मुख्यपृष्ठसंपादकीयसंपादकीय:  मर्दानी भाषा भवन!

संपादकीय:  मर्दानी भाषा भवन!

महाराष्ट्र की राजधानी, हमारे मुंबई शहर में मराठी भाषा भवन का निर्माण हो रहा है। गुढी पाडवा के दिन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की उपस्थिति में मराठी भाषा भवन का भूमिपूजन समारोह संपन्न हुआ। केंद्र सरकार मराठी के प्रति द्वेषपूर्ण बर्ताव करती है। मराठी को अभिजात भाषा का दर्जा मिले इसके लिए प्रयास चल रहा है, परंतु मराठी के नसीब में हमेशा नकारघंटा ही आ रहा है। अब मरीन ड्राइव के समुद्र तट पर भव्य मराठी भाषा भवन का निर्माण हो रहा है। ठाकरे सरकार ने यह बेहतरीन काम किया। केंद्र को मराठी भाषा से संबंधित ऐतिहासिक, प्राचीन और ताजा प्रमाण चाहिए होंगे तो इस भवन का वे अध्ययन कर सकते हैं। मरीन लाइंस बेहद अमीर लोगों की जागीर है। यहां मराठी व्यक्ति अभावग्रस्त ही मिलता है। मराठी मेहनतकशों की, लढ़वैयों की भाषा है। मराठी मतलब छत्रपति शिवराय से क्रांतिवीरों की भाषा है। मुंबई महाराष्ट्र को मिले और मराठी भाषिकों के एक अखंड राज्य का निर्माण हो इसके लिए जिन १०५ लोगों ने शहादत दी उन शहीदों की भाषा मराठी है। संत ज्ञानोबा, तुकाराम की भाषा मराठी है। गांधीजी द्वारा मुंबई में ‘चले जाओ’ का नारा देते ही हजारों मिल मजदूर सड़क पर उतर आए, उन लढ़वैयों की भाषा मराठी है। देश की रक्षा के लिए सीमा पर प्राण त्याग करनेवालों की भाषा मराठी है। कई हमलों का सामना करके भी जो भाषा डटी रही उस मराठी भाषा का भवन मुंबई में बने व उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री पद पर विराजमान रहने के दौरान मराठी की यह पताका लहराए यह महत्वपूर्ण है। प्रबोधनकार ठाकरे, शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे और अब उद्धव ठाकरे, ऐसी तीन पीढ़ियां ‘मराठी’ के लिए संघर्ष कर रही हैं इसका उल्लेख उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने किया। मुंबई में आकर व्यापार, धंधा करना, जो उपलब्ध हो उस मार्ग से पैसा कमाना और ‘मराठी में व्यवहार करो, दुकानों पर मराठी बोर्ड लगाओ’ ऐसा कहें तो कुछ महाभाग मराठी के खिलाफ कोर्ट में जाएंगे। ऐसे अति सयानों की मस्ती उतारने के लिए ही मराठी भाषा भवन में स्वतंत्र कक्ष की स्थापना होनी चाहिए। मराठी भाषा महाराष्ट्र की स्कूली पाठ्यक्रम में अनिवार्य न हो इसके लिए भाजपा के किरीट सोमैया जैसे लोग कोर्ट में गए। ऐसे लोग मराठी और मराठी भाषा के खिलाफ सीधी चुनौती पेश कर रहे हैं। यह लोग मराठी भाषा भवन के निर्माण में बाधा डालने के लिए ‘ईडी’ का इस्तेमाल निश्चित तौर पर करेंगे। परंतु ऐसे नतदृष्टाओं की छाती पर पांव रखकर मराठी भाषा भवन का निर्माण करना होगा। राज्य में मराठी संस्कृति, मराठी भाषा के चिह्नों को मिटाने का प्रयास किया जा रहा है। ‘ज्ञानपीठ’ से नवाजे गए कुसुमाग्रज द्वारा मराठी भाषा के संदर्भ में व्यक्त किए गए दुख आज भी विचलित करते हैं। मंत्रालय की सीढ़ियों पर मराठी भाषा फटेहाल भिखारी जैसी खड़ी है। ऐसी व्यथा कुसुमाग्रज ने व्यक्त की थी। मंत्रालय में, राजनीतिक व्यवहार में मराठी का इस्तेमाल करना चाहिए। मराठी साहित्य, नाटक, फिल्में, संस्कृति, उत्सव, त्योहार आदि के लिए मराठी भाषा भवन से बड़े स्तर पर मुहिम चलाई जानी चाहिए। मराठी के शिलालेख, पुस्तकें, ग्रंथ, समाचार पत्रों से ज्ञान मिलेगा, परंतु मुंबई सहित महाराष्ट्र में दुनिया के छोर पर मराठी युवा ऊंची उड़ान भरें इसके लिए मराठी भवन से विशेष कार्य किया जाना चाहिए। ये सभी कार्य बीते कई वर्षों से शिवसेना पूरी निष्ठा के साथ कर रही है। शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे ने मराठी भाषा व अस्मिता की रक्षा के लिए ही शिवसेना की स्थापना की। मराठी से द्वेष करनेवालों को तमाचा मारा। मराठी लोगों को पहचान दिलाई, स्वाभिमान दिलाया। मराठी की हैसियत से, शान से जीना सिखाया। मराठी पर हमला करनेवालों को मुंहतोड़ जवाब देने की हिम्मत दी। ‘महाराष्ट्र में रह रहे हो ना, फिर शिवराय के समक्ष नतमस्तक होना ही पड़ेगा, मराठी भाषा सीखनी ही पड़ेगी’, ऐसे आह्वान के साथ महाराष्ट्र गौरव का तेज बढ़ता गया। दिल्ली के तख्त को भी कई बार महाराष्ट्र के आगे झुकना पड़ा, जो कि तेजस्वी मराठी भाषा की धारदार तलवार के कारण। आज पांच सितारा होटलों में, आसमान में उड़ते विमानों में भी ‘जय महाराष्ट्र’ कान में सुनने को मिलता है, तो शिवसेनाप्रमुख के मराठी को लेकर दूरदृष्टि के कारण ही। भाषा के आधार पर प्रांत रचना के अनुसार देश में भाषाई राज्यों का निर्माण हुआ, परंतु मराठी भाषियों को उनके महाराष्ट्र राज्य का निर्माण करने के लिए पांच साल संघर्ष करना पड़ा इसलिए मराठियों को सदैव सावधान रहना चाहिए। महाराष्ट्र का इतिहास है, अन्य राज्यों का भूगोल है। छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म महाराष्ट्र में हुआ इसलिए यह इतिहास है। महात्मा गांधी ने देश के स्वतंत्रता संग्राम के लिए महाराष्ट्र भूमि को चुना। क्योंकि शिवराय का मावला राष्ट्र की रक्षा के लिए जान की बाजी लगाता है, ऐसा इतिहास कहता है। जान की बाजी लगाकर जो राष्ट्र की रक्षा करता है उन वीरों की भाषा मराठी। बाबरी पर हथौड़ा मारकर फिर ‘हां, बाबरी गिरानेवाले शिवसैनिकों पर मुझे अभिमान है’, ऐसा डंके की चोट पर कहनेवाले मर्द सेनापति हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे की भाषा मराठी है। ‘अमरनाथ यात्रियों के बाल को भी हाथ लगाया तो याद रखो’, ऐसी चेतावनी से पाकिस्तानी आतंकियों में दहशत निर्माण करनेवाली भाषा मराठी है। ऐसी मर्दानी मराठी भाषा का भवन बन रहा है। इसमें बाधा डालोगे तो याद रखना!

अन्य समाचार