मुख्यपृष्ठस्तंभवैद्यजी बताइए : त्रिभुवन कीर्ति रस खाएं सर्दी भगाएं!

वैद्यजी बताइए : त्रिभुवन कीर्ति रस खाएं सर्दी भगाएं!

डाॅ. हरीश सिंह।  दस दिनों पहले मैंने ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अर्जी दी थी लेकिन आंख की रोशनी ठीक नहीं है, कहकर डॉक्टर ने मेरी अर्जी रिजेक्ट कर दी। मेरी उम्र ३८ वर्ष है। आंखों का ड्रॉप बताएं?
– देवदत्त, कलवा, थाने
आपका नेत्र परीक्षण आवश्यक है। नेत्र परीक्षण की प्राथमिक जांच से आंखों की पूरी जानकारी प्राप्त हो जाती है। अपनी व दूसरों की सुरक्षा की दृष्टि से ड्राइविंग के लिए आंखों की रोशनी का अच्छा होना बहुत जरूरी है। केवल नेत्र बिंदु या आंखों में ड्रॉप डालने से फायदा नहीं होगा, जब तक कारणों को जानकर उसकी चिकित्सा न कराई जाए। आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए गाजर, सहिजन, शलजम, पालक, मक्खन, घी उपयोगी है। इनसे शरीर का सूक्ष्म पोषण होता है, परंतु फल व हरी सब्जियां उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। प्राथमिक चिकित्सा के रूप में मधु व दारू हरिद्रा द्वारा निर्मित एमडी आई ड्रॉप आप उपयोग में ला सकते हैं।

मुझे बार-बार सर्दी हो जाती है। कुछ भी खाता हूं तो शरीर में नहीं लगता। अपनी सेहत को लेकर मैं परेशान हूं। शारीरिक जांच में सब कुछ नॉर्मल है। हर तरह की दवाइयां लीं लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। अपनी सेहत वैâसे सुधारूं?
– कमल प्रसाद, भांडुप, मुंबई
आपको बार-बार सर्दी अर्थात एलर्जिक सर्दी हो जाती है। इसी व्याधि को आयुर्वेद में प्रतिश्याय के नाम से जाना जाता है। धूल, धुआं, महीन कण, बदबू गंध व फंगस की बदबू, तेज हवा, शीत पेय आदि के कारण भी सर्दी होती है। अत: आपको इन सबसे बचना चाहिए। रोज सुबह-शाम नाक के दोनों नथुनों में अणु तेल की दो-दो बूंद लगाएं। इसके कारण एलर्जी थम जाती है। साथ ही सर्दी के प्रति व्याधि प्रतिकार शक्ति बढ़ जाती है। जब सर्दी ज्यादा हो तो त्रिभुवन कीर्ति रस तथा लक्ष्मी विलास रस की दो-दो गोली दिन में तीन बार गर्म पानी से लें। गोजिव्हादि क्वाथ ४-४ चम्मच दिन में दो बार लें। सितोपलादि चूर्ण १-१ चम्मच, दो बार शहद के साथ मिलाकर खाएं। पौष्टिक आहार नियमित रूप से लें। जंक फूड, फास्ट फूड कम करें। उचित आहार लेने से आपके शरीर की शक्ति, व्याधि प्रतिकार शक्ति व ऊर्जा बनी रहेगी। बेकार में टॉनिक, सिरप, प्रोटीन पावडर के पीछे न पड़ें। भोजन में नियमित घी व दूध का सेवन करें। एक कटोरी दाल अवश्य खाएं।

 मैं १७ वर्षीय कॉलेज की छात्रा हूं। मेरी ऊंचाई ४ फुट ११ इंच व वजन ४२ किलो है। शाम के समय मेरे पांव के तलवों व पैरों में असहनीय पीड़ा होती है। थक जाती हूं और शरीर में काम करने की शक्ति नहीं बचती है। दवा बताएं?
-जगदीश कौर, सायन-कोलीवाड़ा, मुंबई
ऊंचाई कम होने के कारण आप शायद ऊंची एड़ी के सैंडल पहनती होंगी। ऊंची एड़ी के फुटवियर पहनने से घुटने के पास स्थित मांस पेशियों पर अधिक दबाव पड़ता है। यह दबाव लगातार बढ़ने से मांस पेशियों व हड्डियों पर जोर पड़ने से वहां सूजन जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है इसलिए इनका उपयोग न करें। रोज गरम पानी में अपने पैरों को डालकर १०-१५ मिनट सेंकें। लाक्षादि गुग्गुल व पुनर्नवादि गुग्गुल की दो-दो गोलियां दिन में तीन बार लें। पुनर्नवा मंडूर की दो-दो गोली दिन में दो बार सेवन करें। शतावरी चूर्ण दो चम्मच एक कप गर्म दूध के साथ में नियमित लें। महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं में फास्ट फूड, वड़ा-पाव, चाइनीज भेल, चाइनीज फूड, बर्गर, पिज्जा, प्रैंâकी आदि खाने का काफी प्रचलन है। इसके कारण पेट तो भरता है, परंतु शरीर को उपयोगी आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व नहीं मिलते हैं। अत: इन सबका त्याग करें। भोजन में आप नियमित अंकुरित धान्य, खजूर, गुड़, घी व दूध का प्रयोग करें।

 मेरी सांसों से दुर्गंध आती है। मेरा थूक गाढ़ा व लसीला रहता है। दुर्गंध के कारण मेरे मन में हीन भावना बढ़ रही है। मैं पान, तंबाकू अथवा गुटखा भी नहीं खाता। दवा बताएं?
-शिवम गुप्ता, लोअर परेल
मुख की स्वच्छता पर विशेष ध्यान रखें। मुंह और सांस से बदबू आना प्राय: पायरिया व नाक के रोगों में पाया जाता है। पायरिया रोग शत-प्रतिशत साध्य है। थूक गाढ़ा व लसीला है, यह लक्षण स्पष्ट नहीं है। शायद आप बलगम को थूक समझ रहे हैं। बलगम प्राकृतिक रूप में लचीला व गाढ़ा रहता है। नाक और श्वसन संस्थान के रोग में मुंह से दुर्गंध आने की शिकायत रहती है। बेहतर होगा कि आप किसी नाक-कान-गले के डॉक्टर को दिखाकर अपना परीक्षण कराएं। आप माउथ प्रâेशनर अथवा उसके समकक्ष दवाओं को मुख में रखकर चूसें।

एम.डी., पीएच.डी. (आयुर्वेद) प्राध्यापक व वरिष्ठ चिकित्सक, केजी मित्तल पुर्नवसु आयुर्वेद महाविद्यालय व अस्पताल, चर्नी रोड, मुंबई-०२

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