मुख्यपृष्ठनए समाचारकुशनगरी में 'ग्रहण' ने रोका मूर्ति विसर्जन

कुशनगरी में ‘ग्रहण’ ने रोका मूर्ति विसर्जन

• सूतक और चंद्रग्रहण से नहीं निकल सकी ३५० प्रतिमाओं की विसर्जन शोभायात्रा

विक्रम सिंह / सुलतानपुर

यूपी के अवध क्षेत्र में विख्यात कुशनगरी की दुर्गा पूजा में इस बार प्रतिमाओं की विसर्जन यात्रा पर ‘ग्रहण’ लग गया है। करीब छह दशकों पुरानी परंपरा के अनुसार, नवरात्र की अष्टमी तिथि को देवी दुर्गा के विविध स्वरूपों की सैकड़ों पूजा पंडालों में प्रतिमा स्थापना के उपरांत शरद पूर्णिमा को आदि गंगा गोमती में विसर्जन होता रहा है, लेकिन इस बार चंद्रग्रहण ने इस परंपरा में खलल डाल दिया है। शनिवार को शरद पूर्णिमा तो है, लेकिन अर्धरात्रि में आसन्न चंद्रग्रहण के चलते शाम ४ बजे से ही सूतक लग गया, जिससे करीब ४०० प्रतिमाओं की ३६ घंटे तक चलने वाली विशाल एवं भव्य विसर्जन शोभायात्रा थम गई है।
चौक ठठेरी बाजार में शाम ७ बजे इसका डीएम-एसपी की मौजूदगी में श्रीगणेश हो जाना था, लेकिन अभी तक पूजा पंडालों के सामने ही प्रतिमाएं ट्रैक्टर ट्रालियों में ग्रहण के चलते ढंक कर खड़ी हैं। केंद्रीय पूजा व्यवस्था संचालन समिति के पदाधिकारी दुविधाग्रस्त हैं। करीब साढ़े तीन किमी दायरे में पूरा शहर अस्त-व्यस्त हो उठा है। प्रतिमाएं ढंक कर जगह-जगह पंडालों से निकालकर ट्रालियों से सड़कों पर हैं। चंद्रग्रहण रात्रि पौने दो बजे समाप्त होगा। ऐसे में रविवार को ही विसर्जन यात्रा आगे बढ़ने की उम्मीद है। उधर पुलिस-प्रशासन भी मौजूदा स्थिति परिस्थिति को लेकर किकर्तव्यविमूढ़ नजर आ रहा है।
ग्रामीणांचल के देवी भक्तों ने दिखाई दूरदर्शिता
ग्रहण को लेकर शहर के निकटवर्ती गांवों के लोगों ने दूरदर्शिता दिखाई। दोपहर १२ बजे से सूतक शुरू होने के पहले ४ बजे तक बगैर शोर शराबे के दर्जनों प्रतिमाएं गोमती नदी के तट पर स्थित सीताकुंड में विसर्जित कर दीं। इससे चंद्र ग्रहण के कारण उत्पन्न व्यवधान से वे बच गए।

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