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संपादकीय: शिवसेनाप्रमुख विनम्र अभिवादन!!

शिवसेनाप्रमुख यानी एकमेव हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे का आज जन्मदिन मनाया जा रहा है। शिवसेनाप्रमुख आज ९७ वर्ष के हो जाते। उन्होंने ५५ साल महाराष्ट्र और हिंदुत्व के लिए अर्पित किए। बेशक ऐसे विभूति का काम उम्र से नहीं मापा जाता और शिवसेनाप्रमुख कभी उम्र से बूढ़े नहीं हुए। इसीलिए उनके बाद भी उनके द्वारा खड़ा किया गया, बढ़ाया गया, जतन किया गया ‘शिवसेना’ नामक अग्निकुंड आज भी धधकता हुआ दिखाई दे रहा है। आत्मविश्वास की ताकत अगर आप में है तो दुनिया में कोई भी आपको पराजित नहीं कर सकता, शिवसेनाप्रमुख का यह मंत्र हर शिवसैनिक के मन में एक मशाल की तरह जल रहा है। इस मशाल को पिछले पचपन वर्षों में कोई नहीं बुझा सका है। इस समय महाराष्ट्र में एक अलग ही राजनीति शुरू हो गई है। इसमें शिवसेनाप्रमुख की चोरी करने का मुद्दा अहम है। लेकिन इस चोरी में देश के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री आदि योगदान दें तो आश्चर्य की बात है। महाराष्ट्र ढोंग स्वीकार नहीं करता। शिवसेनाप्रमुख तो हमेशा पाखंडियों की पीठ पर लात मारते रहे। उन्होंने सरेआम पाखंडियों के मुखौटे फाड़े। लेकिन पिछले पांच महीनों में ढोंगबाजी ने महाराष्ट्र में कहर बरपा रखा है। शिवसेना का मुखौटा पहनकर कुछ ‘मंबाजी’ सत्ता में घुसे और जैसे किसी मंदिर से भगवान चुराए जाते हैं, उसी तरह उन्होंने शिवसेनाप्रमुख को चुराने का प्रयास किया। इस चोरी में कोई रुकावट न आए इसलिए देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री चोरों को ताकत और कवच देने का काम करते नजर आ रहे हैं। बेशक, अगर कोई मंदिर से मूर्ति चुरा भी ले तो उस चुराई गई मूर्ति से मंदिर नहीं बन सकता, वह श्रद्धास्थल नहीं बन सकता। चोर मंदिर में घुसते हैं और बेचने के लिए मूर्ति को चुराते हैं। महाराष्ट्र में भी ठीक ऐसा ही हुआ है, लेकिन उन्हीं चोरों के सरदार सरकारी कवच-कुंडल में घूमते हैं तो अधोपतन की शुरुआत तेज हो जाती है। देश के सभी प्रमुख स्तंभ और एजेंसियां डगमगा कर गिर गई हैं। एक प्रकार की मनमानी चल रही है। बालासाहेब ने पहले ही आगाह कर दिया था कि देश में अराजकता आएगी। बालासाहेब की भविष्यवाणी दुर्भाग्य से मोदी-शाह के शासन में सच हो रही है। मोदी चार दिन पहले प्रधानमंत्री के रूप में सभी लाव-लश्कर के साथ मुंबई आए। कहा जाता है कि उन्होंने कई परियोजनाओं का भूमिपूजन और लोकार्पण किया। उन्होंने मुंबई के विकास के लिए कुछ घोषणाएं कीं। जिस मोदी सरकार ने दो महीने पहले महाराष्ट्र से सवा दो लाख करोड़ रुपए का उद्योग पड़ोसी राज्य गुजरात में भगा दिया। वे मुंबई में आकर विकास की बातें करें तो यह ढोंग नहीं है तो क्या है? मोदी के कार्यक्रम में मंच पर सिर्फ भाजपा का ही बोलबाला था। खुद को शिवसेना का मुख्यमंत्री कहलवानेवाले को मोदी के सामने ही भाजपा के उपमुख्यमंत्री ने कैसे असली जगह दिखाई इसका वीडियो फुटेज सामने आया। भाजपा ने एक भूसे से भरी हुई लोमड़ी को कुर्सी पर बिठाया है और उस लोमड़ी की कौड़ी भर भी कीमत नहीं है। शिवसैनिक होने का दावा करने वाले ने मंच पर अपमान सहा है, ऐसे लोगों को बालासाहेब का कटआउट आदि लगाकर ढोंगबाजी का प्रदर्शन करने की जरूरत नहीं है। उनका मुखौटा खुल चुका है। मजबूरी और गुलामी की हदें पार करते हुए उन्होंने भाजपा के मंच से ही एलान कर दिया, ‘हां, हां, हम मोदी के लोग हैं?’ यह सब स्पष्ट होने के बाद लोगों को समझ में आ गया होगा कि भाजपा और उसके समर्थकों ने शिवसेना को खत्म करने के लिए कितनी बड़ी साजिश रची थी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने कबूल किया, ‘मोदी से हमारे रिश्ते हैं!’ फिर बालासाहेब का नाम क्यों लेते हैं और शिवसेनाप्रमुख के तैलचित्र का विधानसभा में अनावरण करने का जो ढोंग रचा गया है, वह किसलिए? एक तो तैलचित्र में निष्ठा के तेज का अंश नहीं है और जिस महाराष्ट्र की विधानसभा में शिवसेना के मामले में बेईमानी की, उसी विधानसभा में तैलचित्र लगाकर महाराष्ट्र के सामने कौन-सी तस्वीर उकेर रहे हैं? शिवसेनाप्रमुख एक पुण्य अमर आत्मा हैं। लोगों के दिलों पर उनकी छवि अंकित है और वही तस्वीर वास्तविक है। स्वाभिमान और निष्ठा के रंग से यह तस्वीर अमर हो गई है। विधानसभा में बालासाहेब का तैलचित्र लगाना एक ढोंग है। उस तैलचित्र में निष्ठा की आत्मा और तेज का अभाव है, चालीस बेईमानों के ढोंग के अलावा उस समारोह में और दूसरा कुछ भी दिखाई नहीं देता है। मोदी के लोग होने के रूप में जिनका सीना आज गर्व से फूला हुआ है, उस गुब्बारे को पिन चुभाकर हवा निकालने का काम महाराष्ट्र की जनता जरूर करेगी। शिवसेनाप्रमुख के आज के जन्मदिन पर सभी को एक संकल्प लेना चाहिए कि शिवसेनाप्रमुख के नाम पर शुरू किए गए ढोंग के बाजार को हमेशा के लिए दफन और खत्म कर देना है। शिवसेना के नाम पर उतलाए- बौराए ‘मंबाजी’, उस ‘मंबाजी’ मंडल के ‘खोके’ की राजनीति, उस राजनीति से हो रही महाराष्ट्र की बदनामी और उस बदनामी से हताश हो चुके मराठी मन को हौसला देने का काम शिवसेना को करना होगा। ‘मंबाजी’ का मुख्यमंत्री पद कुछ क्षणों का है और कल का भविष्य शिवसेना का है, इन विचारों का संकल्प आज के दिन करना जरूरी है। ‘मंबाजी’ ने बालासाहेब की शिवसेना पर दावा ठोका, लेकिन उनका बाप व सरपरस्त दूसरा कोई होने का दावा उन्होंने विदेश में किया। फिर मोदी के सामने घुटने टेकते हुए कहा, ‘हम शिवसैनिक थे, ये ढोंग था। ‘हम बाघों के झुंड में घुसे भेड़ और लोमड़ी थे। हम बाघ की खाल पहनकर वहां थे, लेकिन ईडी आदि लोगों ने हमारी खाल खींच ली। इसलिए साहब हम आपके हैं!’ ऐसा कबूलनामा देने पर शिवसेना का बाप कौन? यह प्रश्न ही हल हो गया। बालासाहेब के जन्मदिन पर गंगा के जल प्रवाह में आनेवाली रुकावटें अपने आप दूर हो गईं और काशी के हरिश्चंद्र घाट पर पहुंच गईं। उस घाट पर हरामखोरों की राजनीतिक चिता जलेगी, यही बालासाहेब को उनके जन्मदिन पर विनम्र आदरांजलि!

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