मुख्यपृष्ठनए समाचारईडी सरकार ने डाले मुसलमानों पर डोरे! ...५ प्रतिशत आरक्षण के जुमले

ईडी सरकार ने डाले मुसलमानों पर डोरे! …५ प्रतिशत आरक्षण के जुमले

दादा करेंगे मुख्यमंत्री से तुरंत बात
समीक्षा बैठक में अजीत पवार ने दिया आश्वासन

सामना संवाददाता / मुंबई
लोकसभा और विधान सभा चुनावों की पृष्ठभूमि पर राज्य की ईडी सरकार ने अल्पसंख्यकों को पटाने के लिए तरह-तरह का लॉलीपॉप देना शुरू कर दिया है। इसी के तहत महाराष्ट्र राज्य में अल्पसंख्यक समुदाय की विभिन्न समस्याओं को लेकर उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की अध्यक्षता में गुरुवार को एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने मुसलमानों को तरह-तरह के जुमले दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा घोषित पांच प्रतिशत शिक्षा आरक्षण को तुरंत लागू करने के लिए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ चर्चा के बाद निर्णय लिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने वित्त विभाग के सचिव को महाज्योति, सारथी, बार्टी जैसे शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से लागू योजनाओं की तरह मौलाना आजाद आर्थिक विकास निगम के लिए अन्य सामुदायिक निगमों को दी जानेवाली धनराशि प्रदान करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही पवार ने यह भी निर्देश दिया कि निगम को यह जांचना चाहिए कि क्या मौलाना आजाद निगम द्वारा कार्यान्वित ऋण योजनाओं को केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में घोषित विश्वकर्मा योजना से जोड़ा जा सकता है। इस बैठक में मौलाना आजाद फाइनेंशियल कॉरपोरेशन की शेयर पूंजी में बढ़ोतरी और सरकार की गारंटी पर चर्चा हुई। इसके अलावा निगम की शेयर पूंजी को बढ़ाकर १,००० करोड़ रुपए करने का निर्णय लिया गया है और केंद्र सरकार को दी जानेवाली ३० करोड़ रुपए की गारंटी को बढ़ाकर अब ५० करोड़ रुपए किया जाएगा। मौलाना आजाद आर्थिक विकास निगम से ऋण के लिए कुछ कड़ी शर्तें हैं। यह भी निर्णय लिया गया कि इस पर पुनर्विचार किया जाए और नए सिरे से नियम व शर्तें तय की जाएंगी। छत्रपति संभाजीनगर में हज हाउस को तुरंत शुरू करने का निर्णय लिया गया है और जल्द ही इसका उद्घाटन किया जाएगा। इस अवसर पर महाराष्ट्र राज्य वक्फ बोर्ड के मुख्यालय को संभाजीनगर स्थित हज हाउस में स्थानांतरित करने के मामले पर भी चर्चा की गई। उर्दू शिक्षक भर्ती के लिए बिंदु सूची के अनुसार, आरक्षित सीटों पर अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होने पर ओपन कैटेगरी से रिक्त पदों को भरने के लिए संयुक्त रूप से चर्चा की गई। इस प्रकार अन्य विषयों पर केवल चर्चा हुई है, परंतु उस पर अमल कब होगा, यह कहना मुश्किल है।

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