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संपादकीय: अमेरिका का हत्याकांड!

सामूहिक हत्याकांड की घटना से अमेरिका फिर एक बार लहूलुहान हो गया है। अचानक कोई सिरफिरा भीड़ में घुसता है, अंधाधुंध गोलियां बरसाता है और बंदूक की गोलियां खत्म होने तक बेकसूर लोगों का शरीर छलनी करके हत्याकांड को अंजाम देता है। ऐसी घटनाओं का सिलसिला पिछले कई वर्षों से अमेरिका में शुरू है। एक से बढ़कर एक शक्तिशाली राष्ट्रपति अमेरिका में आए और गए। लेकिन ऐसी गोलीबारी की घटना के बाद लाचार और अप्रत्याशित प्रक्रिया देने से ज्यादा एक भी राष्ट्रपति ठोस कुछ नहीं कर सका। इसलिए अमेरिका में सिरफिरे बेलगाम हो गए और मौत सस्ती हो गई है। अमेरिका के टेक्सास प्रांत के उवाल्डे की गोलीबारी की ताजा घटना ने तो पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। १८ वर्ष का एक सिरफिरा युवक पहले घर में अपनी दादी को गोली मारता है, एके-४७ जैसी एक स्वचलित रायफल व हैंडगन, इस तरह से दो बंदूकें लेकर एक प्राथमिक स्कूल में घुसता है और स्कूल में पढ़नेवाले छोटे बच्चों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाता है। सभी लोग अचंभित और हैरान रह गए! इस गोलीबारी में १९ बच्चे और दो शिक्षकों सहित २१ लोगों की मौत हो गई। अत्यंत क्रूर, नृशंस और हृदयविदारक ऐसे इस हत्याकांड से पूरी दुनिया दहल उठी। महज कुछ ही समय पहले मजाक-मस्ती में रमे मासूम बच्चों ने हमलावर का क्या बिगाड़ा था? राक्षस बनकर आया सिरफिरा ठंडे दिमाग से स्कूली बच्चों पर कुछ ही क्षणों में सैकड़ों गोलियां बरसाता है। यह वैâसी दिमागी विकृति है? हत्याकांड को अंजाम देनेवाले सल्वाडोर नामक हमलावर को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया, परंतु स्कूल के प्रांगण में उसने जो मौत का तांडव मचाया उसे दुर्भाग्य से कोई भी रोक नहीं पाया। इस हत्याकांड के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अमेरिकी बंदूक लॉबी को ही जिम्मेदार ठहराया है। ‘अमेरिका में बंदूक का बाजार बेहद तेजी से बढ़ रहा है। एक राष्ट्र के रूप में हम बंदूक लॉबी के खिलाफ कब खड़े होंगे?’ ऐसा सवाल प्रे. बाइडन ने देशवासियों को संबोधित करते हुए पूछा। यह सत्य है परंतु अमेरिका की शक्तिशाली बंदूक लॉबी से दो-दो हाथ करने का साहस अमेरिका के राष्ट्रपति में भी है क्या? अमेरिका में रायफल का उत्पादन करनेवाली कंपनियों का ‘नेशनल रायफल एसोसिएशन’ नामक शक्तिशाली संगठन है। यह संगठन अमेरिकी राजनीतिज्ञों को चुनाव में अरबों डॉलर का चंदा देता है। इसीलिए आज तक इस तरह के सैकड़ों हत्याकांड होने के बावजूद किसी अमेरिकी सरकार ने इस लॉबी पर कभी बंदूक नहीं तानी। इस वजह से अमेरिका में बंदूक का बाजार फला-फूला। चॉकलेट से भी बंदूक खरीदना अमेरिका में आसान है। इस वजह से वहां गोलीबारी की घटना लगातार घटती है। अमेरिका की जनसंख्या कुल मिलाकर ३३ करोड़ है और देश के नागरिकों के पास बंदूकें व शस्त्र करीब ३९ करोड़ है। अमेरिका में १८ वर्ष से ऊपर किसी भी लड़के-लड़की को रायफल और घातक शस्त्र खरीदने की अनुमति है तथा २१ वर्ष के बच्चों को एक ही समय में असंख्य गोलियां बरसानेवाली हैंडगन रखने की भी आजादी है। बंदूक के साथ प्राणघातक शस्त्रों के खुले बाजार के ही कारण अमेरिका में गोलीबारी और क्रूर हत्याकांड जैसी घटनाएं बारंबार घटती हैं। बीते ५ वर्षों में अमेरिका के १०० स्कूलों में और २०० सार्वजनिक जगहों पर अंधाधुंध गोलीबारी की घटनाएं घटी हैं। हर साल १२ हजार निरपराध लोग गोलीबारी की घटनाओं में मारे जाते हैं। कोई भी ऐरा-गैरा उठता है, स्वयंचलित बंदूक नचाते हुए कहीं भी घुसता है तथा अंधाधुंध गोलीबारी करके निरपराध लोगों की हत्या कर देता है। यह दृश्य अमेरिका जैसे बलशाली देश के लिए निश्चित तौर पर शोभा देने जैसा नहीं है। खिलौने की तरह होनेवाली बंदूकों की खरीद-बिक्री और मोबाइल व कंप्यूटर पर बेझिझक गोलियां बरसाने वाले हिंसक गेम के कारण ही बचपन से अमेरिकी बच्चों में हिंसक प्रवृत्ति बढ़ती है। टेक्सास के स्कूली बच्चों के हत्याकांड से पूरी दुनिया व्याकुल हो गई है। मृत्यु का यह तांडव रोकना है तो वैश्विक महासत्ता का रुतबा रखनेवाले अमेरिका को अपने देश की बंदूक लॉबी का बाजार बंद कराना ही होगा!

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