मुख्यपृष्ठसंपादकीयसंपादकीय : कहते हैं कानून के लिए सब समान है!

संपादकीय : कहते हैं कानून के लिए सब समान है!

है बहुत अंधियारा,
अब सूरज निकलना चाहिए
जिस तरह से भी हो,
ये मौसम बदलना चाहिए…
– गोपालदास नीरज
देश का राजनीतिक मौसम बदला नहीं तो हम सभी हमेशा के लिए अंधेरी गुफा में धकेल दिए जाएंगे, ऐसा ही माहौल तैयार हो गया है। ‘नेशनल हेराल्ड’ प्रकरण में राहुल गांधी से लगातार तीसरे दिन साढ़े आठ घंटे पूछताछ हुई। ‘नेशनल हेराल्ड’ स्वतंत्रता संग्राम में लड़नेवाला अखबार था। पंडित नेहरू ने इस अखबार की स्थापना की थी। यह समाचार पत्र आर्थिक संकट में फंस गया, तब कांग्रेस ने ‘कर्ज’ देकर इस संस्था को बचाया। ये पूरा प्रकरण मनी लॉन्ड्रिंग है, ऐसा ‘ईडी’ ने तय किया और राहुल के साथ-साथ सोनिया गांधी को पूछताछ के लिए बुलाया। सोनिया गांधी कोविड-१९ की वजह से अस्पताल में भर्ती हैं, राहुल गांधी ‘ईडी’ के समक्ष हाजिरी लगा रहे हैं। इसलिए कांग्रेस के तमाम नेता व असंख्य कार्यकर्ता दिल्ली की सड़कों पर उतरकर निषेध कर रहे हैं। भाजपा की नेता स्मृति ईरानी ने कहा है कि कांग्रेस का सत्याग्रह जांच एजेंसियों पर दबाव लाने का प्रयास है। ‘कानून से ऊपर कोई नहीं, कानून के लिए सभी समान हैं’, ऐसा श्रीमती ईरानी कहती हैं, जो कि सही ही है। परंतु भाजपा के आगे कानून आज खोखला नजर आ रहा है। शिवसेना, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा, राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं के पीछे ‘ईडी’ आदि का झमेला लगा है। ये लोग उनके घर-घर में घुसते हैं, ऐसा किसी सब्जीवाले के घर में घुसने का कभी मामला सामने नहीं आया। हाल ही में जो ‘आईपीएल’ के मैच संपन्न हुए उसमें पहले व बाद में जो आर्थिक लेन-देन किया गया उस भारी लेन-देन के पीछे कौन था, यह ‘ईडी’ जैसी संस्था के लिए शोध का विषय है। जिन डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने ‘नेशनल हेराल्ड’ का प्रकरण सामने लाया उन्हीं डॉ. स्वामी ने ‘आईपीएल’ मैचों में आर्थिक गड़बड़ी पर उंगली उठाई, परंतु ‘नेशनल हेराल्ड’ को एक न्याय लगाना और ‘आईपीएल’ जैसे प्रकरणों की ओर नहीं देखना, ऐसा चल रहा है। इसलिए ‘कानून के लिए सब समान हैं’ यह सिद्धांत हमारे देश में मर चुका है। ‘नेशनल हेराल्ड’ प्रकरण में सोनिया व राहुल गांधी को आरोपियों के कटघरे में खड़ा किया जाता है, राहुल गांधी को प्रतिदिन साढ़े ८ घंटे ‘ईडी’ कार्यालय में बैठाकर रखा जाता है ऐसा क्यों, तो हम विरोध करनेवाले कितने भी बड़े होंगे फिर भी उनके कॉलर पर हाथ डाल सकते हैं ये दिखाने के लिए। यह सत्ता की गर्मी और अहंकार है। ‘नेशनल हेराल्ड’ प्रकरण में पी. चिदंबरम ने ‘ईडी’ से कुछ सीधे सवाल पूछे हैं। ‘पीएमएलए’ अंतर्गत राहुल गांधी ने कौन-सा अनुसूचित (Schedule crime) किया है। किस पुलिस एजेंसी ने ‘अनुसूचित अपराध’ के संदर्भ में एफआईआर दर्ज की है?’ चिदंबरम द्वारा पूछे गए ये दोनों सवाल तीखे हैं, परंतु इन सवालों के संतोषजनक जवाब ‘ईडी’ के पास नहीं हैं। उन्हें ऊपर से कहा गया है, राहुल गांधी को निशाना बनाओ, छोड़ो मत। उन्होंने हुक्म की तामील की। उन्हें ऊपर से आदेश मिला है, अनिल देशमुख, नवाब मलिक, अनिल परब, संजय राऊत, लालू यादव, अखिलेश यादव, अभिषेक बैनर्जी को ‘उलझाओ’। ‘ईडी’ ने सिर्फ ‘मम’ कहा। इसलिए इस देश में ‘समान न्याय’ एक ढोंग बन गया है। ‘नेशनल हेराल्ड’ प्रकरण में चिदंबरम ने ‘एफआईआर’ की कॉपी मांगी। परंतु ‘ईडी’ वह कॉपी नहीं दे सकी। कोई भी अनुसूचित अपराध नहीं है, एफआईआर नहीं है फिर भी ‘नेशनल हेराल्ड’ प्रकरण में ‘ईडी’ ने जांच शुरू की व राहुल गांधी को कार्यालय में बुला लिया। यह सब गैरकानूनी है। भाजपा को पंडित नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी की स्मृतियों को सिर्फ नष्ट ही नहीं करना है, बल्कि उस परिवार की वंश बेल भी हमेशा के लिए खत्म कर देनी है। इस देश में नेहरू-गांधी नाम का कुछ भी शेष नहीं रखना है। ऐसा बीड़ा उठाकर ही राष्ट्रीय कार्य की दिशा तय की गई है। यह बदले की राजनीति है। सत्ता का उपयोग विनय के साथ करना होता है। राष्ट्र कल्याण के लिए उसे अमल में लाना होता है। राजनीतिक लड़ाइयां चुनाव के अखाड़े में लड़नी होती हैं। यही इस देश की परंपरा है। आज राजनीतिक लड़ाइयां परिवार को बर्बाद करने तक पहुंच गई हैं। राजनीतिक विरोधियों को पानी भी नहीं मांगने देना है, इस तरह से हमले हो रहे हैं। राहुल गांधी को प्रताड़ित करना व हम उन्हें प्रताड़ित कर सकते हैं इसकी झलक दिखाना, विरोधियों की हर सांस को बंद करना ऐसा ही नए लोकतंत्र का उदय हुआ है। बुलडोजर सिर्फ घरों पर चल रहा है, ऐसा नहीं है। वह लोगों के अधिकारों पर और देश की स्वतंत्रता पर भी चलता हुआ स्पष्ट दिख रहा है। आज राहुल गांधी, कल सोनिया गांधी, उसके बाद और कोई! विरोधियों को खत्म करने के लिए हिटलर ने ‘ज्यूं’ का नरसंहार किया। वैसे ही ‘जहरीली गैस के चेंबर’ का निर्माण करना ही अब शेष रह गया है। राजनीतिक बदले के कदम अब उसी दिशा में बढ़ रहे हैं। देश में कानून का राज रहा ही नहीं है, वहां ‘कानून सभी के लिए समान’ यह बोलने का क्या अर्थ है?

अन्य समाचार