" /> कांग्रेस पार्टी में क्रांति!

कांग्रेस पार्टी में क्रांति!

कांग्रेस पार्टी में इस समय बड़ा परिवर्तन हो रहा है। इससे कार्यकर्ताओं में सकारात्मक संदेश जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से सोनिया के आवास पर कमलनाथ का आना-जाना बढ़ गया है। कमलनाथ कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बनेंगे, ऐसा बवंडर इस वजह से उठा है। सच क्या है ये तो राहुल गांधी ही जानते हैं। नवज्योत सिंह सिद्धू को पंजाब का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त करने के साथ ही राहुल गांधी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी में अब और किसी की दादागीरी नहीं चलेगी। मुख्यमंत्री वैâ. अमरिंदर और नवज्योत के बीच कई दिनों से संघर्ष चल रहा था। सिद्धू कांग्रेस छोड़ देंगे, ऐसी हवा भी चली थी, लेकिन गांधी ने समय पर हस्तक्षेप किया। कांग्रेस पार्टी की कमजोरी का फायदा राज्यों के नेता उठा रहे हैं। राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश में ये नेता कांग्रेस या गांधी परिवार के नाम पर ही चुनाव जीतते हैं, सत्ता में आते हैं और सत्ता में आने के बाद ये सब ‘मेरी वजह से’ हुआ, ऐसी डींग मारने लगते हैं। पंजाब में इस डींगबाजी को क्षति पहुंची है। सोनिया गांधी का जो आदेश है वह मानेंगे, ऐसा वैâ. अमरिंदर सिंह को घोषित करना पड़ा। राजस्थान में बेचैनी है। मध्य प्रदेश की सरकार तो हाथ से गई है। राहुल गांधी के बयान कभी-कभी जोरदार होते हैं। कई बार उनके चमकदार व दूरगामी संवाद चर्चा का विषय बनते हैं। राहुल गांधी ने हाल ही में कार्यकर्ताओं की बैठक में कहा कि, ‘डरपोक नेताओं को पार्टी से निकल जाना चाहिए। आरएसएस वालों की कांग्रेस को जरूरत नहीं है।’ गांधी ने यह प्रहार ज्योतिरादित्य सिंधिया व जितिन प्रसाद पर किया है। गांधी परिवार के करीबी रहे ये दोनों अचानक भाजपाई बन गए। गांधी की बातों से ऐसा दिखता है कि ये दोनों कांग्रेस पार्टी में छुपे संघवाले ही थे और वे गए, ये अच्छा ही हुआ। ज्योतिरादित्य की दादी मतलब विजयाराजे अर्थात ग्वालियर की राजमाता। वे जनसंघ से जुड़ी थीं। इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल का विरोध करते हुए वे सीधे जेल गई थीं। भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में वह अगुवा थीं। लेकिन उनके पुत्र महाराजा माधवराव सिंधिया व माधवराव के पुत्र ज्योतिरादित्य कभी संघ परिवार के फेरों में खड़े रहने की भी कोई जानकारी नहीं है। बल्कि गत लोकसभा चुनाव में संघ परिवार ने ज्योतिरादित्य को पराजित कराया था। इस वास्तविकता से इंकार नहीं किया जा सकता है। अब ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपाई बन गए हैं व केंद्रीय मंत्री भी हो गए हैं। जितिन प्रसाद का पुनर्वास अभी होना बाकी है। लेकिन इन दोनों ‘डरपोक’ तथा छिपे हुए संघवाले होने का शोर राहुल गांधी ने मचाया है। गांधी ने यह आरोप लगाया मतलब उनके हाथ में इससे संबंधित सबूत होंगे ही। कांग्रेस पार्टी में संघवाले घुस गए हैं, ऐसा कुल मिलाकर गांधी का कहना है। आजादी की लड़ाई में कांग्रेस का योगदान बड़ा ही है। कांग्रेस के नेता बेखौफ होकर स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हुए। अंग्रेजों से संघर्ष किया। गांधी, नेहरू, सरदार पटेल, राजेंद्र प्रसाद, लाल बहादुर शास्त्री आदि कई कांग्रेसी नेता जेल गए। कई कांग्रेसवालों ने छाती पर गोलियां भी खार्इं, यह सत्य है ही। स्वतंत्रता संग्राम