मुख्यपृष्ठनए समाचारसंपादकीय : माफी मांगो...अन्यथा खुद को ही जूते मारो!

संपादकीय : माफी मांगो…अन्यथा खुद को ही जूते मारो!

राहुल गांधी द्वारा वीर सावरकर का ‘माफीवीर’ के रूप में उल्लेख किया गया। महाराष्ट्र में पहुंची ‘भारत जोड़ो’ यात्रा के दौरान एक पत्रकार परिषद में श्री गांधी ने सावरकर की दया याचिका के दस्तावेज दिखाकर बवाल मोल ले लिया। उस पर महाराष्ट्र की भाजपा व उसके सहयोगी मिंधे गुट स्वाभिमान, अपमान आदि के नाम पर हाय-तौबा मचाने लगे। उसमें से कुछ कुलबुलानेवाले सड़क पर उतर आए। उन्होंने ‘अब शिवसेना क्या करेगी?’ ऐसा पूछकर राहुल गांधी को जूते मारने का उपक्रम शुरू कर दिया। अब ये तमाम जूते खुद के ही हाथ से खुद के ही गाल पर मारने की नौबत इन जूतेबाजों पर आ गई है। महाराष्ट्र के राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी ने एक बार फिर दिमागी दिवालियापन दिखाते हुए शिवराय का अपमान किया है। मराठवाड़ा विद्यापीठ के एक ‘राजनीतिक’ समारोह में राज्यपाल ने शिवराय की तुलना नितीन गडकरी से की। इस विषय को फिलहाल एक तरफ रख दें, परंतु ‘शिवाजी महाराज जूने-पुराने बीती हुई बात हो चुके हैं, छत्रपति गुजरे जमाने के ‘हीरो’ हैं।’ ऐसा बयान देकर महाराष्ट्र की अस्मिता व स्वाभिमान पर पांव रखा जो कि भयंकर ही है। महाराष्ट्र में वीर सावरकर के अपमान का मुद्दा चर्चा में होने के दौरान ही भाजपा व मिंधे गुट के पैर उन्हीं के राज्यपाल की धोती में फंसकर पस्त हो गए हैं। राज्यपाल ने शिवराय का अपमान किया। उसी दौरान भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने महाराष्ट्र के परमपूज्य शिवाजी महाराज का ‘माफीवीर’ के रूप में निंदा की। शिवाजी महाराज ने औरंगजेब को माफी के पांच पत्र भेजे, ऐसा अजीबोगरीब इतिहास कुरेदकर निकाला और महाराष्ट्र के स्वाभिमान पर हमला किया। वीर सावरकर का बचाव करने के दौरान उन्होंने शिवराय को ‘माफीवीर’ कहकर देश के समस्त शिवराय भक्तों की अस्मिता का नाश कर डाला। हैरानी यह है कि वीर सावरकर के माध्यम से हाथ में जूते लेकर सड़क पर उतरनेवाले भाजपा के शूरवीर और मिंधे गुट के नरवीर अब किस बिल में छिप कर बैठ गए हैं? ‘शिवराय ने औरंगजेब को माफी के पांच पत्र भेजे’, इस बयान के बदले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को, महाराष्ट्र के भाजपाई नेताओं को शिवतीर्थ पर आकर माफी मांगनी चाहिए और ऐसी मांग राज्य के मुख्यमंत्री को करनी चाहिए तभी उनका स्वाभिमान या जो कुछ भी है, महाराष्ट्र को दिखाई देगा। महाराष्ट्र के राज्यपाल कोश्यारी ने एक असंवैधानिक, गैरकानूनी सरकार को महाराष्ट्र के सिर पर लाद दिया। उन्होंने राजभवन में पांव रखने के बाद से भारतीय संविधान और शिवराय को अरब सागर में डुबाया है। उनसे शिवराय के गौरव की अपेक्षा क्या करें! शिवाजी महाराज के संदर्भ में गलत बयानबाजी की झड़ी उन्होंने लगाई है। ‘समर्थ रामदास के बिना शिवाजी को कौन पूछता?’ ऐसा बयान पहले देकर इन्हीं राज्यपाल महोदय ने शिवाजी महाराज को कम आंकने का प्रयास किया था। तब भी महाराष्ट्र में संताप का विस्फोट हुआ था। ‘मुंबई से गुजराती-राजस्थानी निकल गए तो मुंबई आर्थिक राजधानी नहीं रहेगी’, ऐसा एक और बयान देकर उन्होंने मुंबई के मेहनतकश, स्वाभिमानी मराठी जनता का अपमान किया था। क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले के संदर्भ में भी राज्यपाल ने ऐसे ही गंदे बयान देकर बवाल मचाया, तब उन्हें माफी मांगनी पड़ी। अब तो उन्होंने सीधे शिवाजी महाराज का उपहास और मजाक उड़ाने की धृष्टता की है। यह दुस्साहस उनके अंदर आया तो महाराष्ट्र में एक मिंधे और गैरकानूनी सरकार को इन्हीं राज्यपाल द्वारा सत्ता में बैठाने की वजह से। छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान होने के बाद भी राज्य के मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री मुंह से निषेध का एक भी शब्द कहने को तैयार नहीं हैं। उस पर निषेध छोड़िए, राज्यपाल की बातों का अलग मतलब निकाला जा रहा है, ऐसी हमेशा की रट राज्य के उपमुख्यमंत्री फडणवीस ने लगाई है। इसके अलावा सुधांशु त्रिवेदी ने जो कुछ कहा है, उनका बयान मैंने ठीक से सुना है। उन्होंने कहीं भी शिवाजी महाराज ने माफी मांगी, ऐसा नहीं कहा, ऐसा कहकर वे मुक्त हो गए। ऐसी लीपा-पोती करने से किया गया पाप ढक जाएगा, ऐसा उपमुख्यमंत्री को लगता है क्या? शिवराय के विचार और मार्गदर्शन अप्रासंगिक हो गए हैं, ऐसा भाजपा के लोग खुलकर बोलते हैं और ऐसा कहनेवाले राज्यपाल महाराष्ट्र को मिलते हैं। यह किस जन्म का पाप महाराष्ट्र की गर्दन पर लादा गया है? शिवराय ने औरंगजेब से माफी मांगी, ऐसा भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता कहते हैं। शिवराय के विचार पुराने हो गए, ऐसा हमारे राज्यपाल बड़बड़ाते हैं तो प्रधानमंत्री मोदी द्वारा नौसेना का नया ध्वज शिवराय को समर्पित करने की वजह क्या है? शिवाजी महाराज ने गुलामी के खिलाफ तलवार उठाई। पहले स्वतंत्र हिंदवी स्वराज्य की स्थापना की, अफजल खान से औरंगजेब तक आक्रांताओं की कब्रें महाराष्ट्र में बनार्इं। उन्हीं शिवाजी महाराज के नाम पर वोट मांगते हो और जरूरत खत्म होते ही उन्हीं शिवराय का अपमान करते हो? भाजपा के एक विधायक संजय कुटे ने अभी घोषित किया, ‘राज्यपाल ने शिवराय के संदर्भ में जो घिनौना बयान दिया है, वह उनकी निजी राय है।’ संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति व्यक्तिगत मत व्यक्त नहीं कर सकता। वो विचार राज्य और राष्ट्र का होता है ये उस कुटे को कोई तो समझाए। अपने पर उल्टा पड़ गया तो व्यक्तिगत मत। फिर राहुल गांधी के विचारों को भी व्यक्तिगत मानो! ऐसे शिवराय द्वेषी राज्यपाल से ‘मिंधे-फडणवीस’ मंडल ने शपथ ली है इसलिए ऐसे राज्यपाल को तुरंत हटाओ, ऐसा कहने का साहस तुममें नहीं है। इस तरह से शिवराय का अपमान करनेवाली पटकथा में महाराष्ट्र भाजपा शामिल है। वीर सावरकर का अपमान हुआ इसलिए पूरी कांग्रेस को और गांधी परिवार को अपराधी ठहरानेवाले शिवराय का अपमान किसी के व्यक्तिगत मत हैं, ऐसा कहते हैं। यह पीठ दिखाना है। ऐसे पीठ दिखाकर भागनेवालों को राज्यपाल की धोती में बांधकर अरब सागर में डुबाना चाहिए, ऐसा महाराष्ट्र की ११ करोड़ जनता का व्यक्तिगत मत है। शिवराय का अपमान करनेवालों को महाराष्ट्र के समक्ष नाक रगड़कर माफी मांगनी ही होगी!

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