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आंगनवाड़ी सेविकाओं के आगे नतमस्तक हुई ईडी सरकार …पेंशन और ग्रेच्युटी देने को हुई तैयार

• मानधन वृद्धि पर नहीं बनी बात
• हड़ताल की कालावधि का नहीं कटेगा वेतन
• ५१ दिनों तक जारी रही हड़ताल
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
पिछले ५१ दिनों से महाराष्ट्र में चल रही अनिश्चितकालीन हड़ताल के विकरालरूप को देखते हुए आखिरकार आंगनवाडी सेविकाओं और सहायिकाओं के सामने ईडी सरकार को नतमस्तक होना पडा है। इसके तहत सरकार ने पेंशन और ग्रेच्युटी देने के मांग को मंजूर कर लिया है। हालांकि, मानधन वृद्धि को लेकर आंगनवाड़ी संगठन और सरकार के बीच बात नहीं बन सकी है। फिलहाल, हड़ताल की कालावधि का वेतन न काटे जाने का आश्वासन ईडी सरकार की तरफ से दिया गया है। घाती सरकार द्वारा इन मांगों को माने जाने के ५१ दिनों बाद इस अनिश्चितकालीन हड़ताल को वापस लिया गया है।
महाराष्ट्र राज्य आंगनवाड़ी कर्मचारी संघ के प्रदेश महासचिव बृजपाल सिंह ने कहा कि मुंबई में हुई कृति समिति की बैठक में मिनी आंगनवाड़ी को बड़ी आंगनवाड़ी में बदलने, सेविकाओं को तुरंत मोबाइल फोन देने और वेतन वृद्धि का प्रस्ताव जल्द ही मंत्रिमंडल में पेश करने की घोषणा के बाद हड़ताल वापस लेने का पैâसला किया। उन्होंने कहा कि सरकार आंगनवाड़ी कर्मचारियों के लिए पेंशन योजना का अंतिम प्रस्ताव तुरंत तैयार करने पर सहमत हो गई है और प्रस्ताव को जल्द से जल्द मंजूरी के लिए वैâबिनेट के पास भेजा जाएगा। साथ ही कृति समिति की ओर से पेंशन योजना को लेकर ठोस सुधार के लिए लिखित प्रस्ताव दिया गया।
ये मांगें हुईं मान्य
ग्रेच्युटी का भुगतान सुप्रीम कोर्ट के पैâसले के मुताबिक किया जाएगा। मोबाइल हैंडसेट तत्काल उपलब्ध करा दिया जाएगा। मिनी आंगनवाड़ियों को पूर्ण आंगनवाड़ियों में परिवर्तित किया जाएगा। पोस्टल ऑर्डर तुरंत जारी किए जाएंगे।
१.१० लाख से अधिक हैं आंगनवाड़ी केंद्र
महाराष्ट्र में इस समय ९६,००० आंगनवाड़ी केंद्र हैं, जिसमें से १३,००० मिनी आंगनवाड़ियों हैं। इनमें दो लाख से ज्यादा आंगनवाड़ी सेविकाएं और सहायिकाएं कार्यरत हैं, ये शून्य से छह वर्ष के ५८ लाख बच्चों और लगभग १० लाख स्तनपान कराने वाली माताओं के साथ ही गर्भवती महिलाओं को पोषण आहार प्रदान करती हैं। इसके साथ ही बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण और टीकाकरण कार्य की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर रहती है। इसके अलावा उन्हें तीन से छह साल के बच्चों को प्री-प्राइमरी शिक्षा प्रदान करने का काम भी करना पड़ता है।

हड़ताल से कुपोषित बच्चों को हुई परेशानी
पूरे महाराष्ट्र में आंगनवाड़ी सेवाकिओं और सहायिकाओं की हड़ताल के कारण इसका सीधे असर लाखों बच्चों के पोषण और उनकी स्वास्थ्य स्थितियों पड़ा। इसके बाद भी ईडी सरकार को कोई फर्क पड़ता हुआ नहीं दिखाई दे रहा था। हालांकि, जब आंगनवाड़ी सेविकाओं ने इसे और विकराल करने की चेतावनी दी, तब यह सरकार हरकत में आई और मांगें मानने के लिए बाध्य हुई।

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