मुख्यपृष्ठनए समाचार`ईडी' सरकार के वादे अधूरे; शिक्षकों की समस्याएं नहीं हुईं खत्म!

`ईडी’ सरकार के वादे अधूरे; शिक्षकों की समस्याएं नहीं हुईं खत्म!

  • जूनियर कॉलेज के शिक्षकों के विश्वास पर सरकार ने फेरा पानी
  • उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के बहिष्कार को लिया था वापस

सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में ईडी सरकार के राज में शिक्षक परेशान हो रहे हैं। इस सरकार ने जूनियर कॉलेज के शिक्षकों के विश्वास पर पानी फेरा है। विभिन्न लंबित मांगों को लेकर शिक्षकों ने उत्तर पुस्तिकाओं की परीक्षा का बहिष्कार किया था। २१ फरवरी से दो मार्च के बीच शिक्षकों ने किसी भी उत्तर पुस्तिका की जांच नहीं की। लेकिन स्कूली शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर द्वारा मांगों को मान्य किए जाने पर शिक्षकों ने दस दिन के बाद बहिष्कार आंदोलन वापस ले लिया था। आंदोलन वापस लेने के बाद १५ दिन के भीतर मांगों को लेकर आदेश जारी किया जाना था। लेकिन डेढ़ माह बीत जाने के बाद भी शिक्षकों की मांगों पर अब तक कोई फैसला नहीं हो सका है। इससे शिक्षकों में राज्य सरकार के खिलाफ रोष की लहर है।
राज्य सरकार ने शिक्षकों के बढ़े हुए पदों, आईटी शिक्षकों के वेतनमान और शिक्षकों की १०-२०-३० समयबद्ध पदोन्नति वेतनमान को मान्य करते हुए और मानी गई मांगों को १५ दिन के अंदर भीतर आदेश जारी करने का आश्वासन दिया था। इसके अनुसार महासंघ ने बहिष्कार आंदोलन वापस ले लिया था। इसके बाद शिक्षकों ने उत्तर पुस्तिका जांचने का काम शुरू कर दिया था, वहीं अब १२वीं की उत्तर पुस्तिका जांचने का काम लगभग पूरा हो चुका है। ऐसे में राज्य सरकार ने शिक्षकों की मांगों को मानने का कोई आदेश जारी नहीं किया है।
इस संबंध में हाल ही में महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री केसरकर से मुलाकात की थी। इस मौके पर केसरकर ने कहा कि शिक्षकों की समयबद्ध पदोन्नति के १०-२०-३० वर्ष बाद का वेतनमान संबंधी प्रस्ताव वित्त विभाग को भेज दिया गया है। साथ ही कहा कि आईटी विषय के मामले में शिक्षा विभाग से शिक्षकों की जानकारी मांगी जा रही है। इसके बावजूद बढ़े पदों को लेकर शिक्षा विभाग में कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। इस तरह का आरोप महासंघ के समन्वयक प्रो. मुकुंद अंधलकर ने किया है।
आंदोलन की तैयारी में शिक्षक
प्रदेश सरकार की ओर से १५ दिन के अंदर बढ़े हुए पदों को स्वीकृत करने और आईटी विषय के शिक्षकों को वेतनमान देने का आदेश जारी होने वाला था। लेकिन सरकार का कामकाज बहुत धीमी गति से चल रहा है। ऐसे में राज्य के शिक्षक बहुत नाराज हो गए हैं। इस संबंध में महासंघ शीघ्र ही बैठक कर अगली नीति की योजना बनाएगा और यदि उनकी मांगों को मंजूर नहीं किया गया तो शिक्षक फिर से आंदोलन की तैयारी करेंगे।

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