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संपादकीय : ज्वाला और फूल! साईबाबा, सावधान!!

अपने राज्य में फिलहाल हिंदुत्व के नाम पर बहुत मजाक-मस्ती चल रही है और इसे लेकर देव और संतों के दरबार में राडा किया जा रहा है। सर्वधर्मीय संत व आस्था के पीठ माने जानेवाले साईबाबा की शिर्डी में हार, फूल, नारियल आदि पर लगी पाबंदी हटने को तैयार नहीं है। शिर्डी में भक्त हार-फूल, नारियल आदि न ले जाएं, यह फतवा हटाने के लिए महाराष्ट्र के नकली हिंदुत्ववादियों की सरकार तैयार नहीं है। कोरोना काल में मोदी सरकार के ही आदेश से मंदिर बंद रहे। भगवान कैद  में थे। मंदिर बंदी का फतवा केंद्र  सरकार का, लेकिन महाराष्ट्र के भाजपावाले ‘ठाकरे’ सरकार के खिलाफ ‘घंटानाद’ आंदोलन कर रहे थे। मंदिर खोलो कहकर छाती पीट रहे थे, लेकिन भाइयों, ‘सब कुछ बंद’ का फतवा आपके ही मोदी सरकार का था न? ठीक, कोरोना प्रतिबंध शिथिल करने के बाद राज्य के मंदिर खोलने के बाद भी प्रशासन ने संक्रमण न हो, इस वजह से हार, फूल , नारियल, प्रसाद आदि ले जाने पर पाबंदी बरकरार रखी थी। आगे इसे हटा दिया, परंतु शिर्डी के साईबाबा को सिर्फ  हार, फूल , प्रसाद से आज तक वंचित रखा है। कहते हैं कि यह फैसला  मंदिर प्रशासन का है। लेकिन क्या भाई, ये मंदिर प्रशासन जामा मस्जिद के इमाम ने नियुक्त किया है अथवा रोम के मुख्य पोप साहेब ने नियुक्त किया है? उन मंदिर प्रशासन के कर्ताधर्ता मंत्रालय का प्रशासन ही है न? या उसके लिए भी अपने मुख्यमंत्री को दिल्ली दरबार से हार-फूल  मंजूरी का फतवा लाना होगा? कुल मिलाकर सिर्फ  साई के दरबार में सारा खिलवाड़ चल रहा है। इन नव हिंदुत्ववादियों को मंदिर में हार-पूâलों से आपत्ति क्यों है? एक तरफ नव हिंदुत्ववादी नकली सरकार दही-हंडी उत्साह से मनाएं कहती है। भीड़ पर कोई भी प्रतिबंध नहीं लगाती है। मुंबई समेत राज्य में कोरोना, स्वाइन फ्लू बढ़ रहा है फिर भी मुख्यमंत्री और उनके डिप्टी साहेब भीड़वाली राजनीतिक हंडियां फोड़ते फिर रहे थे। अब सार्वजनिक गणेशोत्सव आदि भी जोरों में मनाएं, ऐसा कहा गया है। ये ठीक ही हुआ। मतलब पूरे राज्य में कहें तो किसी तरह की भी पाबंदी नहीं। फिर केवल शिर्डी के साई दरबार में हार,  फूल , नारियल आदि पर पाबंदी का कारण क्या? दरअसल भगवान और संत कुछ ‘हार, फूल , नारियल, प्रसाद ले आओ नहीं तो मैं तुम्हें दर्शन नहीं दूंगा,’ ऐसा नहीं कहते। साईबाबा तो फकीर ही थे। बतौर संत वही लोगों को देते थे। पानी का दीया जलाकर रोशनी देनेवाले इस संत के नाम से शिर्डी और आस-पास के परिसरों में हजारों लोगों के चूल्हे आज जलते हैं। शिर्डी की हार, फूल , नारियल, प्रसाद की दुकानें गोर गरीबों की हैं। वो पिछले डेढ़-दो वर्षों से बंद हैं। दूसरी ओर शिर्डी में इस पाबंदी के चलते इस पंचकोशी में पिछले कई दशकों से फूलों  की खेती करनेवाले छोटे किसान, व्यवसायी परेशान हैं। उनके व्यवसाय पर ही इस पाबंदी की कुल्हाड़ी चली है। विक्रेता , किसान, मजदूर ऐसे लाखों लोगों की आजीविका, रोजगार की समस्या शिर्डी के साई दरबार से जुड़ी हुई है और ये सभी लोग पिछले कई दिनों से हार-फूलों  पर से पाबंदी हटाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं, अनशन कर रहे हैं। शिर्डी संस्थान के सुरक्षा रक्षकों की लाठियां खा रहे हैं। शिर्डी के दिगंबर कोते, कोपरगांव के संजय काले ने इस समस्या के लिए जन आंदोलन खड़ा किया, लेकिन नव हिंदुत्ववादी सत्ताधारी चुप हैं। पूरे महाराष्ट्र में अकेले शिर्डी के हार-फूलों  पर ही रोष क्यों? राज्य के सभी किसान अमीर नहीं हैं। फूलों  की खेती करनेवाले वैसे गरीब ही हैं, लेकिन सरकार फूलों  की खेती करनेवाल्ेâ गरीबों की तरफ झांककर देखने को तैयार नहीं। नई सरकार के मंत्री और अन्य प्रमुख सम्मान में हार-पूâल और उपहार स्वीकार कर रहे हैं। खुद पर ट्रक-ट्रक भर फूल  उड़ेल रहे हैं, लेकिन साई के शिर्डी संस्थान में सिर्पâ हार-फूल  नहीं लाना है, ऐसा जालिम फतवा बरकरार है। श्रीमान राधाकृष्ण पाटील और उनके सांसद चिरंजीव ये इस क्षेत्र के प्रमुख हैं, लेकिन हार-फूलों की  समस्या सरकार नाम का मंदिर प्रशासन उनकी भी नहीं सुनता है तो तुम्हारी वतनदारी को आग लगे। अब इस संबंध में फैसला  लेने के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति नियुक्त की गई है। यह समिति अंतिम रिपोर्ट देगी और फिर शासनस्तर पर कहते हैं कि उचित फैसला  लिया जाएगा। शिर्डी के साईबाबा को हार-फूल  और नारियल चढ़ाने की अनुमति देना, यह इतना गहन और पेचीदा समस्या है क्या? साई भक्तों की और स्थानीय गरीब जनता की सहनशीलता का आप कितना अंत देखेंगे? साईबाबा ने श्रद्धा और सबुरी का मंत्र दिया है, यह सही, लेकिन घर का चूल्हा ही बुझ जाए, पेट की आग भड़क उठे तो फूलों  की भी ज्वाला बन जाएगी। शिर्डी का वातावरण फिलहाल यही बता रहा है। मुख्यमंत्री उनके डिप्टी सहित ‘अर्जंट’ दिल्ली जाएं और शिर्डी के हार-फूलों  के संदर्भ में क्या निर्णय लिया जाए, इसका हल लेकर लाएं। तब तक साईबाबा के भक्तों को शांत रहने की सद्बुद्धि दें। लोग भड़क उठे, फूलों  में आग लग जाए तो संत साईबाबा को ईडी और सीबीआई कार्रवाई के आदेश दिए जाएंगे। तो फूल , कलियों, संतों शांत रहो! भगवान चुप रहो। फूल  सिर्फ  मंत्रियों के लिए हैं। इस नव हिंदुत्ववादियों के राज्य में भगवान सूखे ही रहेंगे!

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