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संपादकीय : जादू-टोना?

महाराष्ट्र ने अंधश्रद्धा के खिलाफ हमेशा लड़ाई लड़ी है। जादू-टोना इत्यादि पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने कानून बनाया, लेकिन महाराष्ट्र में मिंधे-फडणवीस की खोके सरकार आने के बाद से जादू-टोना, काला जादू, पिन, नींबू-मिर्ची आदि अंधश्रद्धा को बढ़ावा मिलता दिखाई दे रहा है। फिलहाल इसी विषय पर चर्चा मंत्रालय और अन्य सरकारी कार्यालयों में होती रहती है। मुख्यमंत्री शिंदे और उनके गुट के चालीस विधायक गुवाहाटी के कामाख्या देवी मंदिर गए। वहां उन्होंने जादू-टोना की विधि की‌। कहा जाता है कि भैंसे की बलि दी गई। यह बलि कहते हैं मुख्यमंत्री पद की स्थिरता के लिए दी गई। ये लोग फिर उसी मंदिर में मन्नत पूरी करने गए। महाराष्ट्र प्रगतिशील विचारधारा वाला राज्य है। इस राज्य में जादू-टोना, सरकारी बंगले पर मिर्ची यज्ञ जैसी अघोरी प्रथा के लिए स्थान नहीं है। लेकिन जब से शिंदे की जादू-टोना सरकार सत्ता में आई है, राजनीतिक विरोधियों की दुर्घटना व घातआघात की संख्या अचानक बढ़ने लगी है। इसका संबंध यदि लोग सरकार समर्थित जादू-टोना से जोड़ रहे हैं तो वह ठीक नहीं है। कल पुणे शहर में एक कार्यक्रम में दीप प्रज्वलन के दौरान सांसद सुप्रिया सुले की साड़ी में आग लग गई। वहां मौजूद लोगों के यह घटना ध्यान में आते ही बड़ा अनर्थ टल गया। इसी दरमियान नेता प्रतिपक्ष अजीत पवार एक विचित्र लिफ्ट दुर्घटना में बाल-बाल बचे। पवार तीसरी मंजिल से चौथी मंजिल पर जा रहे थे। इसी बीच बिजली चली गई और चौथी मंजिल पर पहुंचने से पहले ही लिफ्ट धड़ाम से नीचे गिर गई। श्री पवार कहते हैं, ‘मैं एक बड़े हादसे से बच गया, नहीं तो श्रद्धांजलि सभा ही करनी पड़ती।’ दादा प्रगतिशील सोच के हैं, लेकिन उनके लोग कहते हैं कि कुछ तो गड़बड़ है! कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बालासाहेब थोरात नागपुर अधिवेशन के दौरान एक दुर्घटना में घायल हो गए थे और दाहिना कंधा उखड़ने से वे आज भी सक्रिय नहीं हैं। विपक्ष की बुलंद आवाज धनंजय मुंडे की उनके ही बीड़ जिले में एक बड़ी दुर्घटना हो गई, उनकी कार चकनाचूर हो गई। मुंडे बाल-बाल बच गए, लेकिन छाती की टूटी पसलियों के कारण वे अस्पताल में बिस्तर पर पड़े हैं। शिवसेना के संजय राऊत को भी नाहक जेल जाना पड़ा, वह इसी राजनीतिक जादू-टोने के चलते। विनायक मेटे की भी दुर्घटना में मृत्यु हो गई। वे पिछले कुछ दिनों से भाजपा के खिलाफ बोलने लगे थे। विपक्षियों को इस तरह से अस्पताल के बिस्तर पर सुलाने वाली यह सीरीज क्या कहती है? इससे भी गंभीर बात यह है कि मुख्यमंत्री रहते हुए उद्धव ठाकरे को ‘वर्षा’ के आखिरी दिनों में एक भयानक बीमारी का सामना करना पड़ा था। उनकी अचानक कठिन और जानलेवा सर्जरी करनी पड़ी थी। इसलिए कुछ समय के लिए वे अस्वस्थ हो गए थे और उसी समय महाराष्ट्र में सरकार गिराने का प्रयोग शुरू हो गया। यानी महाराष्ट्र में ‘काला जादू टोली’ का अघोरी प्रयोग पहले से शुरू था। इस अघोरी प्रयोग की मार महाराष्ट्र के जनमानस पर पड़ रही है। हालांकि, यह एक तरह से अंधविश्वास है, लेकिन यह अंधविश्वास लोगों के मन में जड़ पकड़ रहा है, यह अच्छी बात नहीं है। महाविकास आघाड़ी के सभी प्रमुख लोगों पर दुर्घटना, घातअघात और जांच का संकट एक के बाद एक गिर रहा है। इसके पीछे मुख्यमंत्री का ‘जादू-टोना’ प्रेम है, ऐसा लोगों को लग रहा है तो संत गाडगे महाराज, प्रबोधनकार ठाकरे जैसे अंधश्रद्धा के विरुद्ध लड़नेवाले समाज सुधारकों की यह पराजय मानी जाएगी। नरेंद्र दाभोलकर जीवनभर अंधश्रद्धा के खिलाफ लड़ते रहे और आखिर में उनकी निर्मम तरीके से बलि ले ली गई। आज महाराष्ट्र में कहीं कुछ घटित होता है, तो लोग सोचते हैं, ‘अरे बाप रे, यह तो एक प्रकार का जादू-टोना है!’ क्या इसे लोगों का आत्मविश्वास डगमगाने का संकेत माना जाए? राज्य के मुख्यमंत्री कहीं दौरे पर जाते हैं, तो किसी एक ज्योतिषी या तंत्र विद्या के जानकार से विशेष मुलाकात करते हैं, यह अब किसी से छिपा नहीं है। यह महाराष्ट्र की प्रगति नहीं, बल्कि अधोगति है। कामाख्या देवी को भैंसे की बलि चढ़ाकर सरकार लाई गई, यह धारणा चालीस बागी विधायकों की है। भैंसे की बलि नहीं दी गई, यह मुख्यमंत्री और उनके लोग कामाख्या देवी की शपथ लेकर बताएं। महाराष्ट्र में विपक्षी दलों के नेताओं पर दुर्घटनाओं और घातआघात की पनौती लगी हुई है। क्या उसका संबंध भैंसे की बलि से है, यह भी लोगों के सामने आने दो। जादू-टोना, नींबू-मिर्च, पिन, काली गुड़िया, भैंसा बलि ये महाराष्ट्र राज्य की पहचान न बने। वैसा होता दिखाई दे रहा है। बीते दिनों एक बार मुख्यमंत्री महोदय नागपुर के रेशीम बाग स्थित संघ मुख्यालय में गए। उस समय लोगों ने उनकी हंसी उड़ाई थी। ‘सरसंघचालक सावधानी बरतें। मुख्यमंत्री आकर गए हैं। संघ मुख्यालय के कोनों में कहीं सुई, पिन, नींबू आदि तो नहीं गिरा है, इसकी जांच कर लें!’ यह अब हंसी का विषय बन गया है। महाराष्ट्र में राजनीतिक विरोधियों की जिस तरह से दुर्घटनाएं हो रही हैं, इसने अघोरी मुद्दों की चर्चाओं को हवा दे दी है। विपक्ष के लोगों की जान की रक्षा के लिए कम-से-कम उपमुख्यमंत्री पांडुरंग से कामना करें।

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