मुख्यपृष्ठसंपादकीयसंपादकीय: संघर्ष की गुढी!

संपादकीय: संघर्ष की गुढी!

लगातार दो वर्ष गुढी पाडवा का त्योहार कोरोना के साये में जाने के बाद इस बार हिंदू और मराठी नववर्ष की शुरुआत बेहतर ढंग से हुई है। गुढी पाडवा से राज्यभर में कोरोना का लगाया गया प्रतिबंध हटाने की घोषणा मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने गुरुवार को की। कोरोना का संक्रमण और इस जानलेवा वायरस की दहशत कम होने के बाद राज्य की महाविकास आघाड़ी सरकार द्वारा कोरोना के सभी प्रतिबंध हटाए जाने से महाराष्ट्र और तमाम मराठी जनता ने तकरीबन दो वर्ष बाद राहत की खुली सांस ली है। गुढी पाडवा विजय और नवनिर्माण का प्रतीक माना जाता है। दुनियाभर में हाहाकार मचानेवाली कोरोना जैसी महामारी का महाराष्ट्र की जनता ने सामर्थ्य के साथ मुकाबला किया और इस भयंकर विपत्ति पर जीत हासिल की इसलिए इस बार गुढी पाडवा को विशेष महत्व है। अतीत में जो हुआ वह बीत गया। कोरोना जैसे संकट ने दो वर्ष में पूरी दुनिया को तहस-नहस कर दिया। कई लोगों ने अपनों को खो दिया। अनगिनत परिवारों के मुखिया को कोरोना ने छीन लिया। बड़े पैमाने पर जनहानि हुई और आर्थिक नुकसान का तो अंदाजा ही नहीं लगाया जा सकता। लेकिन आखिर में मनुष्य जीता और कोरोना हार गया। कोरोना की आपदा मानव निर्मित थी या प्राकृतिक, इसका पता जब चलेगा तब चलेगा लेकिन फिलहाल मानव जाति ने इस संकट को मात दे दी यह वास्तविकता है। इसलिए इस बार का गुढी पाडवा हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। प्रतिबंध हटने से नए वर्ष के स्वागत के लिए जुलूस जोश के साथ निकलेंगे। जो हुआ उसे भूलकर मराठी माणुस ढोल-ताशों की थाप, पारंपरिक पोशाकों में इस जुलूस में शामिल होगा। घर-घर आनंद की गुढी खड़ी की जाएगी। कई शुभारंभों के साथ नई खरीदी के कारण शहर से लेकर गांव तक हर जगह आज आनंद ही आनंद दिखाई देगा। रावण का विनाश करके प्रभु रामचंद्र ने अयोध्या में कदम रखा, यह वही दिन है। चौदह वर्ष का वनवास पूरा करके, रावण पर जीत हासिल करके वापस लौटे अपने लाडले राजा का अयोध्यावासियों ने घर-घर गुढी और तोरण लगाकर स्वागत किया था। वह विजय पताका यानी गुढी पाडवा का त्योहार। आज महाराष्ट्र और देश की जनता भी कोरोना का विनाश करके भयमुक्त और संकटमुक्त हुई है। उसमें आपदा प्रबंधन और संक्रमण रोग प्रतिबंधक कानून के तहत कोरोना काल में जो प्रतिबंध लगाए गए थे उसे हटाकर राज्य की आघाड़ी सरकार ने महाराष्ट्र की जनता को पाडवा का तोहफा दिया है। पुराने को भूलकर नए कार्य का शुभारंभ करनेवाला दिन के तौर पर हम गुढी पाडवा की ओर देखते हैं। इस दिन से वसंत ऋतु का आगमन होता है। प्रकृति चक्र के अनुसार जब पतझड़ में पत्ते गिर जाते हैं तो पेड़ों पर नए पत्ते उगने लगते हैं। जीव सृष्टि में होनेवाला यह महत्वपूर्ण बदलाव गुढी पाडवा के महत्व को रेखांकित करने के लिए पर्याप्त है। एक तरह से गुढी पाडवा सृष्टि का जन्मदिन है क्योंकि ब्रह्मांड की रचना करने के लिए ब्रह्मदेव ने जो दिन चुना था वह चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानी गुढी पाडवा। हिंदू धर्म में किसी भी मंगल कार्य को शुरू करने के लिए जो साढ़े तीन मुहूर्त बताए गए हैं, उसमें से पहला दिन यानी गुढी पाडवा। उसके बाद विजयादशमी, अक्षय तृतीया और बलिप्रतिपदा मुहूर्त आते हैं। गुढी पाडवा अर्थात विजय और नए संकल्प तथा नवनिर्माण का दिन। इसीलिए नए उद्योग, व्यापार, परियोजना निर्माण इतना ही नहीं, घर खरीदने, वाहन, छोटी-बड़ी वस्तुओं की खरीदी के लिए अधिकांश लोग गुढी पाडवा का इंतजार करते हैं। बाजारों में आज खरीदी और घर-घर नए आगमन की भागदौड़ दिखेगी। महाराष्ट्र और देश की जनता ने कोरोना वायरस पर विजय प्राप्त करके जीवन की नई राह का श्रीगणेश शुरू किया है। यह सत्य है फिर भी महंगाई के सरकार निर्मित वायरस का मुकाबला वैâसे करें इसका कोई उत्तर जनता को मिलता नहीं दिखाई दे रहा। चुनाव तक सस्ताई की गुढी लगाकर चुनाव समाप्त होने के बाद महंगाई का डंडा उठानेवाली केंद्र सरकार से नए वर्ष में जनता को दो-दो हाथ करना होगा, ऐसा दिखाई दे रहा है। कोरोना का राक्षस गाड़कर जनता ने एक युद्ध जीता है। अब जनता को नवनिर्माण के साथ-साथ महंगाई को गाड़ने के लिए संघर्ष की गुढी लगानी ही होगी।

अन्य समाचार