" /> भुजबल बनाम पाटील!….महाराष्ट्र को इतना असहिष्णु किसने किया?

भुजबल बनाम पाटील!….महाराष्ट्र को इतना असहिष्णु किसने किया?

छगन भुजबल ने ममता बनर्जी का अभिनंदन किया। उसमें क्या गलती हुई? पाकिस्तान में सत्तांतर होता है तब प्रधानमंत्री मोदी भी पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री का अभिनंदन करते हैं। ये एक राज शिष्टाचार है, लेकिन भुजबल द्वारा ममता का अभिनंदन करने से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील को इतना क्रोध आया कि उन्होंने भुजबल को जमानत पर रिहा होने की बात याद दिला दी। पाटील ने भुजबल को ढेर सारी धमकियां और चेतावनी दी। संक्षेप में कहें तो भुजबल चुप रहें। नहीं तो उन्हें दोबारा जेल में डालने की क्षमता हममें है, ऐसा संकेत पाटील देना चाहते हैं क्या? यह एक तरह से न्याय व्यवस्था पर दबाव लाने का तरीका है। श्री भुजबल पाटील को जवाब देने में समर्थ हैं लेकिन इसका एक ही अर्थ लेना चाहिए वो मतलब महाराष्ट्र की राजनीति का संयम-संस्कार व संस्कृति बर्बाद होती जा रही है। प्रगतिशील महाराष्ट्र की परंपरा को यह शोभा देनेवाला और स्वीकार करने लायक नहीं है। प. बंगाल में ममता बनर्जी ने जोरदार विजय हासिल की है और बंगाल काबिज करने के लिए जो गए, वो बंगाल की खाड़ी में गोते लगा रहे हैं। यह दृश्य तुम कैसे बदलोगे? ममता बनर्जी ने २१६ सीटें जीतने का चमत्कार किया, इसके लिए उनका अभिनंदन सभी कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी ममता का सार्वजनिक रूप से अभिनंदन किया है। अब मोदी, शाह, राजनाथ सिंह पर भी चंद्रकांत दादा अपनी खीज निकालेंगे या ममता का अभिनंदन किया इसलिए गुजरात के पुराने मामलों को फिर से खोलने की धमकियां देंगे? वहां भाजपा के सांसद बाबुल सुप्रीयो ने भी ममता को शुभकामनाएं देने से न सिर्फ इंकार किया, बल्कि प. बंगाल की जनता ने भ्रष्ट और क्रूर महिला को दोबारा सत्ता में लाकर ऐतिहासिक भूल की, ऐसे पोस्ट भी अपने फेसबुक पर किए। इस पोस्ट पर चारों तरफ से आलोचना होने पर उन्होंने यह पोस्ट डिलीट कर दिया। भाजपावालों का दिमागी संतुलन ममता की जीत के कारण कितना बिगड़ गया है, इसी का यह सबूत है। राजनीति में हर दिन एक जैसे नहीं होते। उतार-चढ़ाव होता रहता है। महाराष्ट्र का पंढरपुर उपचुनाव भाजपा ने जीता, लेकिन बंगाल में पटखनी खाने के कारण पंढरपुर की जीत भी उन्हें मीठी नहीं लग रही। पंढरपुर में राष्ट्रवादी कांग्रेस के उम्मीदवार कांटे की टक्कर में हार गए। वहां भाजपा के उम्मीदवार समाधान आवताडे विजयी हुए। लोकतंत्र के इस निर्णय को सभी ने माना। इस पर विरोधियों ने भी भाजपा और आवताडे का अभिनंदन किया। महाराष्ट्र में शिवसेना-राष्ट्रवादी-कांग्रेस की सरकार है। पंढरपुर में विजयी हुए आवताडे का अभिनंदन करनेवालों को देख लेंगे, ऐसी भाषा का इस्तेमाल किसी ने किया हो यह दिखाई नहीं दिया। