मुख्यपृष्ठसंपादकीयसंपादकीय : ‘वाई’वालों की फौज!

संपादकीय : ‘वाई’वालों की फौज!

देश का माहौल स्वच्छंद और सुरक्षित नहीं रह गया है। केंद्र सरकार ने आए दिन ‘वाई’ अथवा ‘जेड’ सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने का जो रिवाज शुरू किया है, उससे एक बात तो निश्चित तौर पर तय हो गई है कि मोदी-शाह के दौर में आजादी से जीने, बोलने की स्वतंत्रता नहीं रह गई है। लोगों को बेवजह डर लगता है। यह डर का चरम है। परंतु भाजपा समर्थित भयग्रस्तों को केंद्र सरकार विशेष सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराती है। ‘हिजाब इस्लाम का अविभाज्य हिस्सा नहीं है’ ऐसा पैâसला सुनानेवाले कर्नाटक उच्च न्यायालय के तीन न्यायाधीशों को ‘वाई’ श्रेणी की सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। ऐसी घोषणा कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने की। उससे पहले ‘द कश्मीर फाइल्स’ के निर्माता विवेक अग्निहोत्री को भी केंद्र सरकार ने ‘वाई श्रेणी’ सुरक्षा की घोषणा की। महाराष्ट्र के खिलाफ निरंकुश बयानबाजी करनेवाली अभिनेत्री कंगना रनौत को भी ‘वाई’ सुरक्षा दी गई है। आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और कवि कुमार विश्वास को भी पिछले महीने में वाई सुरक्षा दी गई है। महाराष्ट्र में महाविकास आघाड़ी के मंत्रियों, नेताओं पर झूठे आरोप लगाकर कीचड़ उछालने का ठेका लेनेवाले महात्मा किरीट सोमैया को भी केंद्र सरकार ने ‘जेड’ श्रेणी की सुरक्षा देकर उपकृत किया है। बाकी नारायण राणे आदि केंद्रीय मंत्रियों को भी मोदी सरकार ने दिल्ली के केंद्रीय सुरक्षा बलों की विशेष ‘जेड’ सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई है। प. बंगाल में भी ममता बनर्जी के खिलाफ जहर उगलनेवालों को केंद्र ने चना-कुरमुरा बांटने की तर्ज पर सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई है। केंद्र के कई मंत्री और अधिकारी इस तरह से सुरक्षा का पिंजरा लेकर घूम रहे हैं और इन पिंजरों का वितरण केंद्र सरकार शौक से कर रही है। इसी दौरान हिंदी के प्रख्यात पत्रकार, लेखक आशुतोष को जान से मारने की धमकी मिल रही है। ‘घर में घुसकर मारेंगे’, ऐसी चेतावनी दी जा रही है। आशुतोष ‘सत्य हिंदी’ नामक पोर्टल के माध्यम से सच्चाई लिखते हैं। इसलिए मोदी के अंधभक्त उनके खिलाफ बौखलाए हुए हैं। आशुतोष का कांटा निकालने के लिए कुछ अंधभक्तों ने साजिश रची होगी तो उनके जीवन की रक्षा किसे करनी चाहिए? परंतु फिलहाल देश में अंधभक्त व उनका एजेंडा साकार करनेवालों को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की सुरक्षा तुरंत मिलती है बल्कि आशुतोष जैसे पत्रकार सिर पर लटकती तलवार लेकर जी रहे हैं। देश का माहौल भयमुक्त व स्वच्छंद होगा, ऐसा श्री मोदी के आने के बाद लगता था। परंतु इसका ठीक उल्टा हो रहा है। नोटबंदी जैसे निर्णय के बाद देश में आतंकवाद का खात्मा हो जाएगा, ऐसी ‘मन की बात’ प्रधानमंत्री मोदी ने व्यक्त की थी। परंतु देश को आतंकी, धर्मांध प्रवृत्ति वाले लोगों से कितना खतरा है, यह जनता के मन में बैठाने और ऐसा भ्रम निर्माण करने का लगातार प्रयास हो रहा है। जैसा कि उद्धव ठाकरे कहते हैं, यह घातक तानाशाही के संकेत हैं। उत्तर प्रदेश चुनाव के दौरान ‘एमआईएम’ के प्रमुख मियां ओवैसी पर हमला होता है और तुरंत केंद्र सरकार की तरफ से उन्हें ‘जेड’ श्रेणी की सुरक्षा दिए जाने की घोषणा की जाती है, यह एक मिली-जुली योजना होनी चाहिए। मोदी सरकार को आए सात साल बीत गए हैं, फिर भी हर स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में समारोह से पहले आतंकी पकड़े जाते हैं। स्वतंत्रता दिवस अथवा गणतंत्र दिवस समारोह पर हमले की साजिश नाकाम कर दी, ऐसा एलान होता है। मोदी-शाह के राज में ऐसा क्यों होना चाहिए? लोगों को भयमुक्त, शांतिपूर्वक जीने क्यों नहीं मिल रहा है? हिजाब पर निर्णय दिया इसलिए न्यायमूर्ति असुरक्षित क्यों महसूस कर रहे हैं? सत्य लिखा इस वजह से आशुतोष जैसे ‘सत्य हिंदी’ के पत्रकार को धमकी क्यों दी जाए? कुल मिलाकर होल सेल में ‘वाई’ श्रेणी की सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने की नौबत मोदी सरकार पर क्यों आनी चाहिए? ठीक है, इतनी सुरक्षा देने के बाद भी कश्मीर की हवा अस्थिर ही है व कश्मीरी पंडितों की घरवापसी सुरक्षा कारणों से रखड़ी हुई ही है। जो भाजपा समर्थित लोग राजनीतिक विरोधियों को धमकियां देते हैं, भाजपा का एजेंडा न्यायालय व केंद्रीय जांच एजेंसियों तक पहुंचाते हैं, उन्हें ‘वाई’ सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने का डंका बजाकर और ‘वाई’ वालों की फौज खड़ी करके देश में भ्रम निर्माण किया जा रहा है। लोगों को भय के साये में रखा जा रहा है। यह एक राष्ट्रीय के साथ-साथ राजनीतिक नीति ही नजर आती है। ‘वाई’ सुरक्षा व्यवस्था के लिए केंद्र को विशेष सुरक्षा बल का निर्माण करना पड़ेगा, ऐसा ही नजर आ रहा है!

अन्य समाचार