" /> राजनैतिक ओलंपिक में बच्चों का खेल!

राजनैतिक ओलंपिक में बच्चों का खेल!

देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या ५० लाख के पार पहुंच गई है। अब तक ८० हजार मौतें हो चुकी हैं। राज्यों में कोरोना का कहर तमाम प्रयासों के बावजूद खत्म नहीं हो रहा है। ऐसे पार्श्वभूमि में संसद का अधिवेशन शुरू हो रहा है। देश के समक्ष समस्या गंभीर है। लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर चिंता का ‘चीनी’ पारा रोज बढ़ रहा है। कश्मीर में अब पाकिस्तानी सरेआम गुप्त सर्जिकल स्ट्राइक करने लगे हैं। अर्थव्यवस्था के बारह बजे ही हैं तो लॉकडाउन, नोट बंदी के कारण करोड़ों लोग बेरोजगार हो गए हैं। इस पर संसद के दोनों सदनों में गंभीरतापूर्वक चर्चा होनेवाली है क्या? रोजी-रोटी, आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि विषयों पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा होनी चाहिए लेकिन देश की सुरक्षा के, लोगों की रोजी-रोटी के मुद्दों को हाशिए पर धकेलने के लिए अन्य व्यर्थ मुद्दों को कुरेदकर निकाला जा रहा है। यह जनता से दगाबाजी ही है। चीन की समस्या पर से ध्यान भटकाने के लिए प्रयास हो रहे हैं। महंगाई, बेरोजगारी मानो समस्या ही नहीं है, बल्कि गली-कूचे की समस्या ही आज राष्ट्रीय समस्या बन गई है। ऐसा माहौल सरकारी पार्टी की साइबर फौज तैयार कर रही है। अब उन्होंने इस महान राष्ट्रीय कार्य को आगे बढ़ाने के लिए मुंबई का चुनाव जानबूझकर किया है। मुंबई में मदन शर्मा नामक एक सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी पर संतप्त शिवसैनिकों ने हमला किया, इसका समर्थन कोई नहीं करेगा, इसका निषेध ही होना चाहिए लेकिन यह जो कोई सेवानिवृत्त अधिकारी महोदय हैं, उन्होंने राज्य की जनता द्वारा नियुक्त मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के संदर्भ में आपत्तिजनक व्यंग्य चित्र सोशल मीडिया पर साझा करके क्या हासिल किया? संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का सम्मान करो, ऐसा इन महोदय को नौसेना में रहते कोई सिखाया नहीं था क्या? आप जिस राज्य में रहते हो, कमाते हो, सुख से जीते हो उस राज्य के नेताओं के बारे में कुछ भी व्यर्थ बोलना और उस पर संतप्त होकर कोई तुम्हारा मुंह फोड़ दे तो उसे अन्याय, अत्याचार, आजादी पर हमला आदि व्यर्थ विशेषण इस्तेमाल करके राजनीति करना। ताज्जुब यह है कि देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह महोदय तुरंत पूर्व नौसेना अधिकारी से फोन पर बात करके सांत्वना आदि देते हैं। मतलब मानो कोई बहुत बड़ा राष्ट्रीय कार्य किया हो। कटु सत्य कहा जाए तो आज आपने महाराष्ट्र का खाया और उसी थाली में छेद कर दिया है। मुख्यमंत्री का अपमान किया है। कल मन में आ ही गया तो राज्यपाल, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति, वर्तमान सेना प्रमुख, नौसेना प्रमुख का उपहास उड़ाओगे तो भी चिंता मत करना। आपको इस महान कार्य के लिए ‘पद्म’ पुरस्कार अथवा विशिष्ट सेवा पदक देकर सम्मानित किया जाएगा। यह ऐसी ओछी साजिश है जिस शासन में रची जाती होगी, वह देश वैश्विक स्तर पर क्या तरक्की करेगा? चीन की सीमा पर २० जवान शहीद