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संपादकीय : हरियाणा का भड़काव!

मणिपुर जैसे देश के सीमावर्ती संवेदनशील राज्य जातीय हिंसा में जिन्होंने तीन-चार महीने जलने दिया, वे अब राजधानी दिल्ली और पंजाब की सीमा पर हरियाणा राज्य में भी धार्मिक हिंसा की आग लगाने का प्रयास कर रहे हैं। हरियाणा का नूंह जिला इस महीने की शुरुआत से जिस ‘ब्रिज मंडल शोभायात्रा’ के कारण जातीय आग से झुलसा जा रहा था, उसी नूंह में फिर से धार्मिक तनाव की चिंगारी लगाई गई है। विश्व हिंदू परिषद की ओर से फिर से एक बार यहां ‘ब्रिज मंडल शोभायात्रा’ निकालने की घोषणा हुई और नूंह जिले की सैनिक छावनी में बदल दिया गया। राज्य की भाजपा सरकार ने इस शोभायात्रा को अनुमति नहीं दी, लेकिन फिर भी शोभायात्रा के आयोजक अपने पैâसले पर अडिग थे। नूंह में जलाभिषेक करेंगे ही, इस भूमिका पर वे कायम थे। ३१ जुलाई को इसी कारण से नूंह जिले समेत गुरुग्राम, सोहनी और फरीदाबाद जिलों में धार्मिक हिंसा की आग फैली थी। उसमें सात-आठ निरपराध लोगों को प्राण गंवाने पड़े थे। सैकड़ों लोग घायल हुए थे। संपत्ति की भारी क्षति हुई थी। इंटरनेट सेवा और स्कूल-कॉलेज कुछ दिन बंद रखने की बदनामी हरियाणा की भाजपा सरकार को झेलनी पड़ी थी। १० से १५ दिन संचार बंदी, निषेधाज्ञा लागू करने पर नूंह में परिस्थिति किसी तरह पटरी पर आई थी। लेकिन अपूर्ण रही। ब्रिज मंडल शोभायात्रा २८ अगस्त को पूरी करेंगे ही, ऐसी घोषणा की गई और फिर से जातीय तनाव निर्मित होने का खतरा पैदा हो गया। उस पर हरियाणा की भाजपा सरकार द्वारा यात्रा की अनुमति देने से इंकार करने की चालबाजी की गई, जो एक नौटंकी ही थी। कारण ‘शोभायात्रा को अनुमति नहीं दी गई है, लेकिन यात्रा में शामिल होने की बजाय लोग अपने-अपने क्षेत्रों के मंदिरों में जलाभिषेक के लिए जा सकते हैं’, ऐसा मुख्यमंत्री खट्टर बोले। उसी के साथ नलहड स्थित मंदिर में जलाभिषेक करने की हरियाणा पुलिस ने ही अनुमति दी। यह ढोंग नहीं तो क्या है? श्रावण सोमवार के मुहूर्त पर हिंदुओं को मंदिरों में जलाभिषेक जरूर करना चाहिए। उस पर कोई भी आपत्ति नहीं उठाएगा, बल्कि कल तक यह सब होता भी आया है। हालांकि, शांति से संपन्न होनेवाली यह परंपरा आज अचानक जातीय-धर्मीय सद््भावना नष्ट करनेवाली, धार्मिक हिंसा का कारण क्यों बन रही है? क्योंकि उस माध्यम से हिंदू और अन्य धर्मियों की भावनाएं भड़काना, उस दंगे में निरपराधियों के रक्त से ‘अभिषेक’ होने देना और उस आग में अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने की साजिशें जारी हैं। २०२४ के लोकसभा चुनाव और हरियाणा समेत कुछ राज्यों में होनेवाले विधानसभा चुनाव आंखों के सामने रखकर भाजपा के लोग जगह-जगह धार्मिक हिंसा की चिंगारी भड़काने के धंधे कर रहे हैं। अभी चार सप्ताह पहले ही जिस शोभायात्रा ने हरियाणा के नूंह में धार्मिक हिंसा की आग भड़काई थी वह शोभायात्रा फिर उसी जगह से निकालने की धूर्तता इसी धंधे का एक हिस्सा है। उस पर ये सभी हिंदुत्व के नाम पर शुरू है। यह सच्चा हिंदुत्व नहीं है। यह सत्ता पक्ष का बनावटी हिंदुत्व है। राजनीतिक स्वार्थ के लिए इसका आधार लिया जा रहा है। हिंदुत्व के नाम पर निरपराधियों के रक्त को बहाया जा रहा है। असली हिंदुत्व को बदनाम करनेवाली हरियाणा का भड़काव इसी के लिए ही जारी है।

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