मुख्यपृष्ठनए समाचार‘ईडी’ सरकार में किसानों का अपमान!

‘ईडी’ सरकार में किसानों का अपमान!

-समस्याओं को नजरअंदाज कर रही ‘घाती’ सरकार… प्रदेश में पानी महंगा, दूध सस्ता

सामना संवाददाता / मुंबई

महाराष्ट्र में सत्ता दल और उनके समर्थक ढोल पीटकर कह रहे हैं कि प्रदेश में आम आदमी की सरकार है। लेकिन यदि गहराई से नजर दौड़ाएं तो घाती सरकार के मंत्री स्वार्थ साधने और दूसरे प्रदेशों में चुनाव प्रचार में लगे रहे। उन्हें प्रदेश के किसानों की समस्याओं और मुद्दों से कोई लेना-देना नहीं है। इस तरह यह सरकार एक तरह से किसानों का अपमान ही कर रही है, तभी प्रदेश में पानी महंगा और दूध सस्ता बिक रहा है। इसका खुलासा दुग्ध उत्पादक किसानों द्वारा दर वृद्धि को लेकर किए जा रहे आंदोलन से साफ हो रहा है।
चौंकानेवाले तथ्य में यह जानकारी सामने आई है कि महाराष्ट्र में किसानों से खरीदा गया दूध पांच सितारा होटलों में खरीदे जानेवाले बोतलबंद पानी से भी सस्ता है। फिलहाल पांच सितारा होटल में पानी की कीमत कम से कम ३० रुपए प्रति लीटर है, जबकि किसानों से खरीदे जानेवाले दूध की कीमत २५ रुपए प्रति लीटर से भी कम हो गई है। दूसरी तरफ विभिन्न किसान संगठन और दूध उत्पादक पिछले दो दशकों से मांग कर रहे हैं कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा उत्पादित वस्तुओं की तर्ज पर दूध की कीमत भी उत्पादन लागत के आधार पर की जानी चाहिए, लेकिन देखा जा रहा है कि सरकार जानबूझकर इस मांग पर ध्यान नहीं दे रही है। इसके चलते किसान पिछले तीन सप्ताह से दूध उत्पादक किसानों को न्यूनतम पांच रुपए प्रति लीटर की सब्सिडी देने की मांग कर रहे हैं। इस मांग को लेकर किसानों ने प्रदेश भर में तीव्र आंदोलन शुरू कर रखा है।
दूध के दाम घोषित करने की नौटंकी
राज्य सरकार ने सिर्फ दूध के दाम घोषित करने की नौटंकी की है, लेकिन हकीकत में सरकार इस फैसले को लागू करने के लिए कोई मदद देने को तैयार नहीं है। राज्य की अर्थव्यवस्था काफी हद तक दुग्ध उद्योग पर निर्भर है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसान दूध का व्यवसाय सह व्यवसाय के रूप में करते हैं। कई बेरोजगार युवा इसके माध्यम से अपना भविष्य बनाते हैं। ऐसे समय में इस कारोबार की सुध लेना सरकार की जिम्मेदारी है।
बालासाहेब थोराट
पूर्व कृषि मंत्री, महाराष्ट्र राज्य

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