मुख्यपृष्ठनए समाचारसामना संपादकीय: भ्रष्टाचार के खिलाफ कौन बोले?

सामना संपादकीय: भ्रष्टाचार के खिलाफ कौन बोले?

महाराष्ट्र सरकार किस कदर भ्रष्ट आदि है, इस पर भाजपा के अपने भोंगे व भाड़ोत्री भोंगे रोज शोर मचाते हैं। परंतु चिराग तले ही अंधेरा वैâसे होता है, ये सार्वजनिक हो गया है। हरियाणा में भाजपा की सरकार है। वहां एक ही समय में भ्रष्टाचार व अत्याचार चरम पर पहुंच गया है। हरियाणा में कांग्रेसी विधायक नीरज शर्मा ने भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे मंत्रियों पर, साथ-साथ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए इसके लिए अजीबोगरीब प्रतिज्ञा की है। मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेंगे तब तक सिले हुए कपड़े व पांव में चप्पल नहीं पहनेंगे, ऐसी प्रतिज्ञा विधायक शर्मा ने ली है। विधायक शर्मा द्वारा हजारों करोड़ रुपए का भ्रष्टाचार सबूतों के साथ सामने लाए जाने के बावजूद भी खट्टर की सरकार कार्रवाई करने को तैयार नहीं है। यदि हजारों करोड़ का भ्रष्टाचार नीरज शर्मा ने बाहर निकाला होगा तो इस आर्थिक घोटाले की जांच ‘ईडी’ जैसी जांच एजेंसी को ही हाथ में लेनी चाहिए। हरियाणा के कांग्रेसी विधायक ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई की अगुवाई की है, इससे देश एवं अन्य विरोधियों को सबक मिलना चाहिए। कर्नाटक में भाजपा का ही शासन है। कल, परसों वहां क्या हुआ? कर्नाटक में भाजपा सरकार के मंत्री कमीशन के लिए प्रताड़ित करते हैं, ऐसी शिकायत करनेवाले एक ठेकेदार की उडुपी स्थित एक होटल में संदिग्ध मौत हो गई। ईश्वरप्पा ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री हैं। सालभर पहले किए गए कामों के बिल मंजूर करने के लिए मंत्री महोदय ४० फीसदी कमीशन मांग रहे थे। ‘इस कमीशनखोरी की शिकायत प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री शाह से लेकर सभी नेताओं के पास करने के बावजूद किसी ने हस्तक्षेप नहीं किया इसलिए मैं आत्महत्या कर रहा हूं। मेरे साथ कुछ अनहोनी हो तो ईश्वरप्पा को ही जिम्मेदार माना जाए।’ ऐसा मृतक संतोष पाटील ने पत्र में लिखा था। भाजपा की कमीशनखोरी के कारण एक युवा ठेकेदार बलि चढ़ गया। परंतु जो कोई भी ईश्वरप्पा है वह आज भी मंत्रिमंडल में है। ईश्वरप्पा जैसा प्रकरण विरोधी मुख्यमंत्री वाले किसी राज्य में हुआ होता तो अब तक भाजपा और कंपनी ने पराकोटी का उत्पात मचाया होता व सीबीआई, ईडी के दस्ते छापा मारने के लिए उन राज्यों में भेजकर जांच के पहले ही आरोपी को फांसी पर लटका दिया गया होता। लेकिन हरियाणा व कर्नाटक प्रकरण में कोई मुंह से निषेध के शब्द निकालने को तैयार नहीं है। महाराष्ट्र में भाजपा के किरीट सोमैया ने ‘विक्रांत बचाओ’ के नाम पर लोगों से पैसे एकत्रित किए, बिल्डरों से भारी रकम वसूल की और उन पैसों का इस्तेमाल निजी हित में किया। कोर्ट में आत्मरक्षा में ये महाशय कबूल करते हैं कि विक्रांत बचाने के लिए जुटाया गया पैसा भाजपा के खजाने में जमा किया। यह सीधे-सीधे भ्रष्टाचार है, परंतु भाजपा इस पर भी बोलने को तैयार नहीं है। इसके विपरीत गिरफ्तारी के डर से फरार हुए सोमैया का समर्थन करने का एक भी मौका भाजपा वाले छोड़ नहीं रहे हैं। इन्हीं सोमैया ने जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए व सौ बोगस कंपनियों की सूची ‘ईडी’ को देकर कार्रवाई की मांग की। वो महाशय आज केंद्र में मंत्री हैं और दूसरों के भ्रष्टाचार पर टिप्पणी कर रहे हैं। हर्षवर्धन पाटील जैसे लोग कहते हैं, ‘हम भाजपा में गए इसलिए सुकून की नींद आती है क्योंकि ‘ईडी’ हमारे पीछे नहीं पड़ेगी।’ कृपाशंकर सिंह को ‘ईडी’ ने कोने में ले जाकर दबोच ही लिया था, परंतु भाजपा की वॉशिंग मशीन ने उन्हें दूध में धो दिया और आज कहा जा रहा है कि वे साफ हो गए। विक्रांत घोटाले के आरोपी ‘बाप-बेटे’ अंतरिम जमानत पर छूट गए हैं, परंतु उन्होंने इतने घोटाले और आर्थिक गड़बड़ियां की हैं कि कभी भी जेल की सैर कर सकते हैं। भारतीय जनता पार्टी के जो मोहरे हैं, वे कहते हैं कि देश से भ्रष्टाचार साफ करेंगे। नागपुर महानगरपालिका में हजारों करोड़ का घोटाला हुआ है। पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका में आर्थिक गड़बड़ी का पैसा किसकी तिजोरी में जा रहा है? कर्नाटक-हरियाणा में भाजपा की सरकार है। वहां के भ्रष्टाचार पर कौन बोले?

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