" /> ‘पेगासस’ का बाप कौन?

‘पेगासस’ का बाप कौन?

इजराइल हिंदुस्थान का मित्र देश है, ऐसा हम मानते थे। प्रधानमंत्री मोदी के दौर में यह मित्रता कुछ ज्यादा ही मजबूत हुई है। उसी इजराइल के ‘पेगासस’ नामक जासूसी ऐप्स द्वारा हमारे डेढ़ हजार से ज्यादा प्रमुख लोगों का फोन गुप्त ढंग से सुने जाने का मामला सामने आया है। राहुल गांधी सहित कई उद्योगपति, राजनीतिज्ञ, पत्रकार आदि लोगों के ‘फोन टैप’ किए गए। व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार पर यह सीधा हमला है। संसद का अधिवेशन शुरू होने के दौरान पेगासस फोन टैपिंग प्रकरण सामने आया है। यह सीधे-सीधे जासूसी करने का मामला है। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में यह हुआ। हमारे गृहमंत्री श्री शाह कहते हैं, ‘देश और लोकतंत्र को बदनाम करने की यह अंतर्राष्ट्रीय साजिश है!’ गृहमंत्री द्वारा ऐसा बयान दिया जाना आश्चर्यजनक है। देश को बदनाम निश्चित तौर पर कौन कर रहा है, यह श्रीमान गृहमंत्री बता सकते हैं क्या? सरकार आपकी, देश और लोकतंत्र आपका। फिर ये सब करने की हिम्मत किसमें निर्माण हुई? प्रे. निक्सन के दौर में ‘वाटरगेट’ प्रकरण हुआ था। तब निक्सन को राष्ट्रपति के पद से इस्तीफा देकर घर जाना पड़ा था। राजीव गांधी के घर के बाहर हरियाणा के दो पुलिसकर्मी खड़े हुए। यह मेरी निगरानी करने का मामला है, ऐसा कहकर राजीव गांधी ने चंद्रशेखर की सरकार को गिरा दिया। इन सबसे ज्यादा गंभीर ‘पेगासस’ प्रकरण है। वाटरगेट के दौर में तकनीकी ज्ञान आज जितना उन्नत नहीं था। मोबाइल व इलेक्ट्रॉनिक की दुनिया आज की तरह विकसित नहीं हुई थी। आज ‘पेगासस’ जैसे इलेक्ट्रॉनिक शस्त्र हजारों लोगों का फोन छिपकर आसानी से सुनते हैं, ये क्या अति सतर्क मोदी सरकार जानती नहीं होगी? कांग्रेस के शासन में इसी तरह के जासूसी प्रकरणों का खुलासा हुआ, तब भारतीय जनता पार्टी द्वारा समय-समय पर अख्तियार की गई भूमिका आज भी लोग भूले नहीं हैं। प्रधानमंत्री-गृहमंत्री को जासूसी प्रकरण में जिम्मेदार ठहराकर संसद में उनके इस्तीफे की मांग करनेवाले लोग आज सत्ता में हैं और इस प्रकरण पर वे संसद में चर्चा कराने को भी तैयार नहीं हैं। कुछ हजार लोगों के मोबाइल फोन में एक ‘ऐप’ पहुंचा दिया। फोन हैक किया और सभी प्रमुख लोगों की बातें सुनी गर्इं। ‘पेगासस’ कुछ चुनिंदा हिंदुस्थानियों पर किया गया साइबर हमला है और केंद्र सरकार की सहमति के बगैर ऐसा हमला नहीं हो सकता है। राहुल गांधी द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे दो मोबाइल फोन ‘पेगासस प्रोजेक्ट’ की सूची में है। निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा पेगासस का शिकार बने। इन्हीं लवासा ने २०१९ के लोकसभा चुनाव में मोदी द्वारा चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन किए जाने का मत व्यक्त किया था। प्रशांत किशोर, अभिषेक बनर्जी, वर्तमान रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव का फोन भी छुपकर सुनने का प्रयास हुआ है। पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर जिस महिला कर्मचारी ने यौन शोषण का आरोप लगाया उस महिला का फोन भी पेगासस जासूसी सूची में डाला गया। सवाल इतना ही है कि सियासी शत्रुओं पर नजर रखने के लिए पेगासस की सेवा हिंदुस्थान में किसने खरीदी थी? देश के इतिहास में यह पहली बार हुआ है। राष्ट्र के चार स्तंभ के रूप में जिनसे अपेक्षा रखी जाती है, उन सभी पर नजर रखी गई। न्यायालय, संसद, प्रशासन, समाचार पत्र सरकार की जासूसी से कोई भी बचा नहीं। जासूसी करनेवाला पेगासस सॉफ्टवेयर खरीदा गया। उससे सभी पर नजर रखी गई, जिनके पास प्रचंड पैसा व राजनीतिक ताकत तथा मनमानी करने की इच्छा है वही लोग ऐसा धंधा कर सकते हैं। स्वतंत्रता व नीतिमत्ता की परवाह न करनेवाले मुट्ठीभर लोगों द्वारा किया गया यह राष्ट्र विरोधी कृत्य है। ‘पेगासस’ जासूसी का दायरा काफी अधिक है। देश के नागरिकों का पैसा उन पर नजर रखने के लिए व उनका फोन ‘हैक’ करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसे राष्ट्रभक्ति का कौन-सा प्रकार माना जाए? ममता बनर्जी के भांजे सांसद अभिषेक बनर्जी के फोन पर पेगासस से हमला किया गया। ममता बनर्जी को पराजित करने के लिए राजनीति किस स्तर तक गिर गई थी, ये देखें। चार मुख्यमंत्रियों का फोन सुना गया, उनमें ममता बनर्जी होंगी ही! राजनीतिक विरोधियों पर गैरकानूनी निगरानी रखना, उनकी बातें छुपकर सुनना यह उनके निजी जीवन पर हमला है। महाराष्ट्र के कुछ अधिकारी व पहले की सरकार कई विरोधियों के फोन गैरकानूनी ढंग से सुनती थी व उस बारे में वर्तमान समय में जांच चल रही है। कर्नाटक के दिवंगत मुख्यमंत्री रामकृष्ण हेगडे को पद से इस्तीफा देना पड़ा था। विरोधियों का फोन ‘टैप’ किए जाने का आरोप उन पर लगाया गया था। हेगडे ने उन पर लगे आरोपों को खारिज कर दिया, परंतु उन्हें मुख्यमंत्री का पद छोड़ना पड़ा। अब पेगासस जासूसी प्रकरण की जिम्मेदारी कौन लेगा? इस पूरे प्रकरण की जांच ‘जेपीसी’ अर्थात संयुक्त संसदीय समिति द्वारा कराई जाए, यह पहली मांग है। अन्यथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ‘सुओ मोटो’ दायर करके स्वतंत्र जांच समिति नियुक्ति की जाए। इसी में राष्ट्र हित है। परंतु राष्ट्र हित राष्ट्र के सम्मान की फिक्र असल में किसे पड़ी है? देश एक अंधेरे गर्त में फंस गया है। मुट्ठीभर लोग आपातकाल लादने जैसा काला दिन हर साल मना रहे हैं। ‘पेगासस’ का हमला आपातकाल से ज्यादा भयंकर है। ‘पेगासस’ के असली बाप हमारे देश में ही हैं, उन्हें ढूंढ़ो।