मुख्यपृष्ठनए समाचार संपादकीय : गैस दर की जुमलेबाजी ...राहत और आह

 संपादकीय : गैस दर की जुमलेबाजी …राहत और आह

देश में व्यावसायिक गैस सिलिंडर लगभग ३० रुपए सस्ता हो गया है। नए वित्त वर्ष के पहले ही दिन केंद्र सरकार ने यह ‘खुशखबर’ आम जनता को दी, ऐसी पिपिहरी सत्ता पक्ष की ओर से बजाई जा रही है। आप अपनी इस बिना आवाज की पिपिहरी खुशी से बजाएं, लेकिन अगर लोकसभा चुनाव नहीं होते तो क्या दरों में यह कटौती होती? पहले इस प्रश्न का उत्तर दें। आप कितना भी दिखावा कर लें, लेकिन दर कटौती का यह लॉलीपॉप दिखाने के पीछे लोकसभा चुनाव का शुरुआती दाव है, यह जनता को भी समझ में आ रहा है। पिछले १० वर्षों में मोदी सरकार की इस जुमलेबाजी और धोखेबाजी का अनुभव जनता ने कई बार लिया है। अब उससे अलग और क्या होनेवाला है? एक व्यावसायिक गैस सिलिंडर की कीमत ३० रुपए ५० पैसे कम हुई है। मतलब मुंबई में यह सिलिंडर १,७१७.५० रुपए में उपलब्ध होगा। कोलकाता में इसकी कीमत १,८७९ रुपए तो चेन्नई में १,९३९ रुपए होगी। यह कीमत कम होने से आम जनता की जेब का भार थोड़ा कम होगा, यह मान लें तो भी दरकटौती का यह सुख उन्हें कब तक मिलेगा, यह मुख्य प्रश्न है। क्योंकि चुनाव होने तक यह दरकटौती की पुंगी बजाई जाएगी और चुनाव खत्म होते ही यह तोड़-मोड़कर हजम कर दी जाएगी। मोदी सरकार की यही आदत है। इससे पहले पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमत जब बढ़ती तो यह मंडली संबंधित कंपनी की तरफ उंगली उठाती। सरकार उसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती है इसलिए असमर्थ होने का दिखावा करती। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की दर वृद्धि की ओर इशारा करके हाथ ऊपर कर लेती। मतलब र्इंधन दर वृद्धि पर खुद की जवाबदारी से बचना और उसकी दर में कमी आई तो उसका श्रेय खुद लेना। खुद ही खुद की पीठ थपथपाना। गैस सिलिंडर की कीमत कम करने को लेकर अब यही चल रहा है। फिर उसमें भी मोदी सरकार की हमेशा की चतुराई है ही। ‘व्यावसायिक गैस सिलिंडर की कीमत कम कर दी होऽऽऽ’, ऐसी पिपिहरी बजानेवाली सरकार ने घरेलू गैस सिलिंडर के दाम ‘जैसे थे’ वही क्यों रखे? उसे कम क्यों नहीं किया? मोदी सरकार का ‘व्यावसायिक प्रेम’ जगजाहिर है। तब भी गैस सिलिंडर में इस तरह का भेदभाव करने की वजह क्या है? व्यावसायिक गैस सिलिंडर की कीमतों को कम करने के पीछे कहीं ‘चुनावी बॉन्ड घोटाला’ तो नहीं है न? ऐसी शंका कल आम जनता को हो सकती है। इसका जवाब क्या पार्टी कार्यकर्ताओं के पास है? व्यावसायिक गैस सिलिंडर सस्ता होने पर आपत्ति होने की वजह नहीं है, लेकिन इसके साथ ही घरेलू गैस ग्राहकों को भी चुनाव काल तक ही सही, दर कटौती का क्षणिक आनंद दिया होता तो कोई नुकसान नहीं होता। देश की १४० करोड़ जनता ही अपना परिवार है, ऐसा प्रधानमंत्री मोदी उठते-बैठते बोलते रहते हैं। लोकसभा चुनाव के समय उनका यह नारा जरा ज्यादा ही जोर से शुरू है! तो उनके इस १४० करोड़ परिवार में घरेलू गैस ग्राहक नहीं आते क्या? व्यावसायिक गैस ग्राहकों को दरकटौती की ‘राहत’ अवश्य दें, लेकिन आम गैस ग्राहकों की ‘आह’ क्यों लेते हो? यह सीधा प्रश्न है। मोदी सरकार ने आम जनता को हमेशा हल्के में लिया है, यही इस प्रश्न का उत्तर है। अब तो सत्ताधारियों को इस प्रथा को रोकना चाहिए। क्योंकि पिछले १० वर्षों से मिल रहे आपके अनुभवों से देश का आम आदमी सिर्फ चालाक ही नहीं, बल्कि जागरूक भी हो गया है। आपकी गैस दर की यह जुमलेबाजी को वो समझता है और उसे ब्याज सहित इस चुनाव में लौटाने वाला है!

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