मुख्यपृष्ठनए समाचार‘ईडी’ सरकार ने बदला फैसला!  जिलाधिकारी का आदेश लिया वापस

‘ईडी’ सरकार ने बदला फैसला!  जिलाधिकारी का आदेश लिया वापस

  • आरे कारशेड कांजुरमार्ग ले जाने का मामला

सामना संवाददाता / मुंबई
आरे कॉलोनी में पेड़ों की जड़ों पर बन रहे मेट्रो कारशेड का मुंबईकरों समेत पूरे देश में हो रहे विरोध के बावजूद शिंदे-फडणवीस सरकार यहीं कारशेड बनाने पर अड़ी है। राज्य में सत्ता परिवर्तन होते ही ‘ईडी’ सरकार ने मेट्रो कारशेड को लेकर फैसला बदल दिया है। आरे कारशेड कांजुरमार्ग स्थानांतरित किए जानेवाले जिलाधिकारी के १ अक्टूबर, २०२० के फैसले को आखिरकार वापस ले लिया है। इस आशय का हलफनामा कल मुंबई उच्च न्यायालय में पेश किया गया। इस फैसले के चलते मेट्रो कारशेड की जगह को लेकर राज्य और केंद्र सरकार के बीच तनातनी समाप्त हो गई। फिर भी निजी डेवलपर्स और दूसरे लोगों द्वारा भूखंड पर किए गए मालिकाना अधिकार को लेकर शुरू विवाद पर न्यायालय में सुनवाई लंबित है।
मुंबईकरों की सुविधा के लिए एमएमआरडीए के माध्यम से मेट्रो परियोजना का निर्माण किया जा रहा है। साथ ही पर्यावरण को होनेवाले नुकसान से बचाने के लिए महाविकास आघाड़ी सरकार ने आरे के बजाय कांजुरमार्ग में मेट्रो कारशेड बनाने का फैसला किया था। हालांकि केंद्र कांजुरमार्ग के इस भूखंड के उपयोग का विरोध कर रहा है। केंद्र का दावा है कि यह खार भूमि है। मुंबई हाईकोर्ट में महाविकास आघाड़ी सरकार के इस फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार की तरफ से याचिका दायर की गई थी। इस याचिका पर कल मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति मकरंद कार्णिक की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता आशुतोष कुंभकोणी ने तर्क देते हुए पीठ को बताया कि जिलाधिकारी ने १ अक्टूबर, २०२० को कांजुरमार्ग की १०२ एकड़ जमीन एमएमआरडीए को हस्तांतरित करने के संबंध में एक आदेश पारित किया था। इस आदेश को २९ अगस्त को हुई वार रूम की बैठक में जिलाधिकारी निधि चौधरी द्वारा वापस ले लिया गया। खंडपीठ ने इस पर संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकार के खिलाफ दायर याचिका का निपटारा किया लेकिन निजी डेवलपर्स और अन्य द्वारा भूखंड पर अपने स्वामित्व अधिकारों का दावा करनेवाली याचिका पर कोई फैसला पारित करने से कोर्ट ने इनकार कर दिया और उन्हें दूसरी बेंच के समक्ष अपील करने का आदेश दिया।

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