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संपादकीय : ‘मुख्य न्यायाधीश’ गोगावले!

कोर्ट में तारीख पर तारीख पर मैं ध्यान नहीं दे सका। इस तरह का अफसोस मुख्य न्यायाधीश रमन्ना ने सेवानिवृत्त होते हुए व्यक्त किया। यह अफसोस देश की करोड़ों जनता को भी है। लेकिन महाराष्ट्र की बेईमान सरकार के भविष्य को लेकर पिछले कई महीने से चल रहा तारीखों का पेच, समय बर्बाद करने की नीति शुरू है, उस पर बेईमान शिंदे गुट के विधायक भरत गोगावले ने प्रकाश डाला है। इस बागी विधायक ने छाती ठोककर कहा कि ‘विधायकों की अयोग्यता के मामले में सर्वोच्च न्यायालय में अगले पांच वर्षों तक पैâसला नहीं आएगा। तारीख पर तारीख की व्यवस्था हो गई है। फिर चुनाव होंगे और हम ही विधायक होंगे’, इस तरह का आत्मविश्वास गोगावले जैसे विधायक ने व्यक्त किया, जिसने न्याय व्यवस्था पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। सत्य और न्याय संविधान अथवा कानून से नहीं मिलता तो उसके लिए खोकेबाजी करनी पड़ती है और वही खोकेबाजी बागी गुट के पीछे रहनेवाली महाशक्ति द्वारा किए जाने का शब्द विस्फोट गोगावले नामक विधायक ने किया। ये महाशय आगे कहते हैं, ‘कुछ भी हो जाए फिर भी धनुष्य बाण बागियों को मिलेगा!’ इसका दूसरा अर्थ क्या? सर्वोच्च न्यायालय की तरह चुनाव आयोग भी महाशक्ति की जेब में है तो हमें ‘धनुष-बाण’ दिला ही देगा, इसका यही अर्थ है। यह हराम का माल गड़पने का तरीका है। इसीलिए हम भाजपा को चोर बाजार की उपमा दे रहे हैं। हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना को तोड़ने के लिए बागी विधायकों को न केवल खोके दिए गए, बल्कि चोर बाजार का मामला सर्वोच्च न्यायालय में गया, फिर भी न्याय का तराजू आप की तरफ झुकेगा और चुनाव आयोग सहित आपके पक्ष में निर्णय दिलाएंगे, ऐसा पक्का आश्वासन भी खोके के साथ दिया गया होगा। इसके बाद विधायकों की आवाज बढ़ गई, यह सत्य है। बागी गुट के विधायकों ने इस पर मुंह खोलने की शुरुआत की, जिसके कारण महाशक्ति का असली चेहरा सामने आ गया। अब इस पर सफाई देने के लिए बागी गुट के प्रवक्ता सामने आए। वो क्या कहते हैं कि यह बयान अनजाने में दिया गया था। वैâसे आई असावधानी? सूरत, गुवाहाटी और गोवा तक के पर्यटन में महाशक्ति ने उनके सिर में जो भुनाया, वही उनके पेट से होठों पर आया है। देश की सभी स्वायत्त संस्थाएं किसकी जेब में और दबाव में काम कर रही हैं और इस स्वायत्त आदि कहलानेवाली संस्था को दिल्ली के बादशाह की कठपुतली बनाकर वैâसे नचाया जा रहा है, यही श्रीमान गोगावले ‘सत्यवादी’ ने अनजाने में कहा। महाराष्ट्र में एक गैरकानूनी सरकार को महाशक्ति ने बैठाया है। मुख्य शिवसेना से एक गुट बाहर निकला, उसने पार्टी आदेश की अवहेलना की। पार्टी विरोधी गतिविधियां की। संविधान के १०वें शेड्यूल के अनुसार यह बागी गुट तुरंत अयोग्य होगा और राज्य की गैरकानूनी सरकार गिर जाएगी, ऐसी स्थिति है। लेकिन तारीख पर तारीख के खेल में सरकार चलाई जा रही है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई करने के लिए बड़े संवैधानिक पीठ की स्थापना की। वह संवैधानिक पीठ तो इस गैरकानूनी सरकार पर पैâसला दे? लेकिन निर्णय दिया है वह बागी गुट के विधायकों ने। सर्वोच्च न्यायालय को महाशक्ति की ओर से कौन-सी सूचना दी गई है, यह गोगावले ने स्पष्ट कर दिया, उस ‘सत्यव्रत’ का कोर्ट की बार काउंसिल द्वारा सम्मान किया जाना चाहिए। इस न्याय व्यवस्था में असल में क्या चल रहा है? बेचारा चुनाव आयोग भी बेबस है। इसलिए श्रीमान सत्यवादी गोगावले के बयान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। न्यायालयीन व्यवस्था पर से नागरिकों का विश्वास कम हो गया तो लोकतंत्र का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। ऐसा भी न्यायाधीश रमन्ना ने जाते-जाते कहा। स्वयंघोषित ‘मुख्य न्यायाधीश’ गोगावले के खुलासे के बाद महाराष्ट्र की गैरकानूनी सरकार की सुनवाई के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय को अधिक जागरूक रहना होगा। क्योंकि महाराष्ट्र के भविष्य पर न्याय और सुनवाई जैसे पहले ही हो गई है और वैसा निर्णय पत्र बागी गुट के हाथों में है। इस तरीके से उनके लोग खुलेआम बोल रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय की संवैधानिक पीठ को अब तो पैâसला करना चाहिए कि महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य में एक गैरकानूनी सरकार न चले। सब कुछ आपके मन माफिक होगा, आप कहेंगे, वैसा करेंगे, यह वचन देने के बाद ही बागी विधायक टूटे। अब तो ये बेईमान लोग शिवसेना का दशहरा सम्मेलन आयोजित करने की भाषा बोलने लगे हैं। महाराष्ट्र की ५६ वर्ष की सांस्कृतिक परंपरा को तोड़कर ये ‘खोके हराम’ हमारी ही शिवसेना असली है, यह कहकर शिवसेनाप्रमुख की परंपरा को तोड़ना चाहते हैं और इसके लिए उन्हें महाशक्ति सहयोग कर रही है। ‘दशहरा सम्मेलन के मामले में मुख्यमंत्री शिंदे निर्णय लेंगे’, यह बोलते हुए उनकी जुबान क्यों नहीं झड़ गई? शिवसेना के बारे में विवाद निर्माण करना, मेंढकों को भगवा रंग चढ़ाकर उन्हें बैल जैसे पुâलाना; लेकिन आखिर में बैल क्या और मेंढक क्या, ज्यादा ताना गया तो टूटेंगे और फटेंगे ही! सर्वोच्च न्यायालय, चुनाव आयोग हमारी जेब में है इसलिए हम ही जीतेंगे, ऐसा कहनेवाले कल जनता के रोष के आगे उड़ जाएंगे। दिल्ली की महाशक्ति और खोके पर आपकी सरकार भले ही आई होगी लेकिन न्यायालय में ऐसा कुछ चलता है, इस भ्रम से गैरकानूनी सरकार जल्द बाहर आ जाएगी। आज भी सर्वोच्च न्यायालय में रामशास्त्री बैठे हैं। ये खोके हराम ध्यान में रखें। बागी गुट के ‘भरत’ का जितना आभार माना जाए, उतना कम है। दिल्ली की महाशक्ति की पादुका महाराष्ट्र के सिंहासन पर रखकर उनका राज शुरू है, इसे कहते हैं स्वाभिमान की ऐसी की तैसी!

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