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संपादकीय: घोटालेबाजों को ‘ठोस’ सबूत चाहिए! …राहत और क्लीन चिट!

राज्य में शिंदे-फडणवीस महामंडल की सरकार आने के बाद राहत घोटाले के मामले बढ़ गए हैं। बुलेट ट्रेन की तरह अब ‘राहत फास्ट ट्रेन’ शुरू करनी चाहिए। नामचीन सोमैया पिता-पुत्र को कहा जा रहा है कि आईएनएस विक्रांत वित्तीय घोटाला मामले में राहत दी गई है। पुलिस का कहना है कि इन पिता-पुत्र के खिलाफ विक्रांत घोटाले के पुख्ता सबूत नहीं मिल रहे हैं। अब यह ठोस सबूत आखिर में क्या है? महाविकास आघाड़ी सरकार के समय इस मामले में जो सबूत, गवाही वगैरह ली गई थी, वह क्या ठोस सबूत नहीं थे? आईएनएस विक्रांत कबाड़ में न जाए, यह राष्ट्रीय संपत्ति बचानी ही होगी। इस हेतु से सोमैया पिता-पुत्र ने एक मुहिम चलाई। सरकार को भीख चाहिए तो हम जनता में जाकर सौ करोड़ रुपए इकट्ठा करेंगे और राजभवन में जमा कर देंगे। कुछ भी करके विक्रांत को कबाड़ में नहीं जाने देंगे। इस काम के लिए पिता-पुत्र ने चर्चगेट से लेकर विरार तक जगह-जगह निधि इकट्ठा की। उसकी फोटो, वीडियो, खबरें, सोमैया की पत्रकार परिषद की विज्ञप्ति उपलब्ध है। लेकिन जुटाई गई निधि कहे अनुसार राजभवन में पहुंची ही नहीं, ऐसा खुलासा खुद महाराष्ट्र के राजभवन ने किया। इससे ‘ठोस’ क्या कहा जाए जो दूसरा सबूत हो सकता है? यह शुरुआती घोटाला ५० करोड़ होगा, ऐसा नजर आ रहा है। लेकिन घोटाला ५७ करोड़ का हो या फिर ५७ रुपए का, जनता के पैसे का कदाचार हुआ है और राजभवन के नाम पर यह धोखाधड़ी हुई है। अगर यह अपराध नहीं है तो इसे क्या कहा जाए? सैकड़ों राष्ट्रभक्त नागरिकों ने जगह-जगह सोमैया के ‘विक्रांत बचाओ’ डिब्बे में हजार-पांच सौ की नोटें डालकर विक्रांत को मानवंदना दी। इसमें से कई लोग मुंबई के आर्थिक अपराध विभाग में गए और ‘हमने पैसे दिए’ की बात बताई। वैसे निवेदन लिए गए। फिर भी पुलिस कहती है, ठोस सबूत नहीं है और न्यायालय कहता है घोटालेबाज हो तब भी राहत मिलेगी! सोमैया ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ने का आडंबर रचकर न्याय और सत्य पर कीचड़ फेंका। हमें छोड़कर बाकी सब घोटालेबाज हैं, ऐसा दावा ये लोग करते हैं, तब हैरानी होती है। एच.डी.आई.एल., पी.एम.सी. बैंक घोटाले के आरोपी से इस सोमैया की व्यापारिक भागीदारी है। निकॉन इन्प्रâो कंपनी के लेन-देन की जांच ‘ईडी’ ने क्यों नहीं की? आरटीआई कार्यकर्ता पंढरीनाथ साबले ने इस जमीन घोटाले के सभी सबूत सामने लाए फिर भी ‘ईडी’वाले सोमैया के भ्रष्टाचार को गंबीरता से लेने को तैयार नहीं हैं। महाराष्ट्र में नई सरकार आने के बाद से सभी घोटालेबाज मुक्त हो गए हैं। भ्रष्टाचार के आरोप के कारण दूर किए गए हर अधिकारी को फिर से सेवा में शामिल करके सरकार के भ्रष्टाचारियों को बचाने के जैसे नए सुरक्षा रक्षक तैयार किए जा रहे हैं। फोन टैपिंग मामले में पूर्व पुलिस आयुक्त संजय पांडे को ‘ईडी’ ने गिरफ्तार किया, लेकिन ऐसा ही फोन टैपिंग का अपराध रश्मि शुक्ला पर भी दर्ज है। केंद्रीय जांच एजेंसियों की हफ्ताउगाही की जांच करनेवाली ‘एसआईटी’ को शिंदे-फडणवीस सरकार ने बर्खास्त कर दिया। नवनीत राणा का लकड़ावाला से संबंधित दस्तावेजी वित्तीय लेन-देन का मामला ‘मनी
लॉन्ड्रिंग’ के अंतर्गत आता है लेकिन केंद्रीय जांच एजेंसी इन ‘लॉन्ड्री’वालों को सामान्य जांच के लिए भी बुलाने को तैयार नहीं हैं। जिन पर हत्या, बलात्कार, आत्महत्या के लिए उकसाने, वसूली, वित्तीय घोटाले और ईडी की जांच शुरू थी, वे सभी भाजपा की ‘वॉशिंग मशीन’ में घुसकर स्वच्छ हो गए हैं। हालांकि इससे आजादी का अमृत महोत्सव कलंकित और धूमिल हो गया है। महाराष्ट्र में नई सरकार आने के बाद से भाजपा के घोटालेबाजों को एक तो ‘क्लीन चिट’ मिल रही है या फिर हाई कोर्ट से ‘राहत’ मिल रही है। सत्य, न्याय और जनभावना का इतना अनादर कभी नहीं हुआ था। राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ झूठे सबूत, फर्जी अपराध गढ़ना, उनकी आवाज बंद करने के लिए जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करना, लेकिन खुद के सभी अपराध और घोटाले ‘राहत’ की टोपी के नीचे ढंककर रखना। श्री मोदी का ‘स्वच्छ भारत अभियान’ यही है तो आजादी के अमृत महोत्सव में लहरानेवाला तिरंगा भी शर्म से नीचे झुक जाएगा, कबाड़ में गया विक्रांत युद्धपोत और सैकड़ों शहीद तड़पते रहेंगे। देश को फंसानेवाले ठोस सबूत मांग रहे हैं। विधानमंडल के दोनों सदनों में इस ‘राहत’ घोटाले का मुखौटा फाड़ना ही होगा। क्या विपक्षी पार्टियां ऐसा करेंगी?

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