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संपादकीय : बिजली दरवृद्धि के चटके

लोकसभा चुनाव के मौके पर केंद्र और राज्य के सत्ताधारी आश्वासन के रंग-बिरंगे गुब्बारे आसमान में छोड़ रहे हैं। विकास कार्यों के खोखले ढोल बजाए जा रहे हैं। पिछले १० वर्षों में अन्य क्षेत्रों की तरह ऊर्जा क्षेत्र में भी देश ने किस तरह क्रांति की, इसका भी प्रमाण यह मंडली दे रही है। तो फिर ऐन लोकसभा चुनाव के मुहाने पर आम जनता को बिजली दर वृद्धि का शॉक देने की नौबत क्यों आई? इस प्रश्न पर इस मंडली के दांत क्यों बैठ गए हैं? फिर यह वृद्धि एक अप्रैल से लागू भी कर दी गई है। इतनी जल्दबाजी में बिजली दर वृद्धि का भार महाराष्ट्र की जनता के सिर पर लादने की ऐसी कौन सी ‘इमरजेंसी’ राज्य की घाती सरकार पर आ गई? बिजली नियामक आयोग ने दरवृद्धि को मंजूरी दी और राज्य सरकार तुरंत ‘महावितरण’ को निर्देश देकर मुक्त हो गई। इसके चलते घरेलू बिजली ग्राहकों पर हर माह १० से ६५ रुपए बिजली बिल का बोझ बढ़ेगा। किसानों के लिए यह दरवृद्धि २० से ३० पैसे प्रति यूनिट होगी। व्यावसायिक, औद्योगिक बिजली ग्राहक, अस्पतालों को भी इस दरवृद्धि का झटका लगनेवाला है। सड़कों पर स्ट्रीटलाइट के लिए अब १२९ रुपए के बदले १४२ रुपए वसूले जाएंगे। ऐसे में स्पष्ट है कि इसका परिणाम स्थानीय स्वराज्य संस्था की करवृद्धि में होगा। मतलब घरेलू बिजली उपयोग सहित सभी क्षेत्रों में इस दरवृद्धि का झटका बैठनेवाला है और आम आदमी, जो पहले से ही महंगाई की भयंकर आग में झुलस रहा है, इस बिजली दरवृद्धि से पूरी तरह भुन जाएगा। घाती सरकार ने इस दरवृद्धि का मुहूर्त भी निकाला तो एक अप्रैल का। इस बार मार्च से ही गर्मी का पारा बढ़ा हुआ है। इससे बिजली का उपयोग भी बढ़ा है। उस पर अप्रैल और मई महीने में भीषण गर्मी का सामना लोगों को करना पड़ेगा, ऐसी चेतावनी मौसम विभाग ने दी है। मतलब आम आदमी के पास दरवृद्धि का भार सहने और बिजली का अधिक उपयोग करने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं बचा है। र्इंधन खरीदी के लिए अधिक खर्च होने के कारण बिजली दरवृद्धि करने के अलावा कोई पर्याय नहीं था, ऐसा तर्क सरकार और महावितरण दे रही है। प्रश्न इतना ही है कि ऐन गर्मी के समय इस दरवृद्धि का चटका जनता को देने के लिए आपको इतनी ‘इमरजेंसी’ क्यों थी? गर्मियों में वैसे भी सभी जीवनावश्यक वस्तुओं, सब्जियों, फलों के दाम बढ़ जाते हैं। अन्य खर्च भी ब़ढ़ जाते हैं, उस पर बिजली दरवृद्धि का बोझ आम जनता के माथे पर मढ़कर आपको कौन सा आनंद मिल गया? फिर बढ़े हुए स्थिर आकार में र्इंधन अधिभार जोड़ा गया तो यह दरवृद्धि १० प्रतिशत तक हो जाएगी। एक तरफ मोदी सरकार ने आम लोगों का जीवन वैâसे सहज आदि बनाया है, ऐसी बातें करना और दूसरी तरफ ऐन गर्मी के मौसम में बिजली दरवृद्धि का शॉक देकर उनके जीवन को ‘असहज’ करना। केंद्र से लेकर महाराष्ट्र तक इनकी यही नौटंकी और जुमलेबाजी शुरू है। प्रधानमंत्री मोदी तो अब उनकी प्रत्येक जनसभा में ‘प्रधानमंत्री सूर्योदय योजना’ के गीत गा रहे हैं। देश के गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार के लिए यह योजना वैâसे क्रांतिकारी है, उससे आम लोगों के बिजली का बिल वैâसे शून्य होगा, ऐसे सपने दिखा रहे हैं। बिजली का बिल शून्य होना होगा तब होगा, लेकिन फिलहाल आपने आम लोगों के मासिक खर्च में दो शून्य बढ़ा दिए हैं, इस वास्तविकता का क्या? दिल्ली में ‘आप’ सरकार द्वारा बिजली दरवृद्धि पर हंगामा मचानेवाली भाजपा महाराष्ट्र में अपनी ही सरकार द्वारा की गई बिजली दरवृद्धि पर मुंह में दही जमाए क्यों बैठी है? लोकसभा चुनाव की हड़बड़ी में बिजली दरवृद्धि का ‘शॉक’ जनता को महसूस नहीं होगा, ऐसा अगर सत्ताधारियों को लगता है तो वे ‘नंदनवन’ में जी रहे हैं। यदि बिजली दरवृद्धि का चटका जनता को लगेगा तो इसका ‘फटका’ चुनाव में सरकार को लगेगा। आज आपने जनता को आग में धकेला है, लेकिन कल भट्ठी में आप गिरनेवाले हो!

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