मुख्यपृष्ठसमाचारचाव से खाओ चाय का गिलास!

चाव से खाओ चाय का गिलास!

  • चाव से खाओ चाय का गिलास
    देश भर में १ जुलाई से सिंगल यूज प्लास्टिक पूरी तरह से बैन हो गया है। अब इंदौर के चायवाले ने चाय पिलाने के लिए डिस्पोजल गिलास का बेहतरीन विकल्प बनाया है, जिसे चाय पीने के बाद खाया भी जा सकता है। बता दें कि गोमटगिरी आश्रम पर पूनम रेस्टोरेंट के नाम से चाय की एक छोटी-सी दुकान है। दुकान संचालक विनोद कुमार राउका ने ग्राहकों को चाय पिलाने के लिए सोयाबीन और चावल से गिलास बनाया है, जो खाने में चाय के साथ बिस्किट का आनंद देता है। विनोद कुमार बताते हैं कि डिस्पोजल पर प्रतिबंध लगने के बाद उन्होंने ये गिलास तैयार किए। वह अपने ग्राहकों को मात्र २० रुपए में ऐसी चाय पिलाते हैं, जिसे पीने के बाद उसका गिलास भी खाया जा सकता है। यह गिलास पूरी तरह से शुद्ध है और इसे खाने के कोई साइड इपेâक्ट भी नहीं है। उनके इस बेहतरीन विकल्प को देखकर सैकड़ों लोग उनकी दुकान पर चाय पीने पहुंचते हैं। पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने के लिए दुकानदार के इस नायाब तरीके की हर तरफ तारीफ हो रही है। इससे न सिर्फ पर्यावरण की सुरक्षा हो रही है, बल्कि लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। लोग चाय का आनंद लेने के साथ ही गिलास को भी बड़े चाव से खा रहे हैं।
  • शराबी जूते
    दुनिया में आविष्कार की कमी नहीं है। अब दुनियाभर में बीयर के लिए प्रसिद्ध कंपनी  जूता बनाने की तैयारी में है। बीयर कंपनी हेनीकेन जूते की सोल में शराब भरकर बेचने को तैयार है। मशहूर शू डिजाइनर डोमिनिक सिआंब्रोन से कोलैबरेशन के बाद कंपनी ने इस नए शराबी जूते को लॉन्च करने की तैयारी की है, जिसका नाम ‘हेनेकिक्स’ होगा। शराब प्रेमियों और बीयर के फैंस के लिए बेशक यह नया आविष्कार किसी तोहफे से कम नहीं है। आपकी बीयर हमेशा आपके साथ होगी और कोई शक भी नहीं करेगा। इन कस्टमाइज जूतों का पहला लुक जारी करते हुए ट्विटर पर कैप्शन लिखा, ‘आपके लिए सोल पर डिजाइन किया गया हेनीकेन सिल्वर, जिसकी स्मूदनेस को अब करीब से देखा जा सकता है। इसे मशहूर डिजाइनर डोमिनिक सिआंब्रोन के सहयोग से डिजाइन किया गया। हाइनेकिक्स आपका रोजमर्रा का जूता नहीं है लेकिन ऐसे हर दिन आपको बीयर पर चलने को भी नहीं मिलता।’
  • बच्चे को जिंदा दफनाया
    गुजरात के साबरकांठा से हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जिले के गंभोई गांव के खेत में एक जिंदा बच्चे को दफना दिया गया। इसका खुलासा तब हुआ, जब किसान खेत पर पहुंचा तो वहां कीचड़ के बाहर एक छोटा सा हाथ देखा। इसके बाद उसने दूसरों की मदद से उस जगह की खुदाई करके उसे निकाला। बच्चे को हिम्मतनगर सिविल अस्पताल ले गए, जहां उसका इलाज किया जा रहा है। गंभोई पुलिस उपनिरीक्षक सी.एफ. ठाकोर ने स्थानीय मीडिया को बताया कि हमें सूचना मिली थी कि हितेंद्र सिंह के खेत में एक शिशु को जिंदा दफना दिया गया था। शिशु को बचा लिया गया और अस्पताल ले जाया गया। अधिकारी ने कहा कि एक बार माता-पिता या मां की पहचान हो जाने के बाद एक आधिकारिक शिकायत दर्ज की जाएगी और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।

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