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के फैसले को देखते हुए बलशाली भाजपा के हाथ बहुत कुछ लगा है, ऐसा दिखता नहीं। असम के भौगोलिक व सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए वहां भाजपा की जीत के अलावा कोई विकल्प नहीं था। केरल, बंगाल, तमिलनाडु में इस पार्टी का सुपड़ा साफ ही हो गया। पुडुचरी में तोड़-फोड़ तांबा पितल हो गया है। अब भाजपा को आनंद किसमें है, तो नंदीग्राम में ममता बनर्जी की हार हुई इसमें। नंदीग्राम के साहस की भी देश में सराहना हो रही है। नंदीग्राम की सीट कठिन या असुविधाजनक है इसलिए ममता दूसरे निर्वाचन क्षेत्र में खड़ी नहीं हुर्इं। इंदिरा गांधी, नरेंद्र मोदी, मायावती, मुलायम यादव जैसे नेता एक ही समय में दो-दो निर्वाचन क्षेत्रों से खड़े हुए। यह सुरक्षित राजनीति ममता बनर्जी ने नहीं की। उन्होंने चुनौती स्वीकार की और उसका भी बंगाली जनता की मानसिकता पर परिणाम हुआ। ममता की यही निडरता बंगाली जनता को भा गई। भाजपा की हार की कब्र नंदीग्राम में ही बनाई गई। आज प. बंगाल से भाजपा को भागने के लिए भी जमीन कम पड़ गई। ममता बनर्जी एक पैर पर लड़ीं। उनका अभिनंदन करनेवाले भुजबल को भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष चंद्रकांत पाटील ने धमकीभरी चेतावनी दी। इस तरह से धमकी देकर भाजपा अपनी रही-सही इज्जत भी क्यों डुबा रही है? प. बंगाल पर विजय मिलते ही महाराष्ट्र की तरफ फौज मोडेंगे, ऐसा ख्वाब कुछ लोग देख रहे थे। पंढरपुर की जीत से उनके स्वप्नों को नए पंख मिल ही गए होते लेकिन महाराष्ट्र राज्य का पुण्य काम आया और बंगाल में ममता की बड़ी जीत हुई। इसका टकराव दिल्ली से ज्यादा महाराष्ट्र में शुरू है। मामला धमकी और चेतावनी तक पहुंच गया। महाराष्ट्र के मंत्रियों-विधायकों को विपक्ष के लोग इसी तरह धमकियां देंगे तो राज्य के मुख्यमंत्री, गृहमंत्री को यह मामला गंभीरता से लेना चाहिए। महाराष्ट्र की राजनीतिक परंपरा व संस्कृति का अध्ययन कच्चा होने के कारण ये हो रहा है। विरोधी मतों का सम्मान करने की परंपरा इस मिट्टी की है। यहां तुकोबा की सत्यवाणी चलती है। मंबाजी का ढोंग नहीं चलता। पंढरपुर में भाजपा विजयी हुई, उस पर ‘विठोबा माऊली पावली’ ऐसी प्रतिक्रिया की गई इस पर भी कोई विठोबा माऊली से नाराज होगा क्या? उसी विठोबा माऊली के आशीर्वाद से महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने व महाविकास आघाड़ी की सरकार आई। पूरा बंगाल एक-दो महीने ‘जय श्रीराम’ के नारों से गूंजता रहा, लेकिन ‘जय श्रीराम’ ने भी भाजपा की जीत के लिए अपने धनुष को नहीं उठाया। अब ममता की जीत हुई इसलिए महाराष्ट्र के भाजपावाले श्रीराम को दोबारा वनवास में भेजने की धमकी देंगे क्या? लोकतंत्र में हार-जीत होती रहती है। पांच राज्यों के चुनाव में कांग्रेस की बड़ी हार हुई, लेकिन असम में भाजपा का व बंगाल में ममता का अभिनंदन राहुल व सोनिया गांधी ने किया है। जीत को लेकर अभिनंदन करनेवालों को धमकाना, जेल भेजना, इस असहिष्णुता का महाराष्ट्र के धर्म में तो कोई स्थान नहीं। भाजपा के महाराष्ट्र में सत्ता से दूर होने के लिए उनकी असहिष्णुता ही जिम्मेदार है! भाजपा नेताओं का ‘ऐरोगंस’ मतलब मतवाली भाषा ये उनके बंगाल में हुई करारी हार का एक कारण है। महाराष्ट्र में हमेशा गुर्रानेवाले लोगों ने इसका ध्यान रखा तो ठीक होगा।