" /> ‘मुंबाई’ माता का अपमान, बेईमान कहीं के!

‘मुंबाई’ माता का अपमान, बेईमान कहीं के!

मुंबई किसकी? यह सवाल ही कोई ना पूछे। मुंबई महाराष्ट्र की राजधानी है ही, लेकिन देश का सबसे बड़ा आर्थिक लेन-देन का केंद्र भी है। इसी मुंबई के लिए १०६ मराठी लोगों ने बलिदान दिया है। इसलिए मुंबई महाराष्ट्र की ही है। मुंबई में ईमान से रहनेवाले सब लोगों की है क्योंकि यह हिंदुस्थान की है। इसके पहले वह छत्रपति शिवराय के महाराष्ट्र की है। इसीलिए वह हिंदुस्थान की भी है। मुंबई की तुलना ‘पाक अधिकृत’ कश्मीर से करना और मुंबई पुलिस को माफिया आदि बोलकर खाकी वर्दी का अपमान करना बिगड़ी हुई मानसिकता के लक्षण हैं। महाराष्ट्र की ११ करोड़ मराठी जनता और मुंबई का अपमान मतलब देशद्रोह जैसा अपराध प्रतीत होता है। लेकिन जब ऐसा अपराध करनेवाले लोगों के साथ राष्ट्रभक्त मोदी सरकार का गृह मंत्रालय सुरक्षा कवच देकर खड़ा होता है, तब हमारे १०६ शहीद स्वर्ग में आंसू बहा रहे होंगे। महाराष्ट्र सत्यवादी हरिश्चंद्र का पूजक है। मराठी लोगों से बेईमानी करनेवाले विकृत लोगों से मराठी माणुस हमेशा लड़ता रहा है। कोई भी आए और महाराष्ट्र की मराठी राजधानी पर टपली मारे, कोई ऐरा-गैरा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को अरे-तुरे करके चुनौती दे, तो इसके विरोध में पूरे महाराष्ट्र को एक होना चाहिए। महाराष्ट्र संतप्त है लेकिन भारतीय जनता पार्टी मुंबई और राज्य के मुख्यमंत्री का अपमान करनेवालों का सीधे-सीधे समर्थन कर रही है। इस दौरान मुंबई पर अपना हक जतानेवाले बहुत सारे लोग आगे आए हैं। लेकिन मुंबई ‘मुंबाई’ देवी का ही प्रसाद है। मुंबई या मुंबादेवी कोली लोगों की कुलदेवी हैं। ‘मुंग’ नामक एक कोली ने इस देवी की स्थापना की इसलिए उसका नाम पहले ‘मुंगाची आई’ पड़ा और ‘महा-अंबाआई’ और फिर उसके बाद ‘मुंबाई’ का आसान नाम देवी को मिला, ऐसा कई लोगों को लगता है। कोई कहता है कि मुंबई ‘मृण्मयी’ का ही रूप है। ऐसी ‘देवी’ स्वरूप मां की तुलना पाक अधिकृत क्षेत्र से करके हमारी देवी का ही अपमान किया गया। हिंदुत्व और संस्कृति का, धर्म और १०६ शहीदों के त्याग का अपमान किया गया तथा ऐसा अपमान करके छत्रपति शिवराय के महाराष्ट्र पर नशे की पिचकारी फेंकने वाले व्यक्ति को केंद्र सरकार विशेष सुरक्षा की पालकी का सम्मान दे रही है। मराठीजनों, मुंबादेवी का यह अपमान जिसे प्रिय है, ऐसे लोग दिल्ली में और महाराष्ट्र के विधिमंडल में बैठे हैं इसलिए मुंबई पर खतरा बना हुआ है। मुंबई को पहले बदनाम करो, फिर उसे खोखला करो। मुंबई को पूरी तरह से कंगाल करके एक दिन इसे महाराष्ट्र से तोड़ने की करतूत नए सिरे से रची जा रही है। यह अब साफ हो चुका है। लोगों द्वारा चुनी गई महाराष्ट्र की सरकार के अधिकारों और आजादी पर हमला करने का एक भी मौका महाराष्ट्र के भाजपा वाले और केंद्र सरकार नहीं छोड़ती। अमदाबाद, गुड़गांव, लखनऊ, वाराणसी, रांची, हैदराबाद, बेंगलुरु और भोपाल जैसे शहरों के बारे में अगर कोई अपमानजनक बयान देता तो केंद्र ने उसे ‘वाय’ सुरक्षा की पालकी दी होती क्या? यह महाराष्ट्र के भाजपाई स्पष्ट करें। देवेंद्र फडणवीस, प्रधानमंत्री मोदी या गृहमंत्री शाह का नाम ‘अरे-तुरे’ से उच्चार करनेवाले टीनपाट चैनलों के मालिकों को भाजपा वालों ने ऐसा समर्थन दिया होता क्या? आज जिस प्रकार से सारे भाजपावाले महाराष्ट्रद्रोहियों के साथ खड़े हैं, उसी विश्वास से हमारी सीमा में घुसे चीनी बंदरों के बारे में हिम्मत दिखाई होती तो लद्दाख तथा अरुणाचल की सीमा पर देश की बेइज्जती ना हुई होती। देश की इज्जत तार-तार न हो, इसके लिए राष्ट्रभक्तों ने संयम रखा हुआ है, बस इतना ही। आज शिवसेना ने अलग राह पकड़ी है, तब भी ‘प्रधानमंत्री’ के रूप में मोदी का अपमान कदापि सहन नहीं करेगी। मोदी आज एक व्यक्ति नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री के रूप में एक ‘संस्था’ हैं। ऐसा ही हर राज्य के मुख्यमंत्रियों के संदर्भ में और राज्यों की प्रांतीय अस्मिता के बारे में भी कहा जा सकता है। राजनीतिक एजेंडे को सामने लाने के लिए देशद्रोही पत्रकार और सुपारीबाज कलाकारों के राजद्रोह का समर्थन करना भी ‘हरामखोरी’ ही है। मतलब माटी से बेईमानी ही है। जो लोग महाराष्ट्र के बेईमानों के साथ खड़े हैं, उन्हें १०६ शहीदों की बद्दुआ तो लगेगी ही, लेकिन राज्य की ११ करोड़ जनता भी उन्हें माफ नहीं करेगी! ‘मुंबाई’ माता का अपमान करनेवालों के नाम महाराष्ट्र के इतिहास में डामर से लिखे जाएंगे। बेईमान कहीं के! ये लोग अब राष्ट्रभक्ति का तुनतुना न बजाएं, बस इतनी ही अपेक्षा है!