मुख्यपृष्ठनए समाचारसामना संपादकीय: छोटे शरीफ की बयानबाजी!

सामना संपादकीय: छोटे शरीफ की बयानबाजी!

पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री ने भी प्रथा-परंपरा के अनुसार कश्मीरी राग अलापा है। नए प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने अपने पहले भाषण में ही धारा-३७० रद्द करने का उल्लेख किया। इसके अलावा यह मुद्दा हर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उठाने की बात कही। पाकिस्तानी शासनकर्ता हूं या सेनाशाह, उनकी कश्मीर के बारे में आज तक की भूमिका यही रही है। इसलिए नए प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ अपने पुराने राग की अपेक्षा दूसरा राग अलापेंगे, ऐसी उम्मीद करना गलत साबित होगा। यदि शाहबाज मियां ने प्रधानमंत्री की शपथ लेने के बाद पहले भाषण में कश्मीर का उल्लेख नहीं किया होता तो वहां के विपक्षी, सेना, मुल्ला-मौलवी उनसे जवाब मांग सकते थे। पाकिस्तानी सेना क्या अथवा शासनकर्ता क्या, चाहे वे किसी भी पार्टी के हों, ‘कश्मीर मसला’ उनके राजनीतिक अस्तित्व का मुद्दा है। इसके सिवाय वे अपनी गाड़ी नहीं चला सकते। लिहाजा, हर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री सत्ता में आने के बाद कश्मीर मसले की बांग देता ही है। अन्य दिनों में भी बीच-बीच में उन्हें कश्मीर की हिचकी आती रहती है। पाकिस्तान का निर्माण हुआ तब से कश्मीर पाकिस्तानी शासनकर्ताओं का ‘सपना’ रहा है। उसकी पूर्ति के लिए हिंदुस्थान का विरोध कभी खुले तौर पर तो कभी छुपा युद्ध पाकी हमेशा करते रहे हैं। आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देकर कश्मीर घाटी को दशकों दशक तक अशांत और अस्थिर रखनेवाले पाकी ही हैं। आज तक वहां हजारों स्थानीय कश्मीरी दहशतवादियों की गोलियों के शिकार हुए हैं। उसमें कश्मीरी पंडित जैसे हैं, उसी तरह स्थानीय मुस्लिम भी हैं। इसके अलावा आतंकवादियों के हमले में हमारे सैकड़ों जवानों का बलिदान हुआ है। धारा-३७० हटाकर भी इन स्थितियों में ज्यादा फर्क नहीं आया है। दूसरी बात इन आतंकवादियों को पाकी शासनकर्ता खुलेआम ‘शहीद’ कहते हैं। उसमें कारगिल युद्ध थोपनेवाले परवेज मुशर्रफ जैसे थे, उसी तरह अविश्वास प्रस्ताव के कारण बेदखल होने की असफलता अपनी ओर खींच लेनेवाले मियां इमरान भी थे। प्रधानमंत्री मोदी ने जिस नवाज शरीफ को अचानक लाहौर में उतरकर जन्मदिन की शुभकामनाएं दी थीं उन नवाज शरीफ की भी कश्मीर के मामले में नीति अलग नहीं थी। दरअसल, मोदी के इस कथित बर्थडे डिप्लोमेसी के थोड़े दिनों बाद ही कश्मीर के उरी में हुए आतंकवादी हमले में हमारे १८ जवान शहीद हो गए। अब उसी नवाज शरीफ के छोटे भाई शाहबाज पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने हैं और उन्होंने अपने पहले ही भाषण में कश्मीर का मुद्दा उठाकर भविष्य की नीतियों से अवगत कराया। एक तरफ हिंदुस्थान के साथ अच्छे संबंध होने चाहिए, ऐसा कहना और दूसरी ओर कश्मीर मसले का राग भी अलापना। धारा-३७० का उल्लेख करते हुए चेतावनी की भाषा बोलना। ‘कश्मीर घाटी के लोग रक्तरंजित हैं। उन्हें पाकिस्तान राजनीतिक और नैतिक समर्थन देगा, साथ ही इस मुद्दे को हर वैश्विक मंच पर उठाएगा’, ऐसे तारे पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री ने तोड़े हैं। हिंदुस्थान में जब धारा-३७० हटाई गई तब पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने पर्याप्त गंभीर राजनीतिक प्रयास नहीं किए, ऐसी तोहमत शाहबाज ने लगाई है। कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान की नई सरकार अधिक आक्रामक होगी इसके ये संकेत हैं। बड़े शरीफ के समय ‘बर्थडे डिप्लोमेसी’ का धक्का वगैरह देनेवाले अब इस छोटे शरीफ की बयानबाजी पर किस ‘डिप्लोमेसी’ का सहारा लेंगे?

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