मुख्यपृष्ठनए समाचारदादा कोंडके को आज होना चाहिए था! ...नए बहुरूपिए!

दादा कोंडके को आज होना चाहिए था! …नए बहुरूपिए!

महाराष्ट्र में अराजकता जैसी परिस्थिति निर्माण हो गई है। इसलिए केंद्र सरकार कठोर कार्रवाई करे, ऐसी मांग नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस ने की है। फडणवीस ने केंद्रीय गृहसचिव को इस संबंध में एक विस्तृत पत्र लिखा है। इस पर आश्चर्य लगने जैसा कुछ भी नहीं है। फडणवीस सहित पूरी महाराष्ट्र भाजपा जिस मानसिक संक्रमण अवस्था से गुजर रही है उसे देखते हुए उनसे दूसरी उम्मीद नहीं की जा सकती। वर्ष २०१९ में सत्ता गंवाने के बाद से फडणवीस जैसे लोगों को यह राज्य अपना नहीं लगता। महाराष्ट्र का नमक उन्हें बेस्वाद लगने लगा है। महाराष्ट्र पर कठोर कार्रवाई करें, यानी क्या करें? तो इस मंडली को लगता है इसलिए राष्ट्रपति शासन लगाकर किनारे हो जाएं। अब महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए जो वजहें बताई हैं, उस पर क्या बोला जाए! यदि दादा कोंडके इस समय होते तो वे इस फर्जी कारण मीमांसा पर दूसरी ‘सोंगाड्या’ फिल्म बना देते। अमरावती की सांसद-विधायक पति-पत्नी पर पुलिस ने उनके आतंकी आचरण के खिलाफ कार्रवाई की। महाराष्ट्र में हनुमान चालीसा का पाठ करना है तो अपने घर पर करो। किसने रोका है? लेकिन दूसरों के घर में जाकर पढ़ने का अट्टाहास क्यों? ऐसा सवाल मुंबई हाईकोर्ट ने भी पूछा है। फिर भी राणा दंपति पर की गई कार्रवाई यानी हिटलरशाही वगैरह होने की बात श्री फडणवीस कहते हैं। श्रीमती राणा का छल किया, उन्हें सादा पानी भी नहीं दिया, वह पिछड़ी समुदाय से हैं इसलिए उनका छल किया गया। ऐसा ओछा बयान देना फडणवीस को शोभा नहीं देता। मुंबई के पुलिस आयुक्त संजय पांडे ने राणा दंपति की खार पुलिस स्टेशन में भी शाही मेहमान नवाजी का वीडियो ही सामने ला दिया। लिहाजा, राणा से ज्यादा श्री फडणवीस की पोल-खोल हो गई है। दूसरा ऐसा कि श्रीमती नवनीत राणा कब से पिछड़े समुदाय की हो गर्इं? उनका जाति प्रमाण-पत्र जाली साबित हुआ है। उन्होंने देश को धोखा दिया है। इसके लिए मुंबई पुलिस ने कार्रवाई की। इस पर महाराष्ट्र को तत्काल बर्खास्त करो, ऐसा फडणवीस कह रहे हैं तो दादा कोंडके को इस ‘पांडु’गीरी पर ‘भाजपा का हवलदार’ एक और फिल्म बनानी पड़ती। श्री फडणवीस और उनका पाताल लोक जिस तरह का व्यवहार कर रहा है, वह मानसिक बीमारी का लक्षण है। किरीट सोमैया भाजपा के एक नचनिया हैं। लेकिन उस नचनिया के सूत्रधार खुद श्री फडणवीस हैं, यह अब स्पष्ट हो गया है। सोमैया ने ‘आईएनएस विक्रांत बचाओ’ के नाम पर पैसे जुटाए और उसका गबन किया। उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। ये महाशय फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। दूसरा, पीएमसी बैंक घोटाले में सोमैया के टेबल के नीचे लेन-देन का खुलासा हुआ। इस मामले की जांच शुरू हो गई है। इस नचनिया ने खुद के गाल पर टोमैटो सॉस पोता और शिवसैनिकों द्वारा हमला किए जाने का हो-हल्ला मचाया। खार पुलिस स्टेशन की सरहद में यह नाटक हुआ। सोमैया को पत्थर मारा, जिसके कारण उनकी गाड़ी का शीशा टूट गया। शीशे का एक टुकड़ा उनकी ठोढ़ी पर लगा। इससे खून नहीं बहा, बल्कि टोमैटो सॉस बाहर आया। इसे चमत्कार ही कहा जाना चाहिए! भाजपा की धमनियों में सच्चाई, हिंदुत्व का खून नहीं टोमैटो सॉस है। वह बाहर आया और इसके खिलाफ महाराष्ट्र सरकार पर कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए, यानी प्रेसिडेंट रूल लगाओ, ऐसी मांग श्री फडणवीस साहब की ओर से की गई है। खून के बदले धमनियों में टोमैटो सॉस भर जाए तो इस तरह का जबरदस्त विचार किसी राजनीतिक पार्टी को सूझ सकता है। सोमैया के गालों से टोमैटो सॉस टपकने से क्या राज्य की कानून-व्यवस्था बिगड़ गई है? गृहमंत्री वलसे-पाटील को इसकी जांच कराने के लिए फडणवीस की अध्यक्षता में एक जांच समिति गठित करने में कोई आपत्ति नहीं है। देवेंद्र फडणवीस की मानसिक स्थिति का यथार्थ वर्णन श्री शरद पवार ने किया है। सत्ता गंवाने की यह परेशानी है। लेकिन वह इतने निचले स्तर पर चली जाएगी, ऐसा नहीं लगा था। देवेंद्र फडणवीस कहते हैं, ‘इसके आगे हम संवाद नहीं, संघर्ष करेंगे। कार्यकर्ताओं लड़ने के लिए तैयार हो जाओ।’ यह भी अच्छी बात है लेकिन किन मुद्दों पर वे लड़ने जा रहे हैं? देश में महंगाई कहर बरपा रही है। सब्जियां, अनाज, पेट्रोल-डीजल सभी महंगे हो गए हैं। फिर भी वित्त मंत्री सीतारमण कहती हैं, ‘छी छी! कहां है महंगाई?’ फडणवीस इस बेबाक वित्त मंत्री के खिलाफ संघर्ष करनेवाले होंगे तो अच्छी बात है। महंगाई, बेरोजगारी, चीनी सैनिकों की घुसपैठ जैसे कई ज्वलंत मुद्दे हैं और उसके विरोध में खड़ा होना चाहिए। फडणवीस इसके विरोध में लड़ने को तैयार होंगे तो बताएं। शिवसेना भी उनके साथ आएगी, इतना ही नहीं देश का हर नागरिक उस लड़ाई में उतरेगा, लेकिन दो बूंद टोमैटो सॉस के लिए लड़ने की उनकी भाषा महाराष्ट्र के लड़ाकू बाने पर कालिख पोतना है। महाराष्ट्र पर कार्रवाई करने की बात फडणवीस कहते हैं। लेकिन वे किस महाराष्ट्र के संबंध में बोलते हैं। वर्ष २०१९ से उनका महाराष्ट्र से संबंध टूट गया है। वाकई, आज दादा कोंडके को होना चाहिए था!

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