मुख्यपृष्ठसमाचारईडी सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था हुई फेल

ईडी सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था हुई फेल

-महाराष्ट्र की चिंता बढ़ा रहा सिकल सेल

-अब बीमारी से निपटने के लिए उपलब्ध कराया जाएगा जेनेटिक कार्ड

सामना संवाददाता / मुंबई

महाराष्ट्र में सिकल सेल एनीमिया के मामले ईडी सरकार के स्वास्थ्य तंत्र की चिंताएं बढ़ाते जा रहे हैं। राज्य में अब तक इस बीमारी के पंद्रह हजार मामले सामने आ चुके हैं। दूसरी तरफ इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक की गई तकरीबन तमाम कोशिशें फेल साबित हुई हैं। बहरहाल अब शिंदे सरकार पर इस तरह की नौबत आ गई है कि इस बीमारी को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार की मदद लेनी पड़ रही है। केंद्र सरकार के निर्देशों के तहत प्रदेश में इस बीमारी से निपटने के लिए मरीजों का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। इसके लिए बाकायदा जेनेटिक कार्ड उपलब्ध कराने का फैसला लिया गया है।
केंद्र से मदद की गुहार
सिकल सेल एनीमिया एक तरह का रक्त विकार है। वर्तमान में इस बीमारी की रोकथाम के लिए शिंदे सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सा उपचार के दायरे में विस्तार करके रोगियों को सुविधाएं देने की कोशिश की है। हालांकि, इसे लेकर संबंधित अधिकारियों और चिकित्सकों की ओर से बरती जा रही लापरवाही से मरीजों को सही और सटीक इलाज नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में इसके शिकार मरीजों की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। बीमारी की इस स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार को केंद्र की शरण में जाना पड़ा है। इसके साथ ही राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन अभियान महाराष्ट्र समेत १७ उच्च प्रसार वाले राज्यों में लागू किया जा रहा है। इसके तहत मरीजों का जेनेटिक कार्ड तैयार किया जाएगा।
हमसफर करेगा मार्गदर्शन
जेनेटिक कार्ड में इस बीमारी के वाहकों, संदिग्धों और सामान्य मरीजों का रिकॉर्ड होगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सलाहकार सिकल सेल रोग से पीड़ित व्यक्ति की चिकित्सीय स्थिति के अनुसार अगली पीढ़ी में बीमारीफैलने की संभावना को ध्यान में रखते हुए हमसफर के चयन का मार्गदर्शन करेगा।
मिनटों में पता लगाएगा स्वदेशी रैपिड टेस्ट
आंकड़ों के अनुसार राज्य में २७.२५ लाख लोगों का सिकल सेल रोग परीक्षण किया गया है, जो निर्धारित किए गए २४.६ लाख लोगों के लक्ष्य से अधिक है। इस परीक्षण में गढ़चिरौली में सिकल सेल रोगियों की संख्या सबसे अधिक ४,१९३ है। इसके बाद नागपुर में २,६३४, गोंदिया में १,४५१, अमरावती में १,८७१, यवतमाल में ९५०, ठाणे में ८७० और नंदुरबार में ८९८ है। फिलहाल पुणे स्थित मायलैब का स्वदेशी रैपिड टेस्ट सिकल सेल बीमारी का मिनटों में पता लगाएगा।
२०४७ से पहले बीमारी को खत्म करने का लक्ष्य
इस पहल के तहत साल २०४७ से पहले बीमारी को खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है। यह अभियान शून्य से ४० वर्ष की आयु सीमा में सात करोड़ आबादी की जांच, विवाह पूर्व और गर्भधारण पूर्व आनुवंशिक परामर्श पर केंद्रित है। स्वास्थ्य अधिकारी के मुताबिक कार्ड रखनेवाले ऐसे मरीजों को न्यूमोकोकल के टीके लगाए जाएंगे। एक अधिकारी ने बताया कि सिकल सेल पीड़ितों में से ४० फीसदी से अधिक में सिकल हीमोग्लोबिन होता है। इसलिए उनमें जीवाणु संक्रमण, जोड़ों का दर्द, पुराना दर्द और अंग विफलता का खतरा बढ़ जाता है।

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