" /> मूर्खता का शोरगुल…दिल्ली में भी घंटानाद करो!

मूर्खता का शोरगुल…दिल्ली में भी घंटानाद करो!

प्रतिबंधों की अनदेखी कर दही-हंडी मनाने का साहस महाराष्ट्र के कुछ फुटकर विपक्षियों ने किया है। ये दल आज पूरी तरह से अस्तित्वहीन और विलुप्त हुए हैं। लोगों ने उन्हें चुनाव में बार-बार जमींदोज किया। लेकिन विरोध के लिए विरोध इस एकमात्र एजेंडे पर विपक्षी दल दो-चार लोगों को इकट्ठा करके सड़कों पर हंडी फोड़कर स्वयं का ही मजाक बना रहा है। दूसरी ओर १०५ विधायक वाले प्रमुख विपक्षी दल भाजपा मंदिर खोलने के लिए भीड़ इकट्ठा कर घंटानाद करने लगा है। सब कुछ खोल दिया, मंदिर क्यों नहीं खोलते? ऐसा सवाल उन्होंने पूछा है। रालेगण से अण्णा हजारे ने भी भाजपा के सुर में सुर मिलाते हुए मंदिर खोलने के लिए आंदोलन करने की तुतारी बजाई है। अण्णा की अनिश्चितकालीन अनशन की चेतावनी से मानो हमारे देवता भी भ्रमित हो गए होंगे। माहौल तो ऐसा बनाया जाता है कि ठाकरे सरकार हिंदू विरोधी है। त्योहारों, उत्सवों के बारे में ठाकरे सरकार शुष्क है। देवी-देवताओं की सरकार को कुछ पड़ी ही नहीं है। ऐसी प्रचारित पिचकारी कितनी भी मारेंगे तो वो पिचकारी विपक्ष पर ही उलटेगी। विपक्ष का दिमाग ठिकाने पर है तो उन्हें अपने राज्य की जनता का विचार पहले करना चाहिए। देवता मंदिर में ही हैं। मूर्तिपूजन किया जाता है, उसी आस्था से वह देवत्व को प्राप्त होती है। इंसान ही नहीं जीएगा तो मंदिर हमेशा के लिए खाली हो जाएंगे, ऐसी भयानक परिस्थिति कोरोना के चलते विश्वभर में पैदा हुई है। विपक्ष ‘ठाकरे सरकार’ की नहीं सुन रही है। ये सरकार हिंदू विरोधी है, ऐसा वे कहते हैं। लेकिन कोरोना की तीसरी लहर का खतरा तुम्हारे ही रक्त-मांस की चहेती केंद्र सरकार ने ही जताया है। ‘तीसरी लहर सबसे ज्यादा खतरनाक है। दही-हंडी और गणेशोत्सव में सावधानी बरतें’, ऐसा केंद्र सरकार ने ही ठाकरे सरकार को ‘लिखित’ कहा है। अब तुम दिल्ली के तुम्हारे मां-बाप की भी नहीं सुनोगे क्या? महाराष्ट्र में ‘घंटा’ क्यों बजा रहे हो? भीड़ पर, त्योहारों पर प्रतिबंध लाओ, ऐसी केंद्र की ही सूचना है। फिर दिल्ली में जाकर घंटानाद करने की हिम्मत क्यों नहीं दिखाते? महाराष्ट्र से प्रतिनिधिमंडल लेकर दिल्ली में जाओ और प्रधानमंत्री, गृहमंत्री को मिलो। उनके दरवाजे पर मंदिर खोलने के लिए जागरण करें, लेकिन इनका शोरगुल महाराष्ट्र में शुरू है। ‘दर्द पेट में और प्लास्टर पैर में’ उसी तरह का ये प्रकार है। शहर में सार्वजनिक जगहों पर होनेवाली भीड़ के बारे में मुंबई उच्च न्यायालय ने भी चिंता व्यक्त की है। मुंबई की भीड़ पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया या नियंत्रण नहीं रखा गया तो कोरोना की दूसरी लहर में इस शहर की जो दशा हुई थी उसकी पुनरावृत्ति होगी, ऐसा भय उच्च न्यायालय ने व्यक्त किया है। तीसरी लहर मुहाने पर है, ऐसा विशेषज्ञों का कहना है। अप्रैल, २०२२ तक कोरोना से देश का छुटकारा नहीं, ऐसा डॉ. राहुल पंडित जैसे विशेषज्ञ कहते हैं। ये सभी विशेषज्ञ, उच्च न्यायालय, केंद्र सरकार जो कह रही है वो सभी मूर्ख और बाहर शोर मचानेवाले उतने ही समझदार? त्योहार, उत्सव मनाना ही चाहिए लेकिन नियमों का पालन करके। सरकार त्योहारों की नहीं, बल्कि कोरोना के खिलाफ है। लड़ाई कोरोना के विरोध में होनी चाहिए लेकिन विपक्ष द्वारा मूर्खता का फूल चबाने से उनकी लड़ाई सरकार के खिलाफ है। अर्थात विपक्ष द्वारा मूर्खता का फूल चबाया गया इसलिए सरकार को स्वयं का संतुलन खोने नहीं देना चाहिए क्योंकि राज्य की करोड़ों जनता की जान का विचार करके सरकार को कदम उठाना है। भारतीय जनता पार्टी ने सभी नियम-कानून को अनदेखा कर महाराष्ट्र में ‘जन आशीर्वाद’ यात्रा निकाली। केंद्र सरकार स्वयं ही ऐसी यात्राओं का प्रयोजन करती है और उसी समय ‘भीड़ पर प्रतिबंध लगाओ, तीसरी लहर आ रही है’ ऐसे कागजी निर्देशों की झड़ी राज्यों को भेजना, इसे क्या कहें? केरल, महाराष्ट्र, मेघालय में खतरे की घंटी बजने के बीच विपक्षियों द्वारा मंदिर खोलने के लिए घंटा बजाना ये अमानवीय है। केरल की परिस्थिति अब भी हाथ से बाहर निकल गई है। अमेरिका में तीसरी लहर ने दोबारा हाहाकार मचाया है। चीन में दोबारा कड़े प्रतिबंध की ओर कदम बढ़ाए जा रहे हैं। यूरोप में तीसरी लहर ने भय की स्थिति निर्माण की ही है। कोरोना तालिबान से ज्यादा खतरनाक है। हिंदुस्थान की सरकार तालिबान से चर्चा कर सकती है। तालिबान के बारे में हिंदुस्थान में बैठक भी शुरू हो गई है। लेकिन कोरोना वायरस एक ऐसा शत्रु है कि उससे चर्चा करके उस वायरस को पीछे हटाया नहीं जा सकता या उसे शांत नहीं किया जा सकता। यहां नियम व प्रतिबंधों का पालन करना ही होगा। भाजपा या अण्णा हजारे के पास अगर कोई दूसरा उपाय है तो बताएं। दो दही-हंडी फोड़कर कोरोना भाग रहा है तो सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित ‘टास्क’ फोर्स को भी इस पर विचार करना चाहिए। केंद्र सरकार द्वारा प्रतिबंधों के बारे में भेजे गए लिफाफे की होली जलाएं या बत्ती बनाएं, इस पर भी विपक्ष की ओर से मार्गदर्शन चाहिए!