मुख्यपृष्ठनए समाचारप्रश्नोत्तर काल में गूंजा स्कूल न जानेवाले बच्चों का मुद्दा

प्रश्नोत्तर काल में गूंजा स्कूल न जानेवाले बच्चों का मुद्दा

-एक तरफा जवाब से भड़का विपक्ष, स्कूल शिक्षा मंत्री का विपक्ष ने किया चौतरफा घेराव

सामना संवाददाता / नागपुर

विधानमंडल के शीतकालीन सत्र में तीसरे दिन प्रश्नोत्तर काल के दौरान स्कूल न जानेवाले बच्चों का मुद्दा जोरशोर से गूंजा। वहीं स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर द्वारा दिए गए एकतरफा जवाब से विपक्ष पूरी तरह से भड़क उठा और उनका चौतरफा घेराव किया। विधानसभा अध्यक्ष द्वारा स्कूल न जानेवाले और प्रवासी बच्चों की समस्या को हल करने के लिए महिला बाल कल्याण और नगर विकास विभाग के साथ बैठक करने का निर्देश दिए जाने के बावजूद स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर ने इसका हल निकाले जाने का आश्वासन दिया। इतना ही नहीं उन्होंने २० से कम छात्र संख्या अथवा एक शिक्षक स्कूलों को बंद करने की कोई नीति न होने की बात भी कही, जिस पर विपक्ष आक्रामक हो गया और सवालों की झड़ी लगा दी।
विधायक आशीष शेलार ने स्कूल न जानेवाले छात्रों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि महज १५ दिनों के सर्वे में तीन हजार से ज्यादा बच्चे स्कूल से बाहर पाए गए। ऐसे में पूरे प्रदेश में सही से सर्वे कराया जाए तो इस तरह के कितने बच्चे मिलेंगे जो स्कूल नहीं जा रहे हैं? मुंबई जैसे शहर में ऐसे ३५६ बच्चे मिले हैं। हालांकि मनपा का शिक्षा पर सालाना बजट ३,३४७ करोड़ रुपए है। उन्होंने सवाल किया कि क्या इसकी जांच होगी? यह खर्च कहां जाता है? सवालों का जवाब देते हुए केसरकर ने मामले की जांच का आश्वासन दिया। कांग्रेस सदस्य नाना पटोले ने पूछा कि शिक्षकों के पद कब भरे जाएंगे। उनके सवाल का जवाब देते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री केसरकर ने कहा कि कोर्ट की रोक हटने के बाद रोस्टर की जांच कर शिक्षकों की भर्ती शुरू की गई है।
स्कूल से बाहर पाए गए ३२१४ बच्चे
दीपक केसरकर ने लिखित जवाब दिया कि १७ अगस्त से ३१ अगस्त तक राज्य में कुल १,६२४ लड़के और १,५९० लड़कियों समेत कुल ३,२१४ बच्चे स्कूल से बाहर पाए गए। उस पर बालासाहेब थोरात की ओर से कई सदस्यों ने आपत्ति जताई। विपक्षी बेंच की ओर से सवालों की बौछार शुरू होते ही अध्यक्ष ने अगला सवाल उठाया। इसके बाद कहीं जाकर केसरकर का सवालों से पीछा छूट सका।

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