मुख्यपृष्ठनए समाचारसंपादकीय : लद्दाख की भूमि पर गांधी!

संपादकीय : लद्दाख की भूमि पर गांधी!

श्री राहुल गांधी फिलहाल लेह और लद्दाख के दौरे पर हैं और वहां की जनता ने राहुल गांधी के दौरे को भारी प्रतिसाद दिया है। लद्दाख की सीमा से चीन लगातार हमला कर रहा है। पिछले पांच-छह सालों में चीन ने हमारी हद में घुसपैठ कर जमीन पर कब्जा जमाया है। कई जगहों पर चीनी व हिंदुस्थानी सैनिकों में संघर्ष हुआ, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी यह सत्य स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। प्रधानमंत्री मोदी दावा करते हैं कि लद्दाख की इंच भर भी जमीन नहीं गंवाई गई है, लेकिन मोदी पूरी तरह से झूठ बोल रहे हैं, चीन ने हमारे भू-भाग पर अतिक्रमण किया है यह सत्य राहुल गांधी ने उजागर किया है। चीन ने हिंदुस्थान की हद में घुसपैठ की ही है। चीन ने चरागाहों की जमीन को कब्जे में कर लिया है। इसलिए इंच भर भी जमीन गंवाई नहीं, यह प्रधानमंत्री मोदी का यह दावा झूठा होने की बात राहुल गांधी ने लद्दाख की भूमि से स्पष्ट किया है। राहुल गांधी द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी सच उजागर करने पर भारतीय जनता पार्टी ने तंज कसना शुरू कर दिया और मोदी भक्त एक बार फिर से भूतकाल के गड़े मुर्दे उखाड़ने में लग गए। भाजपा के अनुसार राहुल गांधी देश का अपमान कर रहे हैं। चीन ने घुसपैठ की है? यह सवाल पूछने से देश का कौन-सा और वैâसा अपमान हुआ है? क्या यह भाजपा प्रवक्ता बता सकते हैं? राहुल गांधी खुद मोटरसाइकिल चलाकर लेह से होकर लद्दाख तक गए। यह रास्ता दुर्गम और धोखादायक है। राहुल गांधी का यह साहस किसी वीर जवान की तरह है। वहां से वे पैंगांग पहुंचे और नुब्रा, कारगिल भी गए। इस सभी के पीछे राहुल गांधी की देशभक्ति ही है। देशभक्ति का ठेका भाजपा ने ही नहीं लिया है। सत्य जानने की जिज्ञासा उनकी है। राहुल गांधी पर तंज कसते हुए भाजपा नेता कहते हैं, ‘हिंदी चीनी भाई भाई’ यह नारा किसने दिया था? नेहरू के काल में ही चीन ने ४५ हजार वर्ग किलोमीटर जमीन हड़प ली।’ सवाल वर्तमान काल का है लेकिन भाजपा वाले हमेशा की तरह भूतकाल की अंधेरी गुफा में घुस रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के ५६ इंच के सीने के बावजूद चीन भीतर तक घुस आया और उसने हमारी कई चौकियों पर कब्जा जमा लिया। पूर्वी लद्दाख की सीमा पर स्थित पैंगांग क्षेत्र में ५ मई, २०२० को चीन और हिंदुस्थानी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हई थी, जिसमें हमारे २० जवान शहीद हुए थे। यह क्यों हुआ, इसका हिसाब जनता मांग रही है। ‘हिंदी चीनी भाई भाई’ को भाजपा के विरोध का कोई तुक नहीं है। क्योंकि प्रधानमंत्री बनने के बाद से मोदी ने चीन के साथ संबंध सुधारने पर बल दिया। चीन के राष्ट्राध्यक्षों को वे सतत अमदाबाद बुलाकर सेव, ढोकला, खाखरा से खातिरदारी करते हैं। मोदी के साथ चीनी राष्ट्रपति झूले पर बैठकर मौज करते हैं। ‘हिंदी चीनी भाई भाई’ वाले नेहरू के उस संदेश को मोदी द्वारा स्वीकृति दिए जाने के ही यह लक्षण कहे जाएंगे। चीन ने जब घुसपैठ की इसलिए हिंदुस्थानी सैनिकों को चीन पर सर्जिकल स्ट्राइक करने के आदेश मोदी ने नहीं दिए हैं। लोकतंत्र में नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि अपने राष्ट्र के मान खंडन की निश्चित जिम्मेदारी किसकी होती है, देश की सीमाओं की रक्षा करना यह लोगों द्वारा चुनी गई सरकार का काम ही है। सरकार को अपने अच्छे-बुरे कृत्यों का जवाब लोगों के सामने आकर देना ही चाहिए और जब सरकार ऐसा करने से इनकार करती है तब किसी न किसी को यह जिम्मेदारी उठानी पड़ती है। १९६२ के दौरान राष्ट्रीय मानहानि का अपराध किसके हाथों हुआ, यह जानने का अधिकार भाजपा को जरूर है, तो फिर ५ मई, २०२० को मोदी के कार्यकाल में चीन लद्दाख में हमारी सीमा के भीतर कितनी दूरी तक घुसा और उसने वहां क्या हथियाया, देश का रक्षा विभाग उस वक्त क्या कर रहा था, यह जानने का अधिकार हम सभी को भी है। राहुल गांधी ने लद्दाख की भूमि पर जाकर वही किया है। चीन ने लद्दाख की सीमा पर सड़क, पुल बनाए हैं। सैनिक छावनियों, एयरबेस की योजना बनाई है। चीन का सैन्य सामर्थ्य हिंदुस्थान की तुलना में बहुत अधिक है। प्रधानमंत्री मोदी चीनी राष्ट्राध्यक्ष को अमदाबाद निमंत्रित करके चाहे कितने ही ‘झूले’ झुलाए, फिर भी ‘भाई-भाई’ या ‘मित्रता’ जैसी निरर्थक कथाओं पर चीन यकीन नहीं करता। चीन ने लद्दाख में घुसपैठ की ही है और वो कई बार चीन के नक्शे में अरुणाचल प्रदेश को दिखाकर हमें आंखें दिखा चुका है। मोदी जैसा ‘सुपरमैन’ प्रधानमंत्री हमारे नसीब आने के बावजूद चीन द्वारा हिंदुस्थान के प्रति ऐसी टेढ़ी चाल चलना यह मोदी भक्तों को मान्य नहीं है। राहुल गांधी लद्दाख की भूमि पर हैं। उन्होंने चीनी घुसपैठ का सत्य सबके सामने। भाजपा को यदि यह मान्य नहीं है तो वह असली सच्चाई सबूतों के साथ प्रस्तुत करे!

अन्य समाचार