हुए। उनकी हत्या का बदला अभी तक नहीं लिया गया। चीन की मुंहजोरी जारी है। यह जो पूर्व नौसेना अधिकारी हैं उन पर हुए हमले के विरोध में भाजपा ने सड़क पर उतरकर आंदोलन किया। अब इस पूर्व नौसेना अधिकारी ने मुख्यमंत्री ठाकरे के इस्तीफे की मांग की है। इसके आगे यह महाशय जो कुछ भी मांग करेंगे उसे करने दो लेकिन अपने सैन्य पेशे के अनुरूप उन्हें २० सैनिकों की हत्या के जिम्मेदार राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री से इस्तीफे की मांग करनी चाहिए थी, परंतु फिलहाल हमारे देश में जो कुछ अनाप-शनाप हरकतें हो रही है, उसे देखते हुए ओलंपिक में बच्चों के खेल का कोई स्वर्ण पदक अवश्य ही मिल जाएगा। मध्य प्रदेश मुरैना जिले में सत्ताधारी भाजपा नेता की गोली से एक जवान गंभीर रूप से जख्मी होने की खबर आई। ये खबर कल की ही है। इससे पहले जलगांव में भाजपा के सांसद उन्मेष पाटील ने सीमा सुरक्षा बल के जवान सोनू महाजन का घर खाली कराने के लिए आतंक मचा दिया। सांसद पाटिल के कार्यकर्ताओं ने सोनू पर तलवार से हमला किया। आज नौसैना अधिकारी के लिए सड़क पर उतरनेवाली भाजपा के लोग उस समय सोनू महाजन नामक पूर्व सैनिक के पक्ष में सड़क पर क्यों नहीं उतरे? उत्तर प्रदेश-बिहार जैसे राज्यों में भी अब तक पूर्व सैनिकों पर कितने हमले हुए हैं? इसकी एक बार जांच कर ही लो। जिस अखलाक की हत्या गौमांस प्रकरण में हुई उसका भी बेटा सेना में सेवा प्रदान कर रहा है। ६४ वर्षीय सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी कैप्टन अमानुल्लाह और उनकी पत्नी की घर में घुसकर भीड़ ने हत्या कर दी। उसमें कै. अमानुल्लाह मारे गए थे। यह घटना भाजपा शासित योगी राज में हाल ही में हुई और इसे लेकर प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री साहब ने सेवानिवृत्त कैप्टन की पत्नी को फोन करके चर्चा आदि की, ऐसा कभी पढ़ने को नहीं मिला। इसके अलावा विगत २४ घंटों में कर्नाटक में तीन पुजारियों की पत्थर से कूंचकर हत्या कर दी गई तो उत्तर प्रदेश के मंदिर में जा रहे पुजारी की चाकू घोंपकर हत्या कर दी गई। पालघर की दुर्भाग्यपूर्ण घटना में राजनीतिक निवेश करनेवाले और उनके मीडिया के ‘सहयोगी’ इन दोनों साधुओं की हत्या के मामले में चुप हैं। भाजपा के लोग सड़क पर उतरकर इन घटनाओं का निषेध करते हुए गलती से भी नहीं दिखे क्योंकि यह सब व्यर्थ कारोबार उन्होने सिर्फ महाराष्ट्र के लिए ही सुरक्षित रखा है। एक अभिनेत्री ने मुंबई का, मुंबई पुलिस का अपमान किया इसलिए नाराजगी व्यक्त की गई। उसे धमकी मानकर उसे ‘वाई प्लस’ ऐसी जबरदस्त सुरक्षा व्यवस्था हिमाचल व केंद्र सरकार ने दी। महिला की मर्यादा के बदले उनकी जितना सराहना की जाए उतना कम ही होगी। यह कर्तव्यदक्षता लाजवाब है। लेकिन हिमाचल के कांगड़ा क्षेत्र में एक विवाहित महिला से ७ लोगों ने सामूहिक बलात्कार किया, उसके बाद उसे जान से मारने की धमकी दी। इसलिए दहशत में आकर जीनेवाली उस अबला को ‘जेड’ सुरक्षा वहां की मुख्यमंत्री, देश के गृह मंत्री को देनी ही चाहिए थी। ऐसा क्यों नहीं हुआ? इस पर राष्ट्रीय स्तर पर गंभीरतापूर्वक चर्चा हुई तो बहार आ जाएगी! बाकी क्या बोला जाए? कुछ कहा जाए ऐसा फिलहाल कुछ शेष बचा है क्या?