में संघ अथवा अन्य ने ऐसा साहस दिखाया होगा, ऐसा नजर नहीं आता। लोकमान्य तिलक, वीर सावरकर का साहस तो अनोखा ही है। सावरकर जैसों का कांग्रेस से संबंध नहीं था, परंतु संघ परिवार से भी नहीं था। भारतीय जनता पार्टी का तब जन्म भी नहीं हुआ था। इसलिए कांग्रेस पार्टी हिम्मतवाली थी, डरपोक नहीं। देशभक्ति से उनका उस समय अटूट नाता था ही। परंतु वह कांग्रेस पार्टी आज शेष नहीं बची है। एक समय ऐसा था कि कांग्रेस के नाम पर पत्थर भी खड़ा कर दें तो वह चुनाव में जीत जाता था। कांग्रेस की उम्मीदवारी मतलब जीत की पक्की गारंटी। यह दृश्य आज बदल गया है व कांग्रेस अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है। गांधी घराने के बाद नरसिंह राव, मनमोहन सिंह (दो बार) ये दो प्रधानमंत्री कांग्रेस ने दिए। उस समय कांग्रेस की कमान सोनिया गांधी के पास ही थी और उस दौर में कांग्रेस में सेंध लगी, ऐसा दिखा नहीं है। ज्योतिरादित्य, जितिन प्रसाद ये ‘संघवाले’ उस समय मनमोहन मंत्रिमंडल में थे। इन दोनों को भी कांग्रेस ने ही बनाया व भरपूर दिया। कांग्रेस में रहने के दौरान ये दोनों भाजपा और संघ पर जोरदार हमला करते थे, परंतु कांग्रेस का वक्त बदलने पर ये दोनों भी बदल गए। ‘जी २३’ कांग्रेस का यह अंदरूनी गुट में भी उथल-पुथल मचा रहा है। गुलाम नबी आजाद के नेतृत्व में यह ‘जी २३’ अर्थात नाराज समूह आज कार्य कर रहा है। इस नाराज समूह के पीछे भी संघ परिवार ही होगा, ऐसा राहुल गांधी का मत हो सकता है। कांग्रेस पार्टी को निश्चित तौर पर क्या करना चाहिए व उनकी दिशा कौन-सी है, इस बारे में संभ्रम है। प्रियंका गांधी दो दिन पहले उत्तर प्रदेश गर्इं तब लोगों का उन्हें जबरदस्त समर्थन मिला। राहुल गांधी सड़क पर उतरते हैं तब उनके इर्द-गिर्द भी भीड़ का माहौल बनता है। परंतु इस संघर्ष में निरंतरता होनी चाहिए। राजनीति में प्रवाह रुक गया तो गड्ढे बन जाते हैं, इसे हमेशा ध्यान रखना चाहिए। संघ परिवार पर हमला करने से कांग्रेस क्या अथवा सेक्युलर कहलानेवाली पार्टियां क्या, कितनी मजबूत होंगी? संघ का देशभर में पैâला जाल ही भारतीय जनता पार्टी की शक्ति है। संघ को घटा दिया तो भाजपा लूली हो जाएगी, यह सत्य ही है। संघ के विचार के संदर्भ में किसी का मतभेद हो सकता है, परंतु कई क्षेत्रों में उनके द्वारा किया गया काम महत्वपूर्ण है। सर्वस्व झोंककर काम करनेवाले प्रचारक व स्वयंसेवकों को नजरअंदाज करके चलेगा नहीं। ऐसे झोंककर काम करनेवाले लोग पहले कांग्रेस पार्टी में भी थे ही। आज ऐसे लोग शिवसेना में हैं। सत्ता हो अथवा न हो, पार्टी के लिए खुद को झोंककर काम करनेवाले समर्पित लोग ही पार्टी और संगठन को बचाए रखते हैं। कई राज्यों में कांग्रेस के पास ऐसे लोग शेष नहीं बचे हैं। संघ के लोग भाजपा में होने के बाद भी पश्चिम बंगाल में भाजपा की पराजय हुई। इस पराजय के पीछे संघ का अलग गणित हो सकता है। परंतु भाजपा की तुलना में कांग्रेस की भी दयनीय पराजय हुई। उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश ये बड़े राज्य किसी दौर में कांग्रेस के गढ़ थे ही। आज वहां कांग्रेस के लिए परिस्थितियां कठिन हो गई हैं। प्रियंका गांधी परास्त करेंगी, परंतु कार्यकर्ताओं को ऊर्जा देने की जरूरत है। कांग्रेस पार्टी में डरपोक लोगों के लिए स्थान नहीं है, ऐसा राहुल गांधी कहते हैं, जो कि सही है। परंतु पार्टी से ‘डरपोक’ जाते रहेंगे तो कांग्रेस पार्टी हिम्मतबाज कार्यकर्ता तैयार करने की पैâक्टरी है क्या, यह देखना होगा!