मुख्यपृष्ठनए समाचारसंपादकीय : बीन और बेहोशी!

संपादकीय : बीन और बेहोशी!

आसमान छूती पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम करने की मांग आम जनता और विपक्ष हमेशा करता रहता है। लेकिन जिन्हें यह दर वृद्धि रोकनी है, उसे घटाने की मांग सरकार के मंत्री ही करने लगें, तो उसे क्या कहा जाए? जनता हंसे कि रोए? ऐसा समय केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने जनता पर लाया है। वाराणसी में एक कार्यक्रम में पुरी ने पेट्रोलियम कंपनियों से ‘पेट्रोल-डीजल की कीमतें घटाओ’ का आह्वान किया। उसी समय यह भी कहा कि आनेवाले समय में यह दर कम होने की संभावना नहीं है। एक तरफ कहते हैं, ‘कीमतें कम करो’ तो दूसरी तरफ यह भी कहते हैं, ‘नजदीकी भविष्य में यह संभावनाएं नजर नहीं आ रही हैं।’ आम जनता इन दोनों वाक्यों का मतलब क्या और वैâसे निकाले? कीमतें कम करने को कहा इसलिए हंसें या ऐसी कोई संभावना नहीं है कि वास्तविकता व्यक्त की इसलिए रोएं? पेट्रोलियम कंपनियों से विनती की इसलिए राहत लें या उम्मीदों पर पानी फेर दिया इसलिए राहत की सांस ली जाए। महंगाई के बहते जख्म पर फुंकार नहीं मारी जा सकती है तो नमक क्यों छिड़क रहे हो? र्इंधन की दरों में कटौती करने की सरकार की ही इच्छा शक्ति नहीं है। यह जनता अब समझ चुकी है। इसलिए बेवजह उम्मीदों का गुब्बारा आसमान में क्यों छोड़ रहे हैं? वैसे भी यह अधिकार कंपनियों का है, ऐसा कहकर पीछा छुड़ाने की दोहरी भूमिका क्यों अपना रहे हैं? र्इंधन की दरों को लेकर पेट्रोलियम कंपनियों की तरफ उंगली दिखाएंगे तो बतौर सरकार आपका क्या अधिकार है? यह दर वृद्धि और महंगाई कम होगी, इस भ्रम में जनता बिल्कुल भी नहीं है। इसलिए इस भ्रम का कद्दू जनता को दिखाने का उद्योग मत करो। हाल में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘सरकार की महंगाई पर कड़ी नजर है’ यह कहकर दिखा दिया कि महंगाई के मामले में केंद्र सरकार कितनी ‘गंभीर’ है? उनकी इस कड़ी नजर से महंगाई थर-थर कांपी ही नहीं, इसके विपरीत अधिक ढिठाई से आज भी सरकार और जनता के सामने खड़ी है। अब पेट्रोलियम मंत्री ने भी ईंधन दर के मामले में हवा में तलवारबाजी ही की है। मोदी सरकार देश की अब तक की सबसे मजबूत सरकार आदि है, आप ही कहते रहते हैं तो ईंधन की कीमतों में कटौती को लेकर पेट्रोलियम कंपनियों पर उंगली क्यों उठा रहे हैं? बतौर सरकार दीजिए झटका इन कंपनियों को। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें स्थिर हैं, आपका घाटा भी कवर हो गया है, फिर भी  ईंधन के दाम क्यों नहीं घटा रहे? इस तरह से डांट लगाइए और ईंधन के दाम घटाने के लिए विवश करिए। जनता को सीधे-सीधे राहत दीजिए। इसके बजाय शब्दों के बुलबुले क्यों उड़ा रहे हैं? यानी, पेट्रोलियम मंत्री भी क्या करेंगी? वह जिस सरकार में हैं, वह ‘बनावट’ और ‘जुमलेबाजी’ के अलावा दूसरा क्या कर रही है? महंगाई हो या प्रति व्यक्ति आय वृद्धि, किसान हो या बेरोजगार, गरीब हो या मध्यम वर्ग, आर्थिक हो या रक्षा नीति, पिछले आठ वर्षों से देश में, हवा में तलवारबाजी और जुमलेबाजी ही चल रही है। फिर पेट्रोलियम मंत्री पुरी को र्इंधन की कीमतों में कमी की ‘बीन’ बजाकर जनता को ‘बेहोश’ करने की कोशिश के लिए दोष क्यों दिया जाए? खैर, जनता इस ‘बीन’ पर नहीं झूमेगी क्योंकि यह ‘आस्था’ नहीं, मोदी सरकार की हमेशा की ‘जुमलेबाजी’ है, यह जनता भी जान गई है। र्इंधन दर वृद्धि और महंगाई लोगों के जीवन और मृत्यु का मसला है। इसे लेकर बेवजह पतंगबाजी न करो। नहीं तो जनता कब आपकी सरकार की ‘कटी पतंग’ कर देगी, ये आप भी नहीं समझ पाएंगे!

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