" /> ‘बर्ड फ्लू’ का अलार्म!

‘बर्ड फ्लू’ का अलार्म!

देश में कोरोना मरीजों की संख्या अब कम हो गई है, फिर भी तीसरी लहर की तलवार लटक ही रही है। मतलब कोरोना का भूत आज भी हमारे इर्द-गिर्द ही घूम रहा है। उस पर अब एक और झकझोरने वाली खबर सामने आई है। देश में ‘बर्ड फ्लू’ से पहली मौत की खबर दिल दहलाने वाली है। दिल्ली में बर्ड फ्लू से ११ साल के एक बच्चे की मौत होने का खुलासा हुआ है। वहां के एम्स अस्पताल में उसका इलाज चल रहा था। बुखार और खांसी के लक्षणवाले इस बच्चे को कोरोना का संक्रमण हुआ होगा, ऐसा डॉक्टरों का प्रारंभिक अनुमान था। परंतु सभी परीक्षण रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद उसे कोरोना न होने तथा ‘एवियन इन्फ्लूएंजा’ अर्थात बर्ड फ्लू होने का पता चला। दुर्भाग्य से २० जुलाई को इस बच्चे की मौत हो गई। अब उसका इलाज करनेवाले, उसके संपर्क में आए सभी लोगों को आइसोलेशन रूम में रखा गया है और तमाम सावधानियां बरती जा रही हैं। हालांकि, बर्ड फ्लू से देश में पहली मौत चिंता बढ़ानेवाली ही है। पिछले डेढ़ वर्षों से देश में कोरोना से हाहाकार मचा है। यह महामारी चार लाख से अधिक लोगों की बलि ले चुकी है। उसकी दूसरी लहर के प्रहार से सरकारी तंत्र और जनता अभी भी पूरी तरह उबर नहीं पाई है। हालांकि, कोरोना के मरीजों की संख्या में कमी आई है, लेकिन फिर भी कोरोना से मृत्यु की दर चिंताजनक है। उसमें ‘जीका’ वायरस, कोरोना का ही ‘डेल्टा प्लस’ और कुछ अन्य वैरिएंट चिंता बढ़ा रहे हैं। एक महिला के कोरोना के दोनों वैरिएंट से संक्रमित होने का पता दो दिन पहले ही चला है। हालांकि, कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके लोगों में गंभीर बीमारी का खतरा कम हुआ है, लेकिन फिर भी कोरोना संक्रमण से वे पूरी तरह मुक्त नहीं हुए हैं इसलिए उन पर भी खतरे का साया है ही। उस पर अब ‘बर्ड फ्लू’ का खतरा और बढ़ गया है। कोरोना की दूसरी लहर आने से पहले ही महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में बर्ड फ्लू का प्रकोप दिखाई दिया था। कई जगहों पर मुर्गियां ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में अन्य पक्षियों की भी मौत हुई थी। महाराष्ट्र में कई जगहों पर बड़ी संख्या में मुर्गियों को मार दिया गया था। हालांकि, उस समय बर्ड फ्लू से इंसानों के मरने की सूचना नहीं मिली थी। इसके बावजूद कई राज्यों में इस बीमारी की आशंका के कारण ‘पोल्ट्री’ व्यवसाय पर भारी आफत आई थी। अब भी इसी की पुनरावृत्ति होने का खतरा है। पिछले दो-तीन दशकों में बर्ड फ्लू हमारे देश में कम-से-कम चार या पांच बार सिर उठा चुका है। लेकिन इसका जोखिम मुर्गियों और पक्षियों तक ही सीमित था। अब तक, बर्ड फ्लू मतलब मुर्गियां एवं अन्य घरेलू पक्षी ऐसा ही समीकरण था। लेकिन अब देश की राजधानी में ही बर्ड फ्लू द्वारा पहली बलि लेने से वहां बर्ड फ्लू और इंसान ऐसा भी समीकरण बनने का खतरा निर्माण हो गया है। जून के पहले सप्ताह में कोरोना की तरह ही दुनिया में बर्ड फ्लू के पहले मानवी संसर्ग की खबर भी चीन से ही सामने आई थी। यह सब पहले चीन में क्यों होता है और फिर संकट पूरी दुनिया में कोहराम क्यों मचाता है, बेशक यह सवाल गंभीर है। लेकिन अभी दिल्ली में बर्ड फ्लू ने जो ‘अलार्म’ बजाया है, उस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। केंद्र सरकार और स्वास्थ्य व्यवस्था को अब जाग जाना चाहिए। जैसे कोरोना ‘ताली एवं थाली’ से नहीं गया उसी तरह बर्ड फ्लू भी नहीं जाएगा, ये ध्यान रखना चाहिए।