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म्हाडा वासियों के आगे झुक गई ईडी सरकार!… बकाया वसूली की नोटिस पर लगाई रोक

• आक्रोश में थे म्हाडा के किराएदार
• लोगों के बेघर होने का था खतरा

सामना संवाददाता / मुंबई
दक्षिण मुंबई में म्हाडा के किराए के घरों में हजारों परिवार रह रहे हैं। म्हाडा ने बकाया किराया वसूली के लिए इन घरों में रहनेवाले २० हजार से अधिक परिवारोेंं को नोटिस जारी किया था। इन २० हजार परिवारों में कुल मिलाकर करीब एक लाख लोग रह रहे हैं। म्हाडा द्वारा किराए में दोगुनी वृद्धि कर दी गई थी, जिससे इन घरों में रहनेवाले गरीब तबके की मुसीबत बढ़ गई थी और उन्होंने किराया देना बंद कर दिया था। म्हाडा की इस नोटिस के बाद इनके बेघर होने का खतरा पैदा हो गया था। ऐसे में इन घरों में रहनेवाले निवासियों ने इस नोटिस का जमकर विरोध किया। निवासियों के विरोध के आगे ‘ईडी’ सरकार को झुकते हुए नोटिस पर रोक लगाना पड़ा है।

म्हाडा के मुंबई भवन और मरम्मत पुनर्निर्माण बोर्ड ने बकाया सेवा शुल्क के भुगतान के लिए दक्षिण मुंबई में पुनर्निर्मित भवनों के २० हजार से अधिक निवासियों को नोटिस जारी किया है। ७० हजार से ८० हजार रुपए के भुगतान के संदर्भ में इस नोटिस को देखकर रहिवासियों में हड़कंप मच गया था। लेकिन निवासियों की नाराजगी को देखकर ईडी सरकार को यूटर्न लेना पड़ा। नोटिस पर सरकार द्वारा रोक लगाए जाने के बाद अब इन रहिवासियों को राहत मिली है।
उपमुख्यमंत्री और गृहनिर्माण मंत्री देवेंद्र फडणवीस से उक्त नोटिस पर रोक लगाने की मांग की थी। लोगों की मांग और आंदोलन के कारण सरकार ने स्थगन दिया है।
बताया जाता है कि मरम्मत बोर्ड द्वारा पुनर्निर्मित भवन के निवासियों को प्रदान की जानेवाली सुविधाओं के लिए बोर्ड हर महीने सेवा शुल्क के रूप में एक निश्चित राशि एकत्र करता है। २०१८ तक यह राशि २५० रुपए थी। बोर्ड ने २०१८ से सेवा शुल्क में वृद्धि की है। बोर्ड ने इस सेवा शुल्क को बढ़ाकर ५०० रुपए कर दिया। बढ़ी हुई दर से काफी निवासियों ने सेवा शुल्क का भुगतान नहीं किया। इस पृष्ठभूमि पर हर साल बकाया राशि की वसूली के लिए मार्च महीने से पहले रहिवासियों को नोटिस जारी किया जाता है। इसी के तहत बोर्ड ने दक्षिण मुंबई में पुनर्निर्मित भवन के निवासियों को नोटिस जारी किया था। इस नोटिस के अनुसार, बड़ी संख्या में निवासियों को ७० हजार से ८० हजार रुपए का भुगतान करना होगा। नोटिस में यह भी कहा गया है कि अगर यह राशि नहीं दी गई तो मकान खाली करने होंगे। इससे रहिवासियों में चिंता व आक्रोश का माहौल पैदा हो गया था।

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