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संपादकीय : छ‘दाम’ शास्त्रियों का निर्णय पत्र

विधानसभा अध्यक्ष को किस तरह से व्यवहार नहीं करना चाहिए यह कल महाराष्ट्र में दिखाई दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने विधानसभा अध्यक्ष को ‘ट्रिब्यूनल’ यानी न्याय दान करनेवाले मध्यस्थ की भूमिका निभाने को कहा। लेकिन मि. ट्रिब्यूनल राहुल नार्वेकर सीधे शिंदे समूह के वकील की भूमिका में आ गए। श्री. नार्वेकर के तथाकथित नतीजे का पूरे देश में मजाक उड़ाया जा रहा है। जो महाराष्ट्र रामशास्त्री प्रभुणे की परंपरा की गाथा सुनाता है उस महाराष्ट्र में ऐसे छ‘दाम’ शास्त्री पैदा हों और वह महाराष्ट्र के स्वाभिमान की हत्या कर दें इससे ज्यादा और दुर्भाग्यपूर्ण क्या हो सकता है। पार्टी के संविधान नेतृत्व और विधानमंडल में बहुमत का अध्ययन करने के बाद एकनाथ शिंदे गुट को मैं असली शिवसेना के रूप में मान्यता देता हूं, इस तरह का फुफकार छ‘दाम’ शास्त्री ने छोड़ा। यह महाराष्ट्र के स्वाभिमान पर डंक है। एकनाथ शिंदे के गुट को असली शिवसेना के तौर पर मान्यता देना यानी विधान भवन के दरवाजे पर पट्टेधारी दरबान द्वारा ​​विधानसभा अध्यक्ष को ही उनके दालान से बाहर निकालने जैसा है। मूलरूप से ‘ट्रिब्यूनल’ द्वारा पढ़ा गया निर्णय पत्र कलाबाजियां हैं। इन कलाबाजियों से महाराष्ट्र की जनता में प्रचंड गुस्से का लावा फूटकर बाहर निकल रहा है। देश की सर्वोच्च अदालत की अवहेलना कर इस तरह से बंदरों की तरह कलाबाजियां करना यही तानाशाही है। इसी तानाशाही के खिलाफ देश में माहौल तैयार हो रहा है। विधानसभा अध्यक्ष ने मुख्य न्यायाधीश के निर्देशों की अनदेखी कर महाराष्ट्र के घाती विधायकों के संबंध में जो पैâसला दिया है, उसे जनता स्वीकार नहीं करेगी। चार दल बदलने के बाद पीठासीन अधिकारी के पद पर बैठा व्यक्ति मुख्य न्यायाधीश के निर्देशों की अनदेखी नहीं कर सकता, लेकिन मोदी युग में संवैधानिक पद पर बैठा एक भी व्यक्ति नैतिकता की लाज रखने के लिए तैयार नहीं। विधानसभा अध्यक्ष द्वारा शिंदे गुट के गोगावले को ‘व्हिप’ के रूप में मान्यता देना अवैध था। मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि विधानसभा अध्यक्ष ने यह निर्णय बिना यह जांचे लिया कि किसका पक्ष सही है, लेकिन जो लोग दल बदलकर ‘पीठासीन’ थे, उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया। महाराष्ट्र की धरती पर एक अनधिकृत सरकार खड़ी है, जिसे अधिकृत बनाने का काम आखिरकार विधानसभा अध्यक्ष ने किया। घाती शिंदे की नियुक्ति उन्होंने करीब-करीब शिवसेनाप्रमुख पद के तौर पर किए जाने की बेशर्म घोषणा परिणाम पत्र में की। यह महाराष्ट्र की मिट्टी की पवित्रता को नष्ट करने का तरीका है। चुनाव आयोग और नतीजे देनेवालों के पुरखों से पूछकर शिवसेना की स्थापना श्री बालासाहेब ठाकरे ने नहीं की थी। उन्होंने प्रबोधनकार ठाकरे से विचार, संघर्ष और स्वाभिमान विरासत में लेकर शिवसेना बनाई। शिवसेना एक आंदोलन की चिंगारी थी। उसी चिंगारी ने आगे विचारों की मशाल को प्रज्वलित कर दिया। यह चिंगारी मिंधे गुट के बदबू पैâलाने वालों के खोखों से पैदा नहीं हुई। महाराष्ट्र की अस्मिता के लिए लड़ना इस पार्टी का संविधान है और अन्याय, पाखंड को लात मारना यही आचार संहिता, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने यह बहाना बनाकर कि शिवसेना के संविधान में खामियां हैं, शिवसेना मुख्यमंत्री के खोखे बाज गुट को सौंप दिया। महाराष्ट्र की कवच-कुंडल शिवसेना को खोखेवालों के तराजू में डालना यह संयुक्त महाराष्ट्र संघर्ष के १०६ मराठी शहीदों और सीमा विवाद के लिए अपना बलिदान देनेवाले ६९ शिवसैनिक शहीदों का अपमान है। राहुल नार्वेकर के पैâसले के बाद मुख्यमंत्री शिंदे का कहना है, ‘यह वंशवाद की हार है।’ ऐसा कहते हुए उन्हें अपने वंशवाद की ओर उंगली दिखानी चाहिए। उन्हें यह घोषणा करनी चाहिए कि अचानक सांसद बने श्रीकांत शिंदे उनके बेटे नहीं हैं तभी वंशवाद की आलोचना करनी चाहिए। मुख्यमंत्री के चिरंजीव श्रीकांत शिंदे दो बार उद्धव ठाकरे द्वारा दी गई उम्मीदवारी पर सांसद बने। गंगाधर फडणवीस का देवेंद्र फडणवीस से कुछ खास नाता है, ऐसा कहा जाता है। जय शाह यह महान क्रिकेट खिलाड़ी अमित शाह के रिश्ते में कुछ तो लगते हैं। कुछ लोग कहते हैं कि रमाकांत आचरेकर, डॉन ब्रैडमैन, गैरी सोबर्स आदि ने क्रिकेट की शिक्षा चि. जय शाह से ली है। ऐसे में भारतीय क्रिकेट को बचाने की जिम्मेदारी उन पर आ गई। पीयूष गोयल और वेद प्रकाश गोयल के बीच भी कुछ संबंध होने का संदेह है। नरोबा तातु राणे और नित्या नारू राणे भी एक ही घर में रहते हैं। महाराष्ट्र में विखेपाटील, मुंडे परिवार, लातूर में निलंगेकर जैसे कई परिवारों के भाजपा से संबंधों की जांच करवानी पड़ेगी। डॉ. प्रकाश आंबेडकर बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों और विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। कल शिंदे आंबेडकर के वंशवाद पर भी अपना अनर्गल प्रलाप करेंगे। जिसके परिवार में विचार होता है, वह विचारों के वंश को आगे बढ़ाता है। शिंदे जैसे घराने के लोग दलाली और धोखेबाजी की विरासत आगे बढ़ाते हैं। महाराष्ट्र की विचार और संस्कृति की विरासत महान है। जो लोग उन विचारों से संबंधित नहीं हैं वे महाराष्ट्र के शासक हैं। छत्रपति शिवाजी के उत्तराधिकारी उदयन राजे भाजपा के घर में हैं। क्या शिंदे इसे भी वंशवाद कहेंगे? मुख्यमंत्री और उनका मिंधे गुट आज उन्माद के नशे में है। वे वंशवाद की बात तो करते हैं, लेकिन गले में गुलामी का पट्टा बांधकर असंगत रूप से प्रलाप करते हैं। उनका उन्माद ज्यादा देर तक नहीं टिकेगा। महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर यानी ‘ट्रिब्यूनल’ द्वारा दिया गया पैâसला अंतिम नहीं है। उससे भी ऊपर है सर्वोच्च न्यायालय और जनता की अदालत। निर्णय वहीं होगा और धोखेबाजों के घराने हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगे! वह समय दूर नहीं। महाराष्ट्र राम शास्त्रियों का है छ‘दाम’ शास्त्रियों का नहीं!

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