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संपादकीय : कोरोना का हाहाकार: चीन की खुली पोल

चीन ने दुनिया की गर्दन पर कोरोना का भूत बिठा दिया, लेकिन यही कोरोना महामारी किसी पीड़ित दैत्य की तरह चीन के पीछे पड़ गई है। पिछले डेढ़-दो महीनों से चीन में कोरोना की बीमारी ने फिर से हाहाकार मचा रखा है। फिर चीनी सरकार ने हमेशा की तरह मामला छुपाया। संयुक्त राष्ट्र संघ और विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से मांग करने के बावजूद चीन ने पूरी दुनिया को भनक न लग सके, इसका पुरजोर प्रयास किया। लेकिन अब चीन में कोरोना महामारी का ‘भंडा’ फूट गया है। खुलासा हुआ है कि ८ दिसंबर, २०२२ से १२ जनवरी, २०२३ तक सिर्फ एक महीने में ही चीन में कोरोना ने ६० हजार से ज्यादा लोगों की जान ले ली है। यह जानकारी खुद चीन के स्वास्थ्य विभाग ने दी है। वहां के नेशनल हेल्थ कमीशन के अधीन ब्यूरो ऑफ मेडिकल एडमिनिस्ट्रेशन के प्रमुख जिओ याहुई ने पत्रकार परिषद में इसका विवरण घोषित किया। यह संख्या उनकी है, जिनकी अस्पतालों में मौत हुई है। यानी यह आंकड़ा और कहीं ज्यादा होता। असल में दो महीने पहले जब चीन में फिर से कोरोना का विस्फोट होने की खबर प्रसारित हुई, तभी से मांग की जा रही है कि चीन दुनिया को असली और सटीक जानकारी दे। लेकिन हमेशा की तरह चीन ने इसको नजरअंदाज किया। जब सबसे पहले कोरोना का विस्फोट हुआ तब भी चीनी शासक इसी तरह चुप्पी साधे हुए थे। इसलिए कोरोना महामारी का अंदाजा विश्व को देर से लगा और उसके बाद इस महामारी ने २ वर्ष तक पूरी दुनिया को जकड़े रखा। करोड़ों लोगों की जान चली गई। उससे भी ज्यादा कई लोगों ने कोरोना बीमारी का भयानक अनुभव किया। इस पृष्ठभूमि पर वर्ष २०२२ कुछ सुकून देनेवाला और उम्मीद भरा था। लेकिन उसके जाते-जाते चीन में कोरोना विस्फोट की खबर ने वर्ष २०२३ का सूर्योदय कोरोना के साए में होगा क्या, ऐसी अनजान चिंता फैल गई। अकेले चीन में इस दौरान चार करोड़ लोग कोरोना से संक्रमित हुए, ऐसी खबरें प्रसारित हुईं। स्वाभाविक रूप से इस मामले में वह देश खुलासा करे, ऐसी मांग हो रही थी। उस पर डेढ़ महीने तक खामोश रहनेवाले चीन ने आखिरकार अपना मुंह खोल दिया है और कबूल किया है कि सिर्फ एक महीने में कोरोना से ६० हजार लोगों की मौत हुई है। यह आंकड़ा आधिकारिक है, फिर भी वह चीन है। वह देश कितना सच बोलता है और कितना झूठा, यह कभी समझ में नहीं आता। चीन के वुहान में कोरोना वायरस की उत्पत्ति हुई और उसके बाद दुनियाभर में हुए उसके फैलाव के मामले में चीन आज भी चुप्पी साधे हुए है। अब भी उसने वही किया। हालांकि, चीन के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कबूल किया है कि पिछले ३० दिनों में ६० हजार लोगों की मौत कोरोना के कारण हुई है। इतना ही नहीं, बल्कि चीन के पेकिंग यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए शोध के अनुसार वहां की तकरीबन ६४ प्रतिशत जनसंख्या कोरोना महामारी की चपेट में है। यह लहर अगले दो महीनों तक जारी रहेगी, यह भी चिंता व्यक्त की जा रही है। करीब दो महीने बाद चीन ने वहां के कोरोना हाहाकार को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ी और कोरोना मरीजों, मौत के आंकड़ों की घोषणा की। यानी यह आधिकारिक जानकारी कितनी सच है? यह भी प्रश्न है। क्योंकि वह चीन है। कोरोना से होनेवाली मौतों की संख्या, अस्पतालों में बिस्तर, दवा, ऑक्सीजन की कमी, श्मशान भूमि में पड़ी लाशों के ढेर, होटलों को श्मशानभूमि बनाना जैसा वक्त चीनी महासत्ता पर आया है, इससे दुनिया पर राज करने की इच्छा रखनेवाले चीनी ड्रैगन की लाचार स्थिति सामने आई है। यह अच्छा हुआ। कोरोना के उत्पात मामले में देर से ही सही, चीन ने मुंह खोला तो सही, लेकिन इससे उसकी पोल खुल गई है!

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