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संपादकीय : कोरोना की आफत

महाराष्ट्र सहित देशभर में शीत लहर बढ़ने के साथ ही कोरोना संकट एक बार फिर सिर उठाने लगा है। तापमान में गिरावट होने के कारण देशभर में कोविड के वायरस के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हो गया है। उसमें कोविड-१९ वायरस के नए वैरिएंट जेएन-१ ने अपने देश में भी तेजी से हाथ-पैर पैâलाना शुरू कर दिया है। देश में हर घंटे औसतन २९ लोग कोरोना से संक्रमित हो रहे हैं। कोरोना के मरीजों की यह वृद्धि दर चिंताजनक है। लेकिन राज्य सरकार सहित केंद्र सरकार और सत्तारूढ़ दल को चुनावी ज्वर ने जकड़ लिया है। सरकार पक्ष के हर समय ‘जोड़-तोड़ तांबा-पीतल’ के धंधे में रमे होने के कारण प्रशासनिक स्तर पर भी सब कुछ आनंद ही आनंद है। दिल्ली से लेकर गल्ली तक सत्तारूढ़ दल के सभी नेता जिस तरह २४ घंटे चुनावी मोड में हैं, उसे देखते हुए इन नेताओं को तेजी से पैâल रहे कोविड के नए संकट पर ध्यान देने की फुर्सत ही कहां है? कहने को तो एक सप्ताह पहले ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना के बढ़ते मरीजों को देखते हुए सतर्क रहने की चेतावनी दी थी। लेकिन इस औपचारिकता के अलावा सरकार तेजी से पैâल रहे संक्रमण को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाते नहीं दिख रही है। नए कोविड वायरस जेएन-१ ने देश के कई राज्यों में कहर मचा दिया है। देशभर में गुरुवार को एक ही दिन में इस वायरस के ७९७ नए मरीज मिले और पिछले २४ घंटे में कोरोना से छह लोगों की मौत हो गई। इनमें से २ लोगों की केरल में, जबकि महाराष्ट्र, तमिलनाडु, प. बंगाल और पुडुचेरी में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई। दिसंबर के पहले सप्ताह में देश में कोरोना मरीजों की संख्या काफी कम होकर दहाई अंक में पहुंच गई, लेकिन पिछले २० दिनों में सक्रिय हुए नए कोविड वायरस के कारण कोरोना का प्रसार तेजी से होने लगा। एक सप्ताह पहले कोरोना मरीजों की संख्या में अचानक उछाल आया। २१ दिसंबर को एक ही दिन में ५९४ नए मरीज सामने आए और सक्रिय कोरोना मरीजों की संख्या २ हजार ३११ तक जा पहुंची। पिछले सप्ताह में कोरोना का यह संक्रमण दोगुना हो गया है और देश में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या ४ हजार ९१ दर्ज की गई। उसी बीच कोविड के नए वैरिएंट जेएन-१ के आतंक मचाने से स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की नींद उड़ गई है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग अपील कर रहा है कि नया वैरिएंट जानलेवा और खतरनाक नहीं है इसलिए जनता घबराए नहीं, फिर भी गुरुवार को एक ही दिन में हुई ६ मौतें निश्चित रूप से जनता को चिंतित करने वाली हैं। अकेले केरल में नए वैरिएंट जेएन-१ के ७८ मरीज पाए गए हैं। इसके बाद गुजरात में ३४, गोवा में १८, कर्नाटक में ८ और महाराष्ट्र में ७ मरीज मिले। राजस्थान में ५, तमिलनाडु में ४, तेलंगाना में २ और दिल्ली में इस नए वैरिएंट जेएन-१ का एक मरीज पाया गया है। देश के हर राज्य में सर्दी, फ्लू, खांसी और बुखार पैâला हुआ है। जांच कराने पर कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आएगी, इस भय के कारण अधिकांश लोगों द्वारा जांच ही न कराए जाने से इन दिनों सामने आए कोरोना मरीजों के आंकड़े गलत हो सकते हैं, इसकी संभावना ज्यादा है। सच तो यह है कि जांच कराए बिना रिपोर्ट न किए गए कोविड के कितने मरीज देश में सक्रिय हैं और उनके जरिए कोरोना का यह संकट कितना पैâलेगा यह कहना मुश्किल है। २०२० में आया कोरोना का भयानक संकट पूरे देश में करीब दो साल तक तांडव मचाता रहा। देशभर में कोरोना से ५ लाख ३० हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। शुरुआती दौर में नजरअंदाज किए जाने और लोगों की सुरक्षा से ज्यादा राजनीति और चुनावी सभाओं को महत्व दिए जाने से कोरोना का संक्रमण तेजी से बढ़ा। अब भी वही हो रहा है। ‘जेएन-१’ के नए वैरिएंट के रूप में कोरोना की आफत एक बार फिर पीछे पड़ गई है और माई-बाप सरकार चुनाव प्रबंधन में मशगूल है। कोरोना की बढ़ती रफ्तार से ज्यादा सरकार को सत्ता की फिक्र है। गांव-गांव में प्रधानमंत्री की तस्वीर को घुमाते हुए प्रचार यात्रा शुरू है। कोविड का प्रभावी वायरस संक्रमण बढ़ा रहा है और उसके सामने निष्प्रभ दिखने वाली सरकार सिर्फ और सिर्फ चुनाव के कार्य में रमी हुई है। यह ‘कोरोना जोर में और सरकार कोमा में’ वाली स्थिति है। क्या कोविड के नए संकट से जनता को बचाने वाला कोई रखवाला है?

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