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ईडी सरकार का रहमोकरम : कार्यरत हैं अस्थाई चिकित्सा शिक्षा निदेशक

पूर्णकालिक नियुक्ति करना भूली सरकार
रामभरोसे चल रहा चिकित्सा शिक्षा विभाग
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
महाराष्ट्र के हर जिले में एक सरकारी मेडिकल कॉलेज शुरू करने की अपनी महत्वाकांक्षा को पूरा करने की कोशिश कर रही ईडी सरकार चिकित्सा शिक्षा निदेशालय को एक पूर्णकालिक निदेशक देने में असमर्थ रही है। आज भी विभाग की जिम्मेदारी अस्थाई चिकित्सा शिक्षा निदेशक के कंधों पर है। यह कहना अनुचित नहीं होगा कि मौजूदा सरकार चिकित्सा शिक्षा विभाग पूर्णकालिक निदेशक की नियुक्ति करना ही भूल गई है। ऐसे में ‘ईडी’ सरकार के रहमोकरम पर विभाग का कामकाज राम भरोसे चल रहा है।
उल्लेखनीय है कि तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. प्रवीण शिंगरे जनवरी २०१९ में सेवानिवृत्त हो गए थे। उनके सेवानिवृत्ति के बाद डॉ. प्रकाश वाकोडे को अस्थाई निदेशक नियुक्त किया गया था। उसी बीच साल २०२० में कोरोना महामारी पैâलने लगी थी। ऐसे में तत्कालीन महाविकास आघाड़ी सरकार का पूरा ध्यान महामारी को कंट्रोल में लाने पर था। ऐसे में डॉ. वाकोडे के बाद तत्कालीन सह निदेशक डॉ. तात्या राव लहाने को चिकित्सा शिक्षा के अस्थाई निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया। वे साल २०२१ तक निदेशक पद पर रहे। डॉ. लहाने की सेवानिवृत्ति के बाद नांदेड़ सरकारी मेडिकल कॉलेज के डीन और नासिक स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. दिलीप म्हैसेकर को अस्थायी तौर पर नियुक्त किया गया था। हालांकि, वे ज्यादा समय तक इस पद पर नहीं रह पाए। उनके हटाए जाने के बाद जुलाई महीने में चिकित्सा शिक्षामंत्री हसन मुश्रीफ ने अजय चंदनवाले को अस्थाई निदेशक नियुक्त करने का आदेश दिया। हालांकि, आज तक इस पद पर कोई पूर्णकालिक निदेशक की नियुक्ति नहीं की गई है। सूत्रों का कहना है कि यह नियुक्ति सेवा नियमावली का मुद्दा उठाकर नहीं की गई है।
अनदेखी का शिकार निदेशालय
ज्ञात हो कि साल १९७१ में स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग को अलग कर दिया गया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग में निदेशक, संयुक्त निदेशक, अपर निदेशक, उप निदेशक और सहायक निदेशक के ३५० पद सृजित किए गए। लेकिन राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के मामलों को नियंत्रित करनेवाले चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने एक अस्थाई निदेशक और एक अस्थाई संयुक्त निदेशक के अलावा एक भी पद सृजित नहीं किया है।
प्रदेश में हैं २५ मेडिकल कॉलेज
साल १९७१ में राज्य में केवल पांच सरकारी मेडिकल कॉलेज थे, जो साल २००८ में बढ़कर १४ और साल २०२३ में २५ सरकारी मेडिकल कॉलेज हो गए है। हालांकि, चिकित्सा शिक्षा निदेशालय में कर्मचारियों और अधिकारियों की संख्या में कोई वृद्धि नहीं हुई। शुरुआत में निदेशालय में २०५ पद मंजूर थे, जिनमें से १०३ पद भरे गए, जबकि मौजूदा समय में २५ सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं और चिकित्सा शिक्षा निदेशालय में २०३ पद मंजूर हैं, लेकिन इनमें से अभी भी ७३ पद रिक्त हैं।

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