मुख्यपृष्ठनए समाचारसंपादकीय : असम-मेघालय में हिंसा ...ईशान्य का ‘ज्वालामुखी’

संपादकीय : असम-मेघालय में हिंसा …ईशान्य का ‘ज्वालामुखी’

असम और मेघालय इन दो राज्यों के बीच एक बार फिर सीमा विवाद की चिंगारी भड़क उठी है। असम के पश्चिम में स्थित काब्री अंगलोंग जिले में मंगलवार की रात लकड़े ढोनेवाले ट्रक को वन विभाग के अधिकारियों द्वारा रोका जाना इस हिंसाचार के लिए काफी रहा। असम और मेघालय इन दो राज्यों के सीमाई क्षेत्र में इस तरह की रक्तरंजित हिंसा पुरानी ही है। मंगलवार की मध्य रात्रि के दौरान लकड़ों की अवैध ढुलाई करनेवाले ट्रक को असम के वन विभाग के अधिकारियों ने रोकने का प्रयास किया। वह रुके बिना आगे बढ़ गया। इस वजह से वन रक्षकों ने ट्रक के पहियों पर गोलियां चलार्इं। असम वन विभाग द्वारा अतिरिक्त पुलिस सुरक्षा मंगाई गई, उनके और प्रदर्शनकारियों के बीच विवाद बढ़ता गया। उसी दौरान गोलीबारी हुई और ६ लोग बेवजह मारे गए। ‘परिस्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए गोलीबारी करने के अलावा और कोई पर्याय नहीं था,’ ऐसा असम पुलिस का कहना है। तो ‘यह गोलीबारी अनावश्यक थी,’ ऐसा आरोप मेघालय के मुख्यमंत्री कोर्नाड संगमा ने लगाया है। ये आरोप-प्रत्यारोप आगे भी जारी ही रहेंगे। यह रक्तरंजित सीमा विवाद खत्म कब होगा, यह वास्तविक सवाल है। असम और मेघालय के बीच का सीमाई विवाद देश के अन्य सीमा विवादों की तरह ही पुराना है। १९७२ में असम का विभाजन करके एक स्वतंत्र राज्य मेघालय का निर्माण किया गया था। उनकी सीमा पर १२ जगहें विवादित थीं, जिन्हें लेकर दोनों राज्यों के बीच विवाद चल रहा है। इस बार मार्च महीने में केंद्र सरकार की पहल पर दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने दिल्ली में एक करार पर हस्ताक्षर किए थे, जिसकी वजह से १२ में से ६ विवादित जगहों की समस्या हल हो गई थी तथा बाकी जगहों के विवाद को खत्म करने के लिए दोनों राज्यों के बीच चर्चाओं का दौर जारी है। उसमें से एक मीटिंग निकट भविष्य में होने वाली थी। परंतु इसी मौके पर हिंसाचार, ६ लोगों की बलि और आरोप-प्रत्यारोप की झड़ी, ऐसा सब होने से आगामी बैठकों पर प्रश्नचिह्न लग गया है। राज्य-राज्यों के बीच सीमाई विवाद, उसकी वजह से भड़कनेवाली हिंसा, सीमाई समस्याओं का राजनीतिक लाभ के लिए किया जानेवाला दुरुपयोग यह समस्या हमारे देश में सालों-साल से चल रही है। असल में ये तमाम सीमाई विवाद खत्म करके राज्य-राज्यों के बीच शांति और मैत्रीभाव निर्माण करना केंद्र में सत्तारूढ़ शासकों का कर्तव्य है। परंतु यह कर्तव्य निभाने में केंद्र सरकार नाकाम रही है, ऐसा ही कहना होगा। महाराष्ट्र, कर्नाटक सीमा समस्या को लेकर भी फिलहाल माहौल तनावपूर्ण ही बना हुआ है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री द्वारा आग भड़काना और महाराष्ट्र की मिंधे सरकार की लीपापोती की भूमिका के कारण सीमार्ई क्षेत्र के मराठी बंधु और महाराष्ट्र की मराठी जनता में जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है। यही वहां असम और मेघालय सहित संपूर्ण ईशान्य हिंदुस्थान में भी हो रहा है। बीते कुछ वर्षों में असम राज्य की आक्रामक नीति ईशान्य के सीमाई विवाद के संदर्भ में विवादित साबित हुई है। इसलिए उस राज्य में सीमाई विवाद का हिंसा का प्रकोप बढ़ने के आरोप लग रहे हैं। गत वर्ष असम-मिजोरम सीमा पर दोनों राज्यों की पुलिस के बीच मुठभेड़ हुई थी, उसमें असम पुलिस के ६ जवान मारे गए थे। अब असम-मेघालय सीमा विवाद का हिंसक विस्फोट हुआ और असम के एक वनकर्मी सहित ६ नागरिक मारे गए। असम और मेघालय के बीच के १२ में से ६ विवादित मुद्दों पर आपसी समझौता होने और शेष मुद्दों पर चर्चा का दौर शुरू रहने के बाद भी मंगलवार को रक्तरंजित हिंसा वैâसे हुई? वह हुई या कराई गई? गोलीबारी आवश्यक थी या अनावश्यक? ईशान्य हिंदुस्थान पहले ही अलग-अलग वजहों से अशांत रहा है, उस पर वहां सीमाई विवाद का ‘ज्वालामुखी’ धधकता रहा तो देश की सुरक्षा के नजरिए से अधिक ही घातक साबित होगा। ईशान्य का विकास हमारे शासन के दौरान हुआ। वहां शांति के लिए जितने प्रयास बीते ७-८ वर्षों में किए गए, उतने पहले नहीं हुए, ऐसा दावा केंद्र की वर्तमान सरकार हमेशा करती रही है। असम और मेघालय सीमा पर मंगलवार को हुए हिंसाचार ने इस गुब्बारे में पिन चुभो दी है।

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