावस्था में हो जाता है। स्टेनोसिस के कारण सांस लेने में कष्ट या अन्य कोई घातक लक्षण आगे जाकर उत्पन्न हो सकते हैं। इसमें शस्त्र कर्म जल्द-से-जल्द करवाना चाहिए। औषधि चिकित्सा से ये ठीक नहीं होता, परंतु कुछ आयुर्वेद की दवाओं के सेवन से शस्त्र कर्म को कुछ दिनों के लिए टाला जा सकता है। आप ऑपरेशन से न डरें। आजकल शस्त्र कर्म पहले की अपेक्षा आसान व सरल हो गया है। वृहत वात चिंतामणि रस की एक-एक गोली व लक्ष्मी विलास रस दो-दो गोली दो बार पानी के साथ लें। अबाना टेबलेट दो-दो दिन में दो बार लें। अर्जुनारिष्ट चार-चार चम्मच दो बार समप्रमाण पानी मिलाकर लें। अपने आपको वैद्यकीय निरीक्षण में रखें। मलबद्धता न हो, इसका विशेष ध्यान रखें। मलबद्धता दूर करने के लिए एक चम्मच पंचसकार चूर्ण रात को सोते समय गर्म पानी से लें।
■ मेरी उम्र ६८ वर्ष है। मैं स्वस्थ हूं लेकिन पारिवारिक कारणों से हमेशा असहज महसूस करता हूं। मोह-माया में फंसा हूं। रात में नींद नहीं आती है। दवा बताएं?
-चंद्रभान प्रजापति, आंबिवली, कल्याण
मन को स्वस्थ रखने के लिए अपने आपको मोह-माया से दूर रखने के साथ ही खुद को आध्यात्मिक कार्य में व्यस्त रखें। सुबह-शाम आधा घंटा पैदल चलें। हल्का-फुल्का व्यायाम व योगाभ्यास करें। छोटे बच्चों के साथ समय बिताएं। रसगंधा वटी एवं ब्राह्मी वटी दो-दो गोली दिन में दो बार पानी के साथ लें। भोजन के बाद चार-चार चम्मच सारस्वतारिष्ट समप्रमाण पानी मिलाकर लें। अश्वगंधा चूर्ण एक-एक चम्मच दूध के साथ सुबह-शाम लें। पंचकर्म के अंतर्गत शिरोधारा लें। मानसिक विकारों व तनाव में शिरोधारा बहुत ही उपयोगी कर्म है। अत: इसके कारण इसके प्रयोग से आपका तनाव दूर होगा एवं अच्छी नींद वगैरह भी आएगी। रात को सोते समय प्रभु का स्मरण कर गायत्री मंत्र का जाप करें।
■ मुझे पेचिश की शिकायत है। दिन में चार-पांच बार शौच जाना पड़ता है। पेट में दर्द भी होता है। मैं घर से बाहर जाने में डरता हूं। औषधि बताएं?
– प्रदीप वर्मा, सानपाड़ा, नई मुंबई
आप प्रवाहिका नाम की व्याधि से पीड़ित हैं। इस व्याधि में मरोड़ के साथ थोड़ा-थोड़ा मल त्याग व पेट में दर्द होता है। मल त्याग करने के बाद भी शौच के प्रति मन में आशंका बनी रहती है इसलिए व्यक्ति मानसिक तनाव से ग्रस्त रहता है। तनाव बढ़ने के कारण यह रोग बढ़ जाता है। इसी कारण व्यक्ति घर से बाहर निकलने को डरता है। आप भयभीत न हों। पंचामृत पर्पटी और कुटजघन वटी दो-दो गोली दिन में दो बार लें। नागर मोथा घन एक-एक गोली दो बार लें। कुटजारिष्ट चार-चार चम्मच दो बार, भोजन के बाद समप्रमाण पानी मिलाकर लें। पीने के लिए गर्म पानी ही पीएं। भोजन में छाछ एवं दही का प्रयोग करें। पेट दर्द की अवस्था में शंख वटी दो-दो गोली गर्म पानी से लें। हरी पत्तेदार सब्जियां एवं रोड साइड फूड खाने से बचें। इस रोग में व्यक्तिगत स्वच्छता बहुत प्रमुख है इसलिए व्यक्तिगत स्वच्छता व साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। खाने में मिर्च-मसाला, बासी खाना, चाइनीज फूड, जंक फूड आदि का सेवन बंद करें। खुद को प्रसन्न रखें क्योंकि व्यथा एवं तनाव रोग को बढ़ाते हैं।
■ मैं ५४ वर्षीय व्यक्ति डिलिवरी ब्वॉय का काम करता हूं। लगभग दो वर्ष पूर्व मुझे पीलिया हो गया था। पीलिया ठीक होने के बाद पाचन के साथ ही मेरा लीवर कमजोर हो गया। खून का रिपोर्ट तो सही है लेकिन सोनोग्राफी में पैâटी लीवर आता है। दवा बताएं?
-तीर्थराज, भिवंडी, ठाणे
आपका पाचन ठीक नहीं एवं लीवर कमजोर है, ऐसा आपको लगता है। आयुर्वेद की बहुत सारी दवाएं लीवर तथा पाचन तंत्र को मजबूत एवं ठीक करने में उपयोगी हैं। जैसे कुटकी, पुनर्नवा, कालमेघ, भूआमलकी, भृंगराज, आंवला, गुडूची, नीम, त्रिफला इत्यादि। परंतु लीवर की रामबाण दवा है आरोग्यवर्धिनी, जो सर्वगुण संपन्न बहुउपयोगी दवा है। आप आरोग्यवर्धिनी की दो-दो गोली दिन में दो बार लें। इसी के साथ पुनर्नवाष्टक क्वाथ चार-चार चम्मच दो बार भोजन के बाद लें। पैâटी लीवर होने के कारण आपको रहन-सहन एवं खान-पान पर विशेष ध्यान देना होगा। आप डीप प्रâाइड फूड, शराब, अत्यधिक दवाएं विशेषत: पेन किलर आदि का सेवन कम करें। बहुत सारी एलोपैथिक दवाइयां लीवर पर अपना विषाक्त प्रभाव दिखाती हैं।

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