मुख्यपृष्ठसंपादकीयसंपादकीय : बेशर्मी की पराकाष्ठा! ...अग्निवीरों का अपमान!!

संपादकीय : बेशर्मी की पराकाष्ठा! …अग्निवीरों का अपमान!!

आजादी के अमृत महोत्सव का राजनीतिक उत्सव खत्म हो गया होगा तो सरकार को देश की मूलभूत समस्याओं की ओर ध्यान देना चाहिए। लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहुत कुछ कहा। उनका भाषण राजनीतिक प्रचार जैसा ही था। २०२४ के लोकसभा चुनाव की तैयारी उन्होंने लाल किले से की। प्रधानमंत्री का भाषण खत्म हुआ और यहां महाराष्ट्र में ‘अग्निवीर’ योजना की पोल खुल गई। संभाजीनगर में अग्निवीर भर्ती के लिए हजारों बेरोजगार युवक पहुंचे। उन्हें एक दिन-रात अन्न और पानी के बगैर तड़पते हुए सड़क पर बितानी पड़ी। ‘अग्निवीर’ हमारे देश के भाग्य विधाता, राष्ट्रसेवक वगैरह होंगे, ऐसा प्रधानमंत्री द्वारा कहा जा रहा था। जबकि प्रत्यक्ष में भिखारियों से भी दयनीय जैसी अग्निवीरों की अवस्था महाराष्ट्र में देखने को मिली। विकसित हिंदुस्थान के लिए यही पंचप्राण होगा तो क्या होगा? बेरोजगार युवकों का सैन्य भर्ती के नाम पर इस तरह से उपहास दुनिया में और कहीं नहीं हुआ होगा। मूलत: बेरोजगारों को गुलाम व लाचार बनानेवाली यह अग्निवीर योजना है और महाराष्ट्र में इसकी पोल खुल गई। अग्निवीर भर्ती के लिए आए युवकों को किसी ने साधारण पानी भी नहीं पूछा। लेकिन झुंड के झुंड एकत्रित करके उन्हें भ्रमित करना, धर्म की अफीम उनके दिमाग में ठूंसना और उसकी मदहोशी में रखकर चुनाव जीतना, यही जिनका ‘पंचप्राण’ है, उनसे और क्या अपेक्षा की जाए? महाराष्ट्र में महाप्रलय से कोहराम मचा है। लोगों का परिवार बह गया। लेकिन सिर्फ ‘वंदे मातरम’ कहो, महाप्रलय खत्म हो जाएगा, ऐसी बेसिर-पैर की राष्ट्रभक्ति से लोगों के जीवन-मरण की समस्या खत्म होगी क्या? भाजपाई मंत्रियों द्वारा इस तरह से ‘वंदे मातरम’ फतवा जारी करके राजनीति करना, यह स्वतंत्रता संग्राम में शहादत स्वीकार करनेवाले सैकड़ों क्रांतिकारियों का अपमान है। प्रधानमंत्री से भाजपा की आज की पीढ़ी तक एक भी लोग स्वतंत्रता संग्राम में नहीं थे। यह सच्चाई खुद प्रधानमंत्री ने लाल किले से स्वीकार की। आजादी के बाद जन्म लेनेवाला मैं प्रधानमंत्री हूं, ऐसा वे कहते हैं। फिर आप स्वतंत्रता का इतिहास क्यों बदल रहे हैं? भारतीय जनता पार्टी को यह अधिकार किसने दिया? ‘घर-घर तिरंगा’ आदि राजनीतिक मुहिमें ठीक हैं, परंतु देश को आजादी मिली तब अपने कार्यालय व घरों पर तिरंगा लहराने से इंकार करनेवाले आज ‘घर-घर तिरंगा’ मुहिम चलाते दिखे। यह आश्चर्यजनक नहीं है क्या? ‘घर-घर तिरंगा’ फहराने की इतनी ही देशभक्ति और मर्दानगी थी तो पाक व्याप्त कश्मीर के घरों पर तिरंगा फहराकर आजादी का अमृत महोत्सव शान से मनाना चाहिए था। कम-से-कम संपूर्ण घाटी में तो वर्तमान सरकार ‘घर-घर तिरंगा’ फहरा पाई क्या? आजादी का अमृत महोत्सव लाल किले पर शुरू रहने के दौरान वहां कश्मीर में दो कश्मीरी पंडितों पर जानलेवा हमला हुआ, इसमें एक पंडित की मौत हो गई। हमारे ही भाई खासकर हिंदू पंडितों का खून बरसने के दौरान घर-घर तिरंगा का राजनीतिक ढोंग किसलिए? कश्मीर घाटी में बीते आठ दिनों में सेना के ६ जवानों को मृत्यु स्वीकार करनी पड़ी। इस पर महाराष्ट्र के ढोंगी वंदे मातरम वालों ने एक आह तो भरी क्या? तिरंगे की शान रहनी होगी तो शान से फहराओ। रोज तिरंगा कहीं-न-कहीं हमारे ही खून से भीग रहा है। वहां लद्दाख में गलवान घाटी स्थित पैंगॉन्ग झील तक चीन की रेड आर्मी हमारी सीमा में घुस आई है। हमारी ४० हजार वर्ग किलोमीटर जमीन पर कब्जा जमाए वे बैठे हैं। वहां दुम दबानेवाले यहां ‘वंदे मातरम’ और ‘घर-घर तिरंगा’ की घोषणा करते हैं। गलवान घाटी में चीनियों द्वारा हड़पी गई जमीन पर हमारे भाजपाई नेता अथवा केंद्र सरकार का कोई हिम्मतवाला मंत्री तिरंगा फहराने गया होता तो पूरा देश उसका अभिवादन करता। परंतु ‘हैलो’ की बजाय ‘वंदे मातरम’ कहो, ‘घर-घर तिरंगा फहराओ’, ऐसे फतवे जारी करना व राष्ट्रभक्ति के बुलबुले फोड़ना, यही आजादी का उत्सव है। इसमें अमृत की तुलना में राजनीतिक बदले की भावना का जहर ही अधिक है। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में भ्रष्टाचार व वंशवाद पर प्रहार किया। परंतु बीते ९ वर्षों से आपका ही राज है! आपने अपने उद्योगपति मित्र परिवारों का दस लाख करोड़ रुपए का कर्ज माफ कर दिया, इसे निश्चित तौर पर क्या कहा जाए? यहां आपकी ‘ईडी-पीडी’ राजनीतिक विरोधियों को औने-पौने व्यवहारों के लिए पकड़कर जेल में ठूंस रही है, फिर ये कर्जमाफी का क्या मामला है? कौन-किसकी तरफ है, इस पर आपकी राष्ट्रभक्ति व भ्रष्टाचार की व्याख्या तय होनी होगी तो यह देश को गहरे अंधेरे गर्त में धकेला जा रहा है। १५ अगस्त को लाल किले से वंशवाद पर हमला बोला गया। परंतु वंशवाद से ज्यादा एक-दो लोगों की तानाशाही अधिक घातक सिद्ध होती है। फिलहाल यही हो रहा है। देश पर व महाराष्ट्र पर ऐसे ही टोलियों का राज लाकर स्वतंत्रता व लोकतंत्र को बटिक बनाया गया। किस वंशवाद की बात आप करते हैं? ठाकरे के वंशवाद पर कल तक आपकी ही सत्ता का शिखर टिका था। ओडिशा में नवीन पटनायक, आंध्र में जगनमोहन रेड्डी और कल तक बिहार के पासवान, ऐसे कई परिवारों ने आपकी सत्ता के तंबू को सहारा दिया और आपने लिया। परंतु वर्तमान केंद्र सरकार को विस्मरण का झटका आ गया है। ठीक महाराष्ट्र में विखे-पाटील का परिवार फिलहाल राजस्व का आम चूस ही रहा है, बाकी सूची देनी होगी तो वह लंबी ही होती जाएगी और आपका ही पंचप्राण गले में आ जाएगा। मोतीलाल नेहरू, पंडित नेहरू, इंदिरा गांधी, ऐसा स्वतंत्रता संग्राम के समय का परिवारवाद आपके पास होगा तो दिखाएं। प्रबोधनकार ठाकरे, बालासाहेब ठाकरे ऐसा महाराष्ट्र के स्वाभिमान का वंशवाद भी आप दिखा सकते हैं क्या? लोगों को देशभक्ति के नाम पर सड़क पर भिखारियों की तरह खड़ा करना। एक तरफ अग्निवीर-अग्निवीर कहकर बेरोजागर युवकों को राष्ट्रसेवक कहना और दूसरी तरफ वे भर्ती के लिए आएं तो उनका अपमान करना। भूखे-प्यासे लोगों से ‘वंदे मातरम’ का नारा लगवाना, ये धंधे बंद करो। अवैध संविधान विरोधी कृत्यों पर शर्म करो। जहां तिरंगा फहराना चाहिए, वहां हाथ भर की दुम छिपाकर अपने मोहल्लों में तिरंगा यात्रा निकालना ये ढोंग है। राष्ट्रभक्ति का ऐसा व्यापार मतलब बेशर्मी की पराकाष्ठा है।

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