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संपादकीय : दारूबंदी का ‘गुजरात मॉडल’!

सख्त दारूबंदी वाले गुजरात में ये क्या हो रहा है? जहरीली शराब पीने से गुजरात में दो दिन में २९ लोगों की तड़प-तड़पकर मौत हो गई। जहरीली शराब का प्राशन करनेवाले ५० लोगों का स्वास्थ्य चिंताजनक है। इसलिए दारूकांड के बलि लोगों का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है। गुजरात मतलब आदर्श, गुजरात मतलब सबकुछ ठीक-ठाक, गुजरात मतलब स्वच्छ प्रशासन ऐसा तिलस्म तैयार करके देश को भ्रमित करनेवाले ‘जालसाजी’ का बुर्का फाड़नेवाली घटना के रूप में इस शराब कांड को देखना होगा। गुजरात के तथाकथित सुशासन का गुब्बारा फोड़नेवाली यह घटना गुजरात के बोटाद जिले की है। बोटाद के बारवला तालुका अंतर्गत रोजीद गांव में रविवार २४ जुलाई की रात गांव के कुछ लोगों ने शराब पी और सोमवार की सुबह सभी की तबीयत बिगड़ गई। पेट दर्द, उल्टी की पीड़ा व असह्य वेदना से छटपटाहट शुरू हुई तब परिजन उन्हें तुरंत अस्पताल ले गए। लेकिन अस्पताल पहुंचने के पहले २ लोगों की मौत हो गई। इसके बाद कुछ ही घंटों में १० लोगों की इलाज के दौरान मौत हो गई। मंगलवार को तो मृतकों की संख्या २९ तक पहुंच गई। शराब पीनेवालों में से और ५० लोगों की अस्पतालों में मौत से जंग चल रही है। अकेले रोजीद गांव के ग्रामीणों ने यह जहरीली शराब पी ऐसा नहीं है, पास के और चार गांव के लोग भी इस जहरीली शराब कांड के शिकार बने। इसका मतलब साफ है। इस रोजीद गांव में गावटी शराब अवश्य मिलती है और वहां के अड्डों पर शराब की सरेआम बिक्री होती है। ऐसी बुरा खबर पंचकोशी में फैली होगी इसी वजह से आस-पास के गांव के लोग भी इस शराब कांड की चपेट में आ गए। बोटाद जिले के इस गांव में इतनी बड़ी संख्या में लोगों के शराब पीने के लिए जुटने के बाद भी इस गांव के ग्रामीणों की खबर पुलिस व जिला प्रशासन को कैसे  नहीं हुई? इस घटना के बाद गुजरात पुलिस ने शराब माफियाओं की धर-पकड़ कर दी है। बोटाद शराब कांड के मुख्य आरोपी सहित कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। परंतु इस गिरफ्तारी वगैरह से मारे गए लोग वापस लौटेंगे क्या? गावटी शराब में मिथेनॉल नामक जहरीला रसायन मिलाया जाता है। इसकी आपूर्ति अमदाबाद से होती है। ऐसी कबूली शराब कांड के मुख्य आरोपी ने दी है। मतलब छोटे गांव से अमदाबाद तक अवैध शराब के निर्माण व बिक्री का नेटवर्क  फैला होने का यह प्रमाण है। पुलिस, उत्पादन शुल्क विभाग, प्रशासनिक अधिकारी, राजनीतिज्ञ व शराब माफियाओं की सांठगांठ इतनी मजबूत होगी कि राज्य के कोने-कोने में शराब तस्करी का काम सुगमता से चलता होगा। १९६० से मतलब गुजरात राज्य की स्थापना के समय से ही गुजरात में संपूर्ण शराब बंदी लागू कर दी गई है परंतु ६२ वर्षों की शराब बंदी के दौरान शराब कार्य में किसी तरह की असुविधा अथवा समस्या गुजरात को कभी महसूस नहीं हुई। महात्मा गांधी मूलरूप से गुजरात के थे और गांधी जी शराब के प्रबल विरोधी होने के कारण ही गांधी के राज्य गुजरात में स्थायी शराब बंदी होनी चाहिए। ऐसा नेक मकसद इसके पीछे था लेकिन शराब माफिया, प्रशासन और सरकार में बैठे उनके राजनीतिक संरक्षक इन सभी ने मिलकर शराब बंदी को नाकाम कर दिया। कार्रवाई मात्र के लिए शराब का जखीरा जप्त किए जाने, शराब तस्करों के पकड़े जाने की खबरें गुजराती मीडिया में हमेशा ही दिखाई देती हैं। शराब तस्करी का प्रमाण बढ़ने के बाद २०१७ में गुजरात सरकार ने शराब बंदी का पहले से ही कागज पर रहे कानून को और सख्त कर दिया। नए कानून के अनुसार अवैध मार्ग से शराब बिक्री करनेवाले व्यक्ति को १० वर्ष के कारावास एवं ५ लाख रुपए के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। परंतु इसके बाद भी गुजरात में देशी-विदेशी सभी तरह की शराब बड़ी मात्रा में उपलब्ध कराई जाती है, बेची जाती हैं। शराब बिक्री की शृंखला में लगे सभी लोगों को मालामाल करनेवाले इस ‘नेटवर्क ’ में बड़ी ‘अर्थनीति’ छिपी है। इसलिए ही गुजरात में शराब बंदी सिर्फ  कागज तक ही सीमित रह गई। गुजरात के तथाकथित स्वच्छ प्रशासन का गुणगान देशवासियों को बीते कई वर्षों से नियमित सुनाया जा रहा है। आए दिन ‘गुजरात मॉडल’ का उदाहरण तमाम मंचों से दिया जाता है। लेकिन बोटाद के जहरीली शराब कांड से शराब बंदी के ‘गुजरात मॉडल’ का बुर्का पूरी तरह से फट गया है। हाल में ही हुई बारिश में अमदाबाद सहित गले तक डूबे शहरों की तस्वीरें ‘गुजरात मॉडल’ की अवधारणा कितनी भ्रामक व खोखली है ये पूरी दुनिया को दिखाया। अब शराब बंदी की शराब के कारण मारे गए लोगों के माध्यम से ‘गुजरात मॉडल’ की बची-खुची इज्जत भी चौराहे पर आ गई!

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