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संपादकीय : मूल्य वृद्धि का ‘राक्षस’…जरूरत पूरी हो…

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव संपन्न होने तक ईंधन एवं रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि केंद्र सरकार ने रोक रखी थी और परिणाम घोषित होते ही इस मूल्य वृद्धि का बुलडोजर आम जनता पर बेझिझक चला दिया जाएगा। ऐसी आशंका जताई ही जा रही थी, जो कि अंतत: सही साबित हुई। पेट्रोल और डीजल की मूल्य वृद्धि के साथ घरेलू गैस सिलिंडर भी सीधे ५० रुपए महंगा कर दिया गया। इस दर वृद्धि के कारण पेट्रोल एक बार फिर सौ के पार तो घरेलू गैस सिलिंडर एक हजार के करीब पहुंच गया है। १९ किलो के व्यावसायिक गैस सिलिंडर के लिए लगभग दो हजार रुपए गिनने पड़ेंगे। पांच राज्यों में से चार राज्यों की जनता ने भाजपा की झोली में सत्ता का ‘दान’ दिया। इसकी भरपाई मोदी सरकार ने इस तरह से की है। जनता ने उनकी झोली में खुलकर मतदान किया। उन्होंने जनता की जेब में बचा-खुचा पैसा ईंधन दर वृद्धि करके छीन लिया है। जनता द्वारा किए गए उपकार का बदला उन्होंने महंगाई का ‘गिफ्ट’ देकर किया। मोदी सरकार की यह हमेशा की नीति रही है। चुनाव आए तो ईंधन दर वृद्धि को रोककर रखना, परिणाम घोषित होते ही दर वृद्धि का बुलडोजर अमानवीय ढंग से चला देना। अभी भी इससे अलग नहीं हुआ। पांच राज्यों के चुनाव के दौरान विपक्ष भी इस मुद्दे पर जनता को आगाह कर ही रहा था, परंतु उस समय ‘हिजाब’, ‘पाकिस्तान’, ‘हिंदू-मुसलमान’ ऐसा भावनाओं का माहौल बनाकर मोदी सरकार, भाजपा और अंधभक्तों ने आम जनता के कान और मन को मानो अवरुद्ध कर दिया था। अब चुनाव खत्म होने के बाद मोदी सरकार ने हमेशा की तरह अपना रंग दिखाया है। अर्थात इतना करके भी ६ अक्टूबर, २०२१ के बाद पहली बार गैस की कीमतों में वृद्धि करने की शान बघारेंगे। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत में वृद्धि होने के बाद भी १३७ दिन हमने ईंधन दर वृद्धि को रोककर आम जनता पर एहसान ही किया। ऐसा मखौल भी किया जाएगा। वैसे भी यूपीए सरकार की तुलना में महंगाई को नियंत्रण में रखने में हमारी सरकार सफल ही रही है। ऐसा बतंगड भी केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने पिछले ही महीने राज्यसभा में किया था। अब हमने महंगाई को नियंत्रण में रखा ही है, परंतु रूस-यूक्रेन युद्ध तथा उसकी वजह से वैश्विक बाजार में बढ़ी कच्चे तेल की कीमतों की आग हमारे नियंत्रण में नहीं है, ऐसा कहकर ईंधन दर वृद्धि का पाप केंद्र सरकार रूस और यूक्रेन के माथे मढ़ सकती है। मजा देखो। इस युद्ध के दौरान मोदी सरकार ने रूस से सस्ता ईंधन  कैसे हासिल किया। कूटनीतिक एवं राजनीतिक निपुणता का दीदार कैसे कराया। इस तरह से ‘थालियां’ और ‘तालियां’ भाजपाई लोग और अंधभक्त पहले ही बजा चुके हैं। परंतु उनकी आवाज बंद भी नहीं हुई तभी मोदी सरकार ने पेट्रोल, डीजल और गैस के दाम बढ़ा दिए? वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कमी नहीं आ रही थी। फिर भी मोदी सरकार ने देशांतर्गत पेट्रोल-डीजल की दर को स्थिर रखा था तथा अब रूस से सस्ता ईंधन वगैरह मिला फिर भी जनता पर ईंधन दर वृद्धि का बुलडोजर चला दिया। लोगों को महंगाई के दावानल में धकेल दिया। चुनाव खत्म हो गए, जनता की जरूरत खत्म हो गई। तब कल तक बोतल में बंद करके रखे गए ईंधन दर वृद्धि के ‘राक्षस’ को अब बाहर निकाल दिया गया है। इसे ही मोदी सरकार की कूटनीति कहें क्या? पांच राज्यों के चुनाव के दौरान बंद किए गए जनता के कान और आंखें अब कदाचित झटके से खुलेंगे भी परंतु इसका अब क्या लाभ? ‘मतलब निकल गया तो जरूरत खत्म’ इस कहावत के अनुसार केंद्र के वर्तमान शासक नीति अमल में ला रहे हैं। चुनाव खत्म होने से मतदाता रही जनता की जरूरत भी फिलहाल नहीं रही है। इसलिए ईंधन दर वृद्धि से पहले ही बढ़ी हुई महंगाई के दावानल में तेल डालने का काम किया गया